भीषण गर्मी से राहत के लिए पटना में प्रशासन अलर्ट, 400 जगहों पर शुरू हुए प्याऊ
- राहगीरों, मजदूरों और रिक्शा चालकों के लिए ठंडे पेयजल और आश्रय की व्यवस्था
- खराब चापाकलों की मरम्मत के लिए विशेष दल तैनात, जल संकट वाले इलाकों में टैंकर से पहुंचाया जा रहा पानी
पटना। जिले में लगातार बढ़ रही उमस भरी गर्मी और तेज धूप से लोगों को राहत दिलाने के लिए जिला प्रशासन ने बड़े स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। भीषण गर्मी के कारण आम जनजीवन प्रभावित होने लगा है। दोपहर के समय सड़कें सूनी पड़ रही हैं और लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। ऐसे हालात को देखते हुए पटना जिला प्रशासन ने लोगों को राहत पहुंचाने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम के निर्देश पर जिले के 17 नगर निकायों और 26 अंचलों में लगभग 400 स्थानों पर प्याऊ शुरू किए गए हैं, जहां लोगों को ठंडा और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रशासन की ओर से लगाए गए ये प्याऊ खास तौर पर चौराहों, बाजारों, बस स्टैंड, भीड़भाड़ वाले इलाकों और सार्वजनिक स्थानों पर स्थापित किए गए हैं। इसका उद्देश्य राहगीरों, रिक्शा चालकों, मजदूरों, दुकानदारों और धूप में काम करने वाले लोगों को राहत पहुंचाना है। तेज धूप और लू जैसे हालात के बीच ये प्याऊ लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहे हैं। जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने कहा कि गर्मी को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि जिले में कहीं भी पेयजल की कमी न हो। उन्होंने कहा कि आम लोगों को गर्मी से राहत देना प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। गर्मी से बचाव के लिए जिला प्रशासन ने 15 आश्रय स्थल भी शुरू किए हैं। इन आश्रय स्थलों पर लोगों को बैठने, आराम करने और ठंडा पानी पीने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। खास तौर पर मजदूरों, दिहाड़ी कामगारों और बेघर लोगों को ध्यान में रखते हुए यह व्यवस्था की गई है, ताकि तेज धूप के दौरान वे सुरक्षित स्थान पर कुछ समय आराम कर सकें। प्रशासन ने केवल लोगों के लिए ही नहीं बल्कि पशुओं के लिए भी विशेष इंतजाम किए हैं। जिले के 12 स्थानों पर जानवरों को पानी पिलाने की व्यवस्था की गई है। पशुपालकों और ग्रामीणों को इससे राहत मिलने की उम्मीद है। ग्रामीण इलाकों में जल संकट की स्थिति को देखते हुए प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत के लिए 46 चलंत मरम्मत दल तैनात किए हैं। ये टीमें जिले के अलग-अलग हिस्सों में घूमकर खराब हैंडपंपों को ठीक करने का कार्य कर रही हैं। प्रशासन का प्रयास है कि लोगों को पेयजल के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े।स्कूलों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर लगे चापाकलों की मरम्मत के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। लोक स्वास्थ्य प्रमंडल पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्र में अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है, ताकि शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। प्रशासन ने लोगों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। लोक स्वास्थ्य प्रमंडल पूर्वी के लिए 0612-2225796 और पश्चिमी प्रमंडल के लिए 0612-2280879 नंबर जारी किया गया है। इन नंबरों पर सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक लोग पेयजल से जुड़ी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इन हेल्पलाइन नंबरों पर चापाकल खराब होने, हर घर नल का जल योजना, पंचायती राज विभाग की जलापूर्ति योजना और मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना से संबंधित शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि शिकायत मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। नगर निकायों के अधिकारियों को भी सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त संख्या में प्याऊ लगाने और चापाकलों को चालू हालत में रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बाजार, हाट, बस स्टैंड और अन्य भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में लोगों को आसानी से पेयजल उपलब्ध हो सके। जहां भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है या चापाकलों से पर्याप्त पानी नहीं निकल रहा है, वहां आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाया जा रहा है। ग्रामीण इलाकों में भी पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विशेष निगरानी रखी जा रही है। आंगनबाड़ी केंद्रों, पंचायत भवनों, विद्यालयों, हाट-बाजारों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर भी बेहतर पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन का मानना है कि बढ़ती गर्मी को देखते हुए समय रहते उठाए गए ये कदम लोगों को राहत पहुंचाने में अहम साबित होंगे। जिले के उप विकास आयुक्त को संपूर्ण पेयजल व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाने की भी तैयारी की जा रही है।


