बिहार में विधान परिषद चुनाव का बजा बिगुल, 9 सीटों पर 18 जून को होगा मतदान

  • निर्वाचन आयोग ने जारी किया चुनाव कार्यक्रम, नीतीश कुमार की रिक्त सीट पर होगा उपचुनाव
  • राजनीतिक दलों ने शुरू की रणनीति और उम्मीदवारों पर मंथन, विधानसभा के संख्याबल पर टिकी सबकी नजर

पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार विधान परिषद की खाली हो रही नौ सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव और एक रिक्त सीट पर उपचुनाव कराने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। मंगलवार को जारी चुनाव कार्यक्रम के बाद राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। सभी प्रमुख दलों ने चुनावी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है और संभावित उम्मीदवारों को लेकर अंदरखाने बैठकों का दौर तेज हो गया है। विधानसभा कोटे से होने वाले इस चुनाव को बिहार की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि इन चुनावों के जरिए कई नए समीकरण उभर सकते हैं, जबकि कुछ पुराने समीकरणों में बदलाव भी देखने को मिल सकता है। हालांकि विधानसभा में दलों की वर्तमान संख्या को देखते हुए अधिकांश सीटों के परिणामों का अनुमान पहले से लगाया जा रहा है, लेकिन उम्मीदवारों के चयन को लेकर राजनीतिक दलों के भीतर जबरदस्त खींचतान शुरू हो गई है। निर्वाचन आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार विधान परिषद की जिन नौ सीटों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उन पर नियमित द्विवार्षिक चुनाव कराया जाएगा। इसके अलावा एक सीट पर उपचुनाव भी होगा, जो किसी सदस्य के पद रिक्त होने के कारण खाली हुई है। आयोग ने चुनाव की पूरी प्रक्रिया को निर्धारित समयसीमा के भीतर संपन्न कराने की तैयारी शुरू कर दी है। चुनाव की घोषणा के साथ ही सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष दोनों सक्रिय हो गए हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और महागठबंधन के दल अपने-अपने संभावित उम्मीदवारों के नामों पर मंथन कर रहे हैं। कई नेता और पूर्व विधायक परिषद पहुंचने की उम्मीद में पार्टी नेतृत्व से संपर्क साधने में जुट गए हैं। राजनीतिक दलों के कार्यालयों में भी गतिविधियां बढ़ गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधान परिषद चुनाव भले ही प्रत्यक्ष जनता के मतदान से नहीं होते, लेकिन इनका राजनीतिक महत्व बेहद बड़ा होता है। विधानसभा सदस्यों के वोट से होने वाले इन चुनावों में दलों की ताकत और आंतरिक एकजुटता दोनों की परीक्षा होती है। यही वजह है कि उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक समीकरण, क्षेत्रीय संतुलन और राजनीतिक निष्ठा जैसे पहलुओं को विशेष महत्व दिया जाता है। सूत्रों के अनुसार कई दल ऐसे नेताओं को परिषद भेजने की तैयारी में हैं, जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय हैं लेकिन अभी तक उन्हें कोई बड़ा राजनीतिक अवसर नहीं मिला है। वहीं कुछ दल अनुभवी नेताओं को सदन में बनाए रखने के लिए भी परिषद का रास्ता चुन सकते हैं। महिलाओं, युवाओं और विभिन्न सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के हिसाब से सत्तारूढ़ गठबंधन को इन चुनावों में बढ़त मिलती दिखाई दे रही है। हालांकि विपक्ष भी अपनी रणनीति के जरिए राजनीतिक संदेश देने की तैयारी में है। कई सीटों पर सर्वसम्मति की संभावना भी जताई जा रही है, लेकिन अंतिम तस्वीर उम्मीदवारों की घोषणा के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी। चुनाव आयोग की घोषणा के बाद राजनीतिक दलों के भीतर लॉबिंग भी तेज हो गई है। कई नेता अपने समर्थन में माहौल बनाने में जुट गए हैं। पार्टी स्तर पर गोपनीय बैठकों का दौर चल रहा है और संभावित नामों को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि कुछ सीटों पर चौंकाने वाले नाम सामने आ सकते हैं। विधान परिषद को राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण सदन माना जाता है। यहां शिक्षकों, स्नातकों, स्थानीय निकायों और विधानसभा कोटे से सदस्य चुने जाते हैं। कई बार ऐसे नेता जिन्हें विधानसभा चुनाव लड़ने का अवसर नहीं मिलता, उन्हें परिषद के जरिए सदन में भेजा जाता है। राज्य सरकार में मंत्री बनने के लिए भी कई नेताओं ने विधान परिषद का रास्ता अपनाया है। निर्वाचन आयोग ने सभी राजनीतिक दलों और संबंधित अधिकारियों को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग की ओर से कहा गया है कि पूरी चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संपन्न कराई जाएगी। इसके लिए प्रशासनिक तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में इन चुनावों को लेकर बयानबाजी और रणनीतिक गतिविधियां और तेज होंगी। उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही राजनीतिक माहौल और अधिक गर्माने की संभावना है। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि कौन-कौन नेता विधान परिषद पहुंचने में सफल होते हैं और कौन-से दल इन चुनावों के जरिए अपनी राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन कर पाते हैं।

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