देश में फिर महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, आम आदमी की जेब पर बढ़ा बोझ

  • 12 दिनों में चौथी बार बढ़े ईंधन के दाम, पटना में पेट्रोल 112 रुपए के पार
  • कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया संकट का असर, मालभाड़ा से लेकर खेती तक महंगाई की आशंका

नई दिल्ली। देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। तेल कंपनियों ने 25 मई से पेट्रोल के दाम में 2 रुपये 61 पैसे प्रति लीटर और डीजल में 2 रुपये 71 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि का ऐलान किया है। लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। नई दरें लागू होने के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 102 रुपये 12 पैसे प्रति लीटर और डीजल 95 रुपये 20 पैसे प्रति लीटर हो गया है। वहीं बिहार में भी ईंधन की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। पटना में अब पेट्रोल की कीमत 112 रुपये 70 पैसे प्रति लीटर और डीजल 99 रुपये 87 पैसे प्रति लीटर पहुंच गई है। नालंदा में पेट्रोल 113 रुपये 99 पैसे और डीजल करीब 100 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर पहुंच गया है। खास बात यह है कि बीते 12 दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में यह चौथी बढ़ोतरी है। इससे पहले 23 मई को भी पेट्रोल में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों का असर अब सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। सबसे पहले मालभाड़ा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। ट्रक और टेम्पो चालकों का खर्च बढ़ने से दूसरे राज्यों से आने वाली सब्जियां, फल, राशन और अन्य जरूरी सामान महंगे हो सकते हैं। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन, स्कूल बसों और ऑटो रिक्शा का किराया भी बढ़ सकता है। खेती-किसानी पर भी इसका असर पड़ना तय माना जा रहा है। किसानों को ट्रैक्टर, पानी के पंप और अन्य कृषि उपकरण चलाने के लिए अब ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। इससे खेती की लागत बढ़ेगी और अंततः अनाज तथा अन्य कृषि उत्पादों की कीमतों में भी वृद्धि हो सकती है। तेल कंपनियों के अनुसार इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान-अमेरिका संघर्ष की वजह से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े हैं। युद्ध शुरू होने से पहले कच्चे तेल की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अब बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है। तेल कंपनियों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत और घाटे की भरपाई के लिए कीमतों में वृद्धि करना जरूरी हो गया था। यदि आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आगे भी बढ़ोतरी हो सकती है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि उपभोक्ता तक पहुंचने से पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कई प्रकार के कर और शुल्क जुड़ जाते हैं। सबसे पहले कच्चे तेल की मूल कीमत तय होती है। इसके बाद रिफाइनरी में तेल को साफ कर पेट्रोल और डीजल बनाया जाता है, जिसमें रिफाइनिंग लागत और कंपनियों का लाभ शामिल होता है। फिर केंद्र सरकार उत्पाद शुल्क और सड़क उपकर लगाती है। इसके बाद डीलर कमीशन जुड़ता है और अंत में राज्य सरकारें मूल्य वर्धित कर या स्थानीय बिक्री कर लगाती हैं। इसी वजह से अलग-अलग राज्यों और शहरों में ईंधन की कीमतें अलग-अलग होती हैं। सरकार ने मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले जनता को राहत देते हुए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी। वहीं 27 मार्च को केंद्र सरकार ने विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क में भी 10-10 रुपये की कमी की थी। इसके बाद पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क 13 रुपये से घटकर 3 रुपये और डीजल पर 10 रुपये से घटकर शून्य कर दिया गया था। हालांकि अब अंतरराष्ट्रीय हालातों के कारण तेल कंपनियां दोबारा कीमतें बढ़ाने को मजबूर हो गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में पश्चिम एशिया के हालात को देखते हुए लोगों से ईंधन का संयमित उपयोग करने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि भारत के पास अपने बड़े तेल भंडार नहीं हैं, इसलिए पेट्रोल, गैस और डीजल का इस्तेमाल सोच-समझकर करना समय की मांग है। इधर बिहार में आज से सुधा ब्रांड के दूध और दुग्ध उत्पाद भी महंगे हो गए हैं। ऐसे में लगातार बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। अब लोगों की नजर सरकार और तेल कंपनियों के अगले कदम पर टिकी हुई है।

You may have missed