अयोध्या में सम्राट चौधरी ने पगड़ी खोल कराया मुंडन, नीतीश को कुर्सी से हटाने का लिया था संकल्प

पटना। नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी से उतारने का संकल्प लेकर मुरेठा धारण करने वाले डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने आखिरकार आज अपना मुरेठा उतार दिया। अयोध्या में रामलला के चरणों में उन्होंने अपनी पगड़ी समर्पित कर दिया और मुंडन कराने के बाद सरयू में डुबकी लगाकर नया संकल्प ले लिया है। दरअसल, नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी से उतारने और खुद सीएम बनने का सपना संयोए सम्राट चौधरी का सपना उस वक्त टूट गया जब नीतीश कुमार एक बार फिर से पलटी मारकर एनडीए में शामिल हो गए थे। नीतीश कुमार के महागठबंधन के साथ रहते सम्राट चौधरी ने संकल्प लिया था कि जबतक नीतीश को कुर्सी से नहीं उतारेंगे पगड़ी नहीं उतारेंगे। सम्राट ने यह कसम तब खाई थी जब बिहार में महागठबंधन की सरकार थी और बीजेपी विपक्ष की भूमिका में थी लेकिन नीतीश कुमार ने अचानक पाला बदल लिया और फिर से एनडीए के हिस्सा हो गए। नीतीश के पाला बदलने के बाद भी जब सम्राट अपना मुरेठा नहीं उतार रहे थे, तब इसको लेकर विपक्षी दलों ने उनके ऊपर तंज भी किया था। नीतीश को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटाने का सपना टूटने के बाद थक हारकर आखिरकार सम्राट चौधरी ने भारी भरखम मुरेठा को उतार देना ही वाजिब समझा और मंगलवार को वह बीजेपी नेताओं के साथ अयोध्या कूच कर रहे हैं। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के साथ साथ पार्टी के कई नेता उनके साथ अयोध्या पहुंचे और बुधवार को सम्राट चौधरी ने अपना मुरेठा रामलला को समर्पित कर दिया। मुरेठा उतारने के बाद सम्राट चौधरी ने अपना मुंडन कराया और फिर सरयू नदी में डुबकी लगाकर एक नया संकल्प ले लिया। सम्राट ने बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को 243 सीटों में से 200 से अधिक सीटों पर जीत दिलाने का संकल्प लिया है। इसके बाद सम्राट बीजेपी नेताओं के साथ रामलला का दर्शन करने के बाद बिहार के लिए रवाना हो गए। बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष रहते हुए सम्राट ने तत्कालीन महागठबंधन सरकार के मुखिया (नीतीश कुमार) को पद से हटाने का संकल्प लिया था। उन्होंने कहा कि उनका संकल्प केवल सत्ता के मुखिया को कुर्सी से हटाना नहीं, बल्कि बिहार को जंगल-राज वाले लुटेरों से भी मुक्ति दिलाना था। इसके बाद 28 जनवरी को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महागठबंधन से अलग होकर मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था। उसी दिन नीतीश कुमार के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार बनी। इससे सम्राट चौधरी का संकल्प पूरा हो गया।

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