August 22, 2026

30 मई तक जीवन प्रमाणीकरण अनिवार्य, नहीं तो रुक सकती है पेंशन

  • 91 लाख से अधिक पेंशनधारियों के लिए सरकार का सख्त निर्देश, पंचायत स्तर पर चलाया जाएगा जागरूकता अभियान
  • डिजिटल सत्यापन व्यवस्था से फर्जी लाभार्थियों पर लगेगी रोक, ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी चुनौतियां बनी चिंता

पटना। बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक सक्रियता तेज हो गई है। राज्य की समाज कल्याण विभाग मंत्री डॉ श्वेता गुप्ता ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि 30 मई से पहले सभी पेंशनधारियों को अपना जीवन प्रमाणीकरण हर हाल में पूरा करना होगा। तय समयसीमा के भीतर प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर संबंधित लाभुकों की पेंशन अस्थायी रूप से रोकी जा सकती है। यह निर्णय सामाजिक सुरक्षा निदेशालय के अंतर्गत संचालित योजनाओं की समीक्षा बैठक के दौरान लिया गया, जिसमें योजनाओं की प्रगति और निगरानी व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई। राज्य सरकार के अनुसार बिहार में फिलहाल लगभग 91 लाख 25 हजार लोग सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। इनमें वृद्धजन, विधवा महिलाएं, दिव्यांगजन, कुष्ठ रोग से प्रभावित लोग तथा अन्य कमजोर वर्ग शामिल हैं। सरकार का कहना है कि इन सभी लाभार्थियों का सही और पारदर्शी आंकड़ा तैयार करना जरूरी है, ताकि किसी प्रकार की फर्जीवाड़ा, दोहरे लाभ या अपात्र व्यक्तियों की पहचान की जा सके। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि शेष बचे सभी पेंशनधारियों का जीवन प्रमाणीकरण निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा कराया जाए। इसके लिए पंचायत स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाने, समाचार पत्रों में सूचना प्रकाशित करने और गांव-गांव तक जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी पात्र व्यक्ति को केवल प्रक्रिया की जटिलता के कारण योजना से वंचित नहीं किया जाएगा। सरकार ने बताया कि जीवन प्रमाणीकरण की पूरी प्रक्रिया निःशुल्क है। लाभार्थी अपने नजदीकी जन सेवा केंद्र या पंचायत स्तर पर लगाए जा रहे विशेष शिविरों में जाकर आसानी से यह कार्य करा सकते हैं। प्रशासन का मानना है कि डिजिटल सत्यापन प्रणाली लागू होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और वास्तविक लाभार्थियों तक समय पर पेंशन पहुंचाने की व्यवस्था अधिक मजबूत होगी।समीक्षा बैठक में योजनाओं की वर्तमान स्थिति और उनके क्रियान्वयन की प्रगति पर भी चर्चा की गई। अपर मुख्य सचिव एच.आर. श्रीनिवास, निदेशालय निदेशक धर्मेंद्र कुमार तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने योजनाओं से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। रिपोर्ट में सामने आया कि कई जिलों में अभी भी जीवन प्रमाणीकरण की प्रक्रिया अपेक्षित गति से पूरी नहीं हो पाई है, जिस पर सरकार ने नाराजगी जताई और अधिकारियों को तेजी लाने के निर्देश दिए। समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित इन योजनाओं का उद्देश्य समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। सरकार का दावा है कि नियमित पेंशन के माध्यम से वृद्ध, विधवा, दिव्यांग और अन्य वंचित वर्गों को सामाजिक सुरक्षा की मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। हालांकि इसके साथ ही यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक माना जा रहा है कि सरकारी सहायता केवल वास्तविक लाभार्थियों तक ही पहुंचे। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में सरकार के इस फैसले को एक बड़े सुधारात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल जीवन प्रमाणीकरण व्यवस्था लागू होने से भ्रष्टाचार और फर्जी लाभार्थियों की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण लगाया जा सकेगा। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल साक्षरता और तकनीकी संसाधनों की कमी अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। गांव-देहात में रहने वाले कई बुजुर्गों और कमजोर वर्गों के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया समझना आसान नहीं होता। ऐसे में पंचायत स्तर पर लगाए जा रहे शिविर और जन सेवा केंद्रों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि किसी भी पात्र लाभार्थी को परेशानी नहीं होने दी जाएगी और जरूरत पड़ने पर स्थानीय स्तर पर सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार ने साफ संकेत दिया है कि 30 मई की समयसीमा केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और अद्यतन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि समय पर जीवन प्रमाणीकरण नहीं कराया गया तो लाखों लाभार्थियों की पेंशन अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है। ऐसे में सरकार और प्रशासन दोनों की कोशिश है कि हर पात्र व्यक्ति तक समय रहते यह प्रक्रिया पूरी कराई जा सके।

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