दरभंगा में एसवीयू की बड़ी करवाई, विद्युत कार्यपालक अभियंता के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी, मचा हड़कंप
दरभंगा/पटना। बिहार में विधानसभा चुनाव की घोषणा के साथ ही पूरे प्रदेश में राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। इस बीच भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करने वाली एजेंसियां भी सक्रिय हो गई हैं। बुधवार को विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने दरभंगा में एक बड़ी छापेमारी कर प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया। यह कार्रवाई राज्य के विद्युत विभाग से जुड़े एक उच्चाधिकारी पर की गई, जिन पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है।
विद्युत कार्यपालक अभियंता पर कार्रवाई
जानकारी के अनुसार, एसवीयू की टीम ने दरभंगा के विद्युत कार्यपालक अभियंता प्रणव कुमार के खिलाफ यह बड़ी कार्रवाई की है। प्रणव कुमार वर्तमान में दरभंगा में तैनात हैं और साथ ही भागलपुर और मुजफ्फरपुर का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान अवैध रूप से करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित की है, जो उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से मेल नहीं खाती।
भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मामला दर्ज
विशेष निगरानी इकाई ने अभियुक्त के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) 1988 की धारा 13(1)(बी), 13(2) और 12 के तहत कांड संख्या 22/2025 दर्ज की है। जांच एजेंसी के अनुसार, अभियुक्त ने जानबूझकर और अवैध रूप से लगभग 1.59 करोड़ रुपये की नाजायज संपत्ति अर्जित की है। एसवीयू का कहना है कि अभियुक्त द्वारा इस संपत्ति के स्रोतों को लेकर कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह संपत्ति अवैध रूप से अर्जित की गई है।
एक साथ कई ठिकानों पर छापेमारी
विशेष निगरानी इकाई ने बुधवार की सुबह दरभंगा, भागलपुर और पटना में एक साथ छापेमारी की कार्रवाई की। यह छापेमारी विशेष न्यायाधीश, निगरानी, पटना के आदेश पर जारी तलाशी वारंट के आधार पर की गई। एसवीयू की टीम ने अभियुक्त के सरकारी कार्यालयों और निजी आवासों की गहन तलाशी ली। छापेमारी के दौरान एजेंसी को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, संपत्ति के कागजात, बैंक खाते से जुड़ी जानकारी और वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड मिलने की उम्मीद है।
एसवीयू की जांच और संभावित खुलासे
एसवीयू की जांच टीम ने बताया कि प्रारंभिक जांच में कई ऐसे साक्ष्य मिले हैं जो अभियुक्त की अवैध संपत्ति अर्जन की ओर संकेत करते हैं। एजेंसी इस बात की जांच कर रही है कि इतनी बड़ी संपत्ति किन माध्यमों से अर्जित की गई और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। छापेमारी में जब्त दस्तावेजों की जांच के बाद कई और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।
चुनावी दौर में बढ़ी निगरानी की सख्ती
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब बिहार में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत इस दौरान भ्रष्टाचार, अवैध धन और संसाधनों के दुरुपयोग पर निगरानी रखी जा रही है। विशेष निगरानी इकाई की यह कार्रवाई प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
सरकारी हलकों में मचा हड़कंप
दरभंगा, भागलपुर और पटना में एक साथ हुई छापेमारी की खबर फैलते ही विद्युत विभाग और अन्य सरकारी दफ्तरों में हड़कंप मच गया। कई अधिकारी और कर्मचारी इस कार्रवाई से हैरान हैं। यह माना जा रहा है कि एसवीयू आने वाले दिनों में अन्य विभागों में भी इसी तरह की जांच शुरू कर सकती है। इससे भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों पर दबाव बढ़ गया है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्त नीति
बिहार सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि राज्य में भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विशेष निगरानी इकाई की यह कार्रवाई उसी नीति का हिस्सा है। पिछले कुछ महीनों में एसवीयू ने कई विभागों में कार्यरत अधिकारियों और इंजीनियरों पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में संपत्ति बरामद की है। इस बार की कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि चाहे चुनावी माहौल हो या सामान्य प्रशासनिक कार्यकाल, भ्रष्टाचार के मामलों में किसी को भी छूट नहीं दी जाएगी। दरभंगा में विद्युत कार्यपालक अभियंता पर हुई एसवीयू की छापेमारी राज्य में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का एक अहम अध्याय है। यह कार्रवाई न केवल प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता लाने का प्रयास है, बल्कि आने वाले समय में अन्य भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक चेतावनी भी है। जांच के नतीजे जो भी हों, यह स्पष्ट है कि बिहार में अब निगरानी एजेंसियां पहले से कहीं अधिक सशक्त और सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जिससे सुशासन की दिशा में एक सकारात्मक संदेश जा रहा है।


