टीआरई-4 विवाद पर सरकार सक्रिय, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुलाई बड़ी बैठक
- शिक्षक भर्ती अधिसूचना पर होगी अहम चर्चा, शिक्षा विभाग के मंत्री और अधिकारी रहेंगे मौजूद
- अभ्यर्थियों के प्रदर्शन और विपक्ष के हमलों के बीच सरकार पर बढ़ा दबाव
पटना। बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-4 को लेकर चल रहे विवाद और लगातार हो रहे छात्र आंदोलनों के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ी बैठक बुलाई है। मुख्यमंत्री आज शाम पांच बजे शिक्षा विभाग के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में शिक्षक भर्ती अधिसूचना को लेकर बड़ा निर्णय लिया जा सकता है। लंबे समय से टीआरई-4 की अधिसूचना जारी नहीं होने से अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है और विपक्ष भी इस मुद्दे पर सरकार को लगातार घेर रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार बैठक में शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी, शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और मुख्यमंत्री सचिवालय के अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की जाएगी और अधिसूचना जारी करने को लेकर अधिकारियों से विस्तृत जानकारी ली जाएगी। इसके साथ ही शिक्षा विभाग के कामकाज और लंबित मामलों पर भी चर्चा होने की संभावना है। दरअसल बिहार लोक सेवा आयोग की टीआरई-4 भर्ती परीक्षा को लेकर पिछले कई महीनों से अभ्यर्थी आंदोलन कर रहे हैं। छात्र संगठनों और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं का कहना है कि सरकार लगातार आश्वासन दे रही है, लेकिन अब तक भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। इसी को लेकर पटना समेत राज्य के कई जिलों में प्रदर्शन हुए हैं। हाल ही में राजधानी पटना में प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों पर पुलिस की कार्रवाई और लाठीचार्ज के बाद यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक हो गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस पूरे मामले को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के साथ अन्याय और विश्वासघात कर रही है। तेजस्वी यादव ने कहा कि चुनाव से पहले सरकार ने रोजगार और नौकरी देने के बड़े वादे किए थे, लेकिन अब युवाओं की मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। तेजस्वी यादव ने सामाजिक माध्यम मंच “एक्स” पर पोस्ट करते हुए कहा कि बिहार के युवा वही मांग रहे हैं, जिसका वादा चुनाव के समय किया गया था। उन्होंने सवाल उठाया कि टीआरई-4 परीक्षा की मांग करना अपराध कैसे हो सकता है और प्रश्नपत्र लीक का विरोध करना गलत कैसे माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को पुलिस बल का इस्तेमाल करना ही है तो उसे भ्रष्टाचार और अपराध रोकने में करना चाहिए, न कि नौकरी मांग रहे युवाओं पर लाठीचार्ज करने में। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है, लेकिन इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री और मंत्रियों पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार के लोग केवल वीडियो बनाने और प्रचार में व्यस्त हैं, जबकि युवाओं के भविष्य की चिंता किसी को नहीं है। पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने अपने 17 महीने के कार्यकाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि उनकी सरकार ने बिना प्रश्नपत्र लीक के सफलतापूर्वक टीआरई-1 और टीआरई-2 परीक्षाएं आयोजित कराईं। उनके अनुसार उस दौरान दो लाख से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी और लगभग एक लाख तीस हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अब सरकार बदलने, नए मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों के आने तथा पूरे मंत्रिमंडल के बदल जाने के बावजूद टीआरई-4 की अधिसूचना जारी नहीं की गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शिक्षक भर्ती का मुद्दा अब केवल रोजगार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बिहार की राजनीति का बड़ा विषय बन चुका है। लगातार हो रहे छात्र आंदोलन और विपक्ष के हमलों ने सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री को स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा है। उधर छात्र संगठनों ने भी साफ कर दिया है कि यदि जल्द भर्ती अधिसूचना जारी नहीं की गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं और लगातार देरी से उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। अब सभी की नजर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की बैठक पर टिकी हुई है। उम्मीद की जा रही है कि सरकार जल्द कोई बड़ा फैसला लेकर अभ्यर्थियों की नाराजगी दूर करने की कोशिश करेगी। फिलहाल बिहार में टीआरई-4 को लेकर सियासी और छात्र संघर्ष दोनों लगातार तेज होते दिखाई दे रहे हैं।


