बेतिया राज की जमीनों के लिए बनेगी नई नियमावली, विधान परिषद में डिप्टी सीएम ने दी जानकारी
पटना। बिहार की ऐतिहासिक बेतिया राज संपत्ति और उससे जुड़ी जमीनों का मामला एक बार फिर विधान परिषद में जोर-शोर से उठा। इस विषय पर पूछे गए सवालों के जवाब में राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि बेतिया राज अधिनियम से संबंधित नई नियमावली तैयार की जा रही है। इस नियमावली के तहत जमीन से जुड़े दावों, आपत्तियों और सुनवाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, ताकि इस लंबे समय से चले आ रहे जटिल विवाद का स्थायी समाधान किया जा सके।
बेतिया राज की जमीनों का ऐतिहासिक संदर्भ
विधान परिषद में राष्ट्रीय जनता दल के सदस्य सौरभ कुमार ने बेतिया राज की जमीनों के ऐतिहासिक और कानूनी पहलुओं पर सवाल उठाया। उन्होंने बताया कि बेतिया राज का साम्राज्य पूर्वी चंपारण और पश्चिम चंपारण जिलों में फैला हुआ था। उस समय बेतिया राज के राजा के पास इस विशाल क्षेत्र का पूर्ण स्वामित्व था। राजा की मृत्यु के बाद उनकी रानी जीवित थीं, लेकिन वह पूरे साम्राज्य का प्रबंधन करने की स्थिति में नहीं थीं। उन्होंने कहा कि राजा ने अपने जीवनकाल में कई जमीनें राज्य के लोगों को दान में दे दी थीं, जिससे उन जमीनों पर संबंधित लोगों का स्वामित्व स्थापित हो गया। हालांकि, इसके बाद भी बड़ी मात्रा में जमीनें बची हुई थीं, जिनका स्वामित्व स्पष्ट नहीं था। इसी बीच अंग्रेजी शासन के दौरान कई जमीनों का बंदोबस्त अंग्रेजों के नाम पर किया गया और बाद में अंग्रेजों ने इन जमीनों को किसानों के नाम पर बंदोबस्ती के रूप में दे दिया।
जमीनों के स्वामित्व और सरकारी वसूली पर उठे सवाल
सौरभ कुमार ने सदन में यह महत्वपूर्ण सवाल उठाया कि वर्ष 1952 से जब भी बेतिया राज की जमीनों की खरीद-बिक्री हुई, तब सरकार ने किस आधार पर राजस्व की वसूली की। उन्होंने यह भी पूछा कि यदि बेतिया राज की जमीनें उस समय बिहार सरकार की नहीं थीं, तो फिर सरकार ने किस अधिकार के तहत मालगुजारी और रसीद जारी की। उन्होंने यह भी कहा कि बेतिया राज की कई जमीनों पर आज सरकारी अस्पताल और कॉलेज संचालित हो रहे हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब जमीन का स्वामित्व स्पष्ट नहीं था, तो सरकार ने किस आधार पर इन संस्थानों की स्थापना की। उन्होंने यह भी मांग की कि यदि सरकार ने इन जमीनों का उपयोग किया है, तो 2024 तक का किराया संबंधित स्वामियों को दिया जाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2014 में सरकार ने राजा और रानी के नाम पर स्थापित अस्पतालों और कॉलेजों के नाम बदल दिए, जो ऐतिहासिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता।
सरकार का जवाब और नई नियमावली की घोषणा
इस गंभीर मुद्दे पर बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने सदन में जवाब देते हुए कहा कि यह विषय काफी जटिल है और सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि बेतिया राज अधिनियम से संबंधित नई नियमावली तैयार की जा रही है, जिसमें जमीन से जुड़े सभी दावों और आपत्तियों की सुनवाई की स्पष्ट व्यवस्था होगी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था वैध प्रमाण और साक्ष्य के साथ जमीन पर अपना दावा प्रस्तुत करती है, तो नियमों के अनुसार उसकी जांच की जाएगी और उचित निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि इस प्रक्रिया में किसी के साथ अन्याय नहीं होगा और सभी मामलों का निष्पक्ष समाधान किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा और इससे जुड़े सभी पक्षों से बातचीत की जाएगी। संबंधित जिलों के जिलाधिकारी, प्रमंडलीय आयुक्त और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से भी इस विषय पर जानकारी ली जाएगी।
कोर्ट ऑफ वार्डस की भूमिका और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि बेतिया राज की संपत्तियों का प्रबंधन लंबे समय तक कोर्ट ऑफ वार्डस के अंतर्गत किया जाता रहा है। यह एक सरकारी व्यवस्था है, जिसके तहत विशेष परिस्थितियों में संपत्तियों की देखरेख और प्रबंधन किया जाता है। सरकार ने यह भी बताया कि बेतिया राज की जमीनों पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए संबंधित जिलाधिकारियों को समय-समय पर निर्देश दिए जाते रहे हैं और इस दिशा में कार्रवाई भी की गई है। सरकार का कहना है कि भूमि विवाद और अतिक्रमण से जुड़े मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है और जल्द ही इसके लिए एक स्पष्ट कानूनी ढांचा तैयार किया जाएगा।
नई नियमावली से विवादों के समाधान की उम्मीद
उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने कहा कि नई नियमावली के तहत जमीन से जुड़े सभी दावों की सुनवाई विधि के अनुसार की जाएगी। यदि किसी व्यक्ति का दावा सही पाया जाता है, तो उसे मान्यता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य इस जटिल समस्या का स्थायी और न्यायसंगत समाधान निकालना है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को जानकारी मिली है कि कुछ असामाजिक तत्व इस मुद्दे का गलत फायदा उठाकर लोगों को परेशान कर रहे हैं और विधि व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे मामलों में सरकार सख्त कार्रवाई करेगी।
सरकार की प्राथमिकता और आगे की दिशा
सरकार ने स्पष्ट किया है कि बेतिया राज की जमीनों से जुड़े विवादों को समाप्त करने के लिए जल्द ही ठोस कानूनी प्रावधान किए जाएंगे। नई नियमावली के लागू होने के बाद जमीन के स्वामित्व, बंदोबस्ती और उपयोग से जुड़े सभी मामलों का समाधान पारदर्शी और विधिसम्मत तरीके से किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया से उन लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो वर्षों से जमीन के स्वामित्व को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं। सरकार ने आश्वासन दिया है कि इस मामले में सभी निर्णय कानून और न्याय के सिद्धांतों के आधार पर लिए जाएंगे, ताकि ऐतिहासिक विरासत और लोगों के अधिकार दोनों की रक्षा की जा सके।


