पटना विश्वविद्यालय में अब एक साथ दो डिग्री की पढ़ाई, छात्रों को मिलेगा बहुविषयक शिक्षा का लाभ
- सिंडिकेट बैठक में दोहरी डिग्री पाठ्यक्रम पर चर्चा, सीनेट और राजभवन की मंजूरी के बाद होगी लागू
- नियमित पाठ्यक्रम के साथ ऑनलाइन रोजगारपरक कोर्स करने का मिलेगा अवसर, विद्यार्थियों की बढ़ेगी रोजगार क्षमता
पटना। पटना विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी और महत्वपूर्ण पहल की तैयारी की जा रही है। अब विश्वविद्यालय के विद्यार्थी एक ही समय में दो अलग-अलग डिग्री हासिल कर सकेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन ने दोहरी डिग्री पाठ्यक्रम लागू करने की दिशा में प्रक्रिया तेज कर दी है। गुरुवार को आयोजित सिंडिकेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। इससे पहले शैक्षणिक परिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी जा चुकी है। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार सिंडिकेट से स्वीकृति मिलने के बाद यह प्रस्ताव 23 मई को होने वाली सीनेट की बैठक में रखा जाएगा। सीनेट से मंजूरी मिलने के बाद इसे अंतिम अनुमति के लिए राजभवन भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति प्राप्त होने के बाद पटना विश्वविद्यालय में दोहरी डिग्री व्यवस्था औपचारिक रूप से लागू कर दी जाएगी। विश्वविद्यालय के शैक्षणिक परिषद सभागार में आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की नई दिशा-निर्देशों के अनुसार छात्रों को एक साथ दो अलग-अलग पाठ्यक्रमों में नामांकन लेने की अनुमति दी जाएगी। इसके तहत स्नातक स्तर के विद्यार्थी तीन या चार वर्षीय मुख्य डिग्री पाठ्यक्रम के साथ किसी रोजगारपरक पाठ्यक्रम में भी अध्ययन कर सकेंगे। वहीं स्नातकोत्तर स्तर के छात्र भी अपने नियमित दो वर्षीय पाठ्यक्रम के साथ व्यावसायिक कोर्स कर पाएंगे। विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि इस योजना के तहत एक पाठ्यक्रम नियमित यानी ऑफलाइन माध्यम में होगा, जबकि दूसरा पाठ्यक्रम ऑनलाइन माध्यम से करना होगा। इससे विद्यार्थियों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा और वे दोनों पाठ्यक्रमों का संतुलित ढंग से अध्ययन कर सकेंगे। हालांकि शोध स्तर यानी पीएचडी कर रहे विद्यार्थियों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि बदलते समय में केवल पारंपरिक डिग्री पर्याप्त नहीं रह गई है। आज के प्रतिस्पर्धी दौर में छात्रों को तकनीकी और व्यावसायिक कौशल भी आवश्यक हैं। इसी उद्देश्य से दोहरी डिग्री व्यवस्था लागू करने की तैयारी की जा रही है, ताकि विद्यार्थी मुख्य विषय के साथ-साथ रोजगारपरक शिक्षा भी प्राप्त कर सकें। उदाहरण के तौर पर यदि कोई छात्र नियमित माध्यम से इतिहास विषय में स्नातक कर रहा है, तो वह साथ ही ऑनलाइन माध्यम से डेटा साइंस, प्रबंधन या अन्य व्यावसायिक विषयों की पढ़ाई भी कर सकेगा। इससे छात्रों की रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी और उन्हें नौकरी के बेहतर अवसर प्राप्त हो सकेंगे। विश्वविद्यालय के शिक्षाविदों का कहना है कि पहले छात्रों को दो अलग-अलग डिग्री प्राप्त करने के लिए छह वर्ष तक का समय देना पड़ता था, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद विद्यार्थी मात्र तीन वर्षों में दो अलग-अलग क्षेत्रों की विशेषज्ञता हासिल कर सकेंगे। इससे समय की बचत होगी और छात्रों को बहुविषयक ज्ञान प्राप्त होगा। बैठक में सैनिक कल्याण बोर्ड के माध्यम से पूर्व सैनिकों के लिए मानव संसाधन प्रबंधन में स्नातक पाठ्यक्रम शुरू करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि यह पाठ्यक्रम पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को नई शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में मदद करेगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नई शिक्षा नीति और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की दिशा-निर्देशों के अनुरूप यह पहल छात्रों के भविष्य को मजबूत बनाने में सहायक साबित होगी। वर्तमान समय में रोजगार बाजार में उन्हीं युवाओं की मांग अधिक है, जिनके पास पारंपरिक शिक्षा के साथ तकनीकी और व्यावसायिक कौशल भी मौजूद हो। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि दोहरी डिग्री योजना लागू होने के बाद छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ कौशल विकास का भी अवसर मिलेगा। इससे विद्यार्थी न केवल शैक्षणिक रूप से मजबूत होंगे, बल्कि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए भी तैयार हो सकेंगे। पटना विश्वविद्यालय की इस पहल को राज्य के उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। यदि यह योजना सफल होती है, तो आने वाले समय में अन्य विश्वविद्यालय भी इसी तरह की व्यवस्था लागू कर सकते हैं। फिलहाल छात्रों और अभिभावकों की नजर अब सीनेट और राजभवन की मंजूरी पर टिकी हुई है, जिसके बाद यह नई शिक्षा व्यवस्था धरातल पर उतर सकेगी।


