बिहार में विश्वासमत के बाद सियासी घमासान तेज, प्रशांत किशोर ने बहुमत पर उठाए सवाल

  • सम्राट चौधरी सरकार को विधानसभा में मिला विश्वास, विपक्ष ने जनसमर्थन पर जताई शंका
  • प्रशांत किशोर का आरोप—खरीदा गया बहुमत, सत्ता परिवर्तन पर भी उठाए सवाल

पटना। बिहार में नई सरकार के गठन के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा विधानसभा में विश्वासमत हासिल करने के बाद जहां सत्तापक्ष इसे अपनी वैधता और स्थिरता का प्रमाण बता रहा है, वहीं विपक्ष और अन्य राजनीतिक दल इस बहुमत को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं। इसी क्रम में जन सुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। मीडिया से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि यह बहुमत वास्तविक जनसमर्थन का नहीं है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर यह सचमुच जनता के समर्थन का बहुमत होता, तो पहले से ही बड़ी संख्या में विधायकों के समर्थन से चुना गया मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा नहीं जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बहुमत पारदर्शी लोकतांत्रिक प्रक्रिया से नहीं, बल्कि अन्य माध्यमों से हासिल किया गया है। प्रशांत किशोर ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह 202 विधायकों का नहीं बल्कि “खरीदा गया बहुमत” है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस बहुमत को तैयार करने में सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया गया और इसे पीछे के रास्ते से हासिल किया गया। उनके अनुसार, जिन लोगों ने इस प्रक्रिया में भूमिका निभाई, उन्होंने ही पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हटाकर अपने पसंद के नेता को सत्ता में बैठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के व्यक्तित्व पर भी सवाल उठाए। किशोर ने कहा कि सम्राट चौधरी को किसी अदालत ने पूरी तरह दोषमुक्त नहीं किया है, बल्कि उन्हें नाबालिग होने के आधार पर राहत मिली थी। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि सम्राट चौधरी अपने दम पर मुख्यमंत्री नहीं बने हैं, बल्कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय नेतृत्व का समर्थन प्राप्त है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इन आरोपों का अप्रत्यक्ष रूप से जवाब देते हुए कहा कि उनकी सरकार राज्य के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और वह पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में ही काम करेगी। उन्होंने सदन में विश्वासमत प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि नई सरकार स्थिरता और विकास को प्राथमिकता देगी। विधानसभा के विशेष सत्र में मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तुत एक पंक्ति के प्रस्ताव—“यह सभा वर्तमान राज्य मंत्रिपरिषद में विश्वास व्यक्त करती है”—पर करीब 100 मिनट तक चर्चा हुई। इसके बाद सदन ने ध्वनिमत से इस प्रस्ताव को पारित कर दिया। उल्लेखनीय है कि विपक्ष ने मत विभाजन की मांग नहीं की, जिससे प्रस्ताव को आसानी से मंजूरी मिल गई। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने विश्वासमत के पक्ष में निर्णय सुनाया। बहस के दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने अंततः “चुने हुए मुख्यमंत्री” की जगह “निर्वाचित मुख्यमंत्री” बना ही लिया। उन्होंने सरकार की स्थिरता और प्रक्रिया पर सवाल उठाए। वहीं उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए सरकार के पक्ष में मजबूती से तर्क रखे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बिहार की राजनीति इस समय एक महत्वपूर्ण दौर से गुजर रही है, जहां सत्ता परिवर्तन के साथ-साथ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। विश्वासमत के बाद भी सियासी बयानबाज़ी का दौर जारी है, जो आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। विधानसभा में बहुमत हासिल करने के बावजूद सम्राट चौधरी सरकार को विपक्ष के सवालों और आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। यह स्पष्ट है कि बिहार की राजनीति में अभी स्थिरता आने में समय लगेगा और आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियां और तेज होंगी।

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