मोतिहारी में बड़ा शिक्षा घोटाला उजागर, स्कूल से दूर घूमते रहे शिक्षक, ऑनलाइन लगी हाजिरी

  • ई-शिक्षा कोष पोर्टल की जांच में खुलासा, 22 शिक्षकों का वेतन रोका गया
  • उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल तक मिली शिक्षकों की लोकेशन, डिजिटल हेराफेरी की आशंका

मोतिहारी। बिहार की सरकारी शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। पूर्वी चंपारण जिले के मोतिहारी में शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जांच में खुलासा हुआ है कि कई शिक्षक स्कूल में पढ़ाने की बजाय बिहार और दूसरे राज्यों में घूमते रहे, लेकिन उनकी उपस्थिति ऑनलाइन प्रणाली में स्कूल में ही दर्ज होती रही। इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है और प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी है। पूरा मामला ई-शिक्षा कोष पोर्टल की निगरानी के दौरान सामने आया। यह पोर्टल शिक्षकों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए मोबाइल आधारित प्रणाली पर काम करता है, जिसमें हाजिरी के साथ-साथ संबंधित व्यक्ति की लोकेशन भी दर्ज होती है। इसी डिजिटल निगरानी के दौरान यह गड़बड़ी पकड़ में आई। जांच में पाया गया कि 14 मई को 22 शिक्षकों ने अपने-अपने विद्यालयों में उपस्थिति दर्ज कराई थी, लेकिन उनकी वास्तविक स्थिति अलग-अलग जिलों और राज्यों में पाई गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि दो शिक्षकों की लोकेशन उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में मिली, जबकि रिकॉर्ड में वे मोतिहारी जिले के विद्यालयों में उपस्थित दिखाए गए थे। इसके अलावा कई शिक्षकों की लोकेशन पटना, हाजीपुर, समस्तीपुर, वैशाली, मुजफ्फरपुर, जहानाबाद, रोहतास और झारखंड तक पाई गई। इससे यह संदेह और गहरा गया है कि उपस्थिति प्रणाली में गंभीर स्तर पर छेड़छाड़ की गई है। जैसे ही मामला सामने आया, जिला शिक्षा पदाधिकारी राजन कुमार गिरी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी 22 शिक्षकों का वेतन रोक दिया। साथ ही सभी को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने स्पष्ट कहा है कि इस मामले की विस्तृत जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह मामला केवल साधारण लापरवाही का नहीं, बल्कि सुनियोजित डिजिटल हेराफेरी का भी हो सकता है। अधिकारियों को आशंका है कि या तो किसी अन्य व्यक्ति ने शिक्षकों की पहचान का उपयोग कर उपस्थिति दर्ज की या फिर प्रणाली के साथ तकनीकी छेड़छाड़ की गई। इसी कारण अब तकनीकी जांच भी शुरू कर दी गई है। इस फर्जीवाड़े का सबसे बड़ा असर ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ने वाले बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। कई विद्यालयों में छात्र शिक्षक के इंतजार में बैठे रहते हैं, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में यह दिखाया जाता है कि कक्षाएं नियमित रूप से चल रही हैं। इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, बल्कि सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जांच में जिन प्रखंडों के शिक्षकों के नाम सामने आए हैं उनमें अदापुर, अरेराज, बनकटवा और चकिया क्षेत्र के विद्यालय शामिल बताए जा रहे हैं। इन इलाकों के शिक्षकों की लोकेशन अलग-अलग शहरों और राज्यों में पाई गई, जबकि वे विद्यालय में उपस्थित दर्शाए गए थे। इस खुलासे के बाद पूरे जिले के शिक्षा विभाग में खलबली मची हुई है। सूत्रों के अनुसार शिक्षा विभाग अब केवल 14 मई के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेगा। अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि अन्य दिनों की उपस्थिति और लोकेशन रिकॉर्ड की भी जांच की जाएगी। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में और भी कई शिक्षकों के नाम सामने आ सकते हैं। विभाग अब पूरे उपस्थिति तंत्र की समीक्षा करने की तैयारी में जुट गया है। जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कहा है कि बच्चों की पढ़ाई के साथ किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई शिक्षक विद्यालय में उपस्थित हुए बिना हाजिरी दर्ज करता पाया गया तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ अन्य कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं। इस पूरे मामले ने बिहार की सरकारी शिक्षा व्यवस्था की निगरानी प्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सरकार डिजिटल व्यवस्था को पारदर्शिता और जवाबदेही का माध्यम बता रही है, वहीं दूसरी ओर इस तरह के मामलों ने तकनीकी सुरक्षा और निगरानी की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। फिलहाल शिक्षा विभाग पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है। इस खुलासे के बाद शिक्षकों के बीच भी चिंता का माहौल है, क्योंकि अब विभाग पुराने रिकॉर्ड और डिजिटल उपस्थिति प्रणाली की विस्तृत जांच करने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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