भारत-रूस संबंधों को नई मजबूती, रक्षा, ऊर्जा और व्यापार में गहराता सहयोग

  • ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने भारत आ सकते हैं पुतिन, रणनीतिक साझेदारी पर जोर
  • ऊर्जा आपूर्ति और रक्षा सौदों में रूस का भरोसा, पश्चिमी देशों पर उठाए सवाल

नई दिल्ली। भारत और रूस के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है। भारत में रूस के राजदूत डेनिस अलीपोव ने दोनों देशों के रिश्तों, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक भू-राजनीति पर विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा कि रूस भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका का पूर्ण समर्थन करता है और दोनों देशों के संबंध भविष्य में और मजबूत होंगे। एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि भारत और रूस के बीच उच्च स्तरीय संपर्क लगातार जारी हैं। रूस को उम्मीद है कि सितंबर 2026 में भारत की अध्यक्षता में होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत का दौरा करेंगे। रूस ने ब्रिक्स मंच पर भारत की प्राथमिकताओं को भी अपना पूर्ण समर्थन देने की बात कही है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पिछले वर्ष पुतिन के भारत दौरे के बाद अब इस वर्ष भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रूस दौरे की तैयारियां चल रही हैं, जिस पर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है। भारत-रूस रक्षा सहयोग को लेकर राजदूत ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि एस-400 वायु रक्षा प्रणाली की शेष खेप जल्द ही भारत को सौंप दी जाएगी और इसके लिए तय समय-सीमा का पालन किया जा रहा है। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच संयुक्त रूप से विकसित ब्रह्मोस मिसाइल और ए के-203 असॉल्ट राइफल को उन्होंने सफल सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।राजदूत अलीपोव ने यह भी पुष्टि की कि भारत ने रूस के पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एसयू-57 में रुचि दिखाई है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अन्य रक्षा समझौतों की जानकारी गोपनीय रखी जा रही है, ताकि उन्हें अंतरराष्ट्रीय दबावों से सुरक्षित रखा जा सके। ऊर्जा क्षेत्र में भी रूस भारत का एक महत्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है। अलीपोव ने कहा कि वैश्विक तनाव और पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बावजूद रूस भारत की जरूरत के अनुसार कच्चा तेल और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस की आपूर्ति करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि रूस का रुख हमेशा से स्पष्ट रहा है कि वह भू-राजनीतिक परिस्थितियों की परवाह किए बिना भारत को ऊर्जा उपलब्ध कराता रहेगा। उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय देशों की आलोचना करते हुए उन्हें अविश्वसनीय साझेदार करार दिया। उनके अनुसार, शुल्क और प्रतिबंधों की धमकियों के जरिए अमेरिका भारत-रूस संबंधों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन इससे दोनों देशों के सहयोग पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर रूस ने अपनी स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। अलीपोव ने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों को अनुचित आक्रामकता बताते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन कहा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान को शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के उपयोग का अधिकार है और इस क्षेत्र में स्थायी समाधान केवल कूटनीतिक प्रयासों से ही संभव है। आर्थिक क्षेत्र में भी भारत और रूस के संबंध मजबूत हो रहे हैं। दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। वर्तमान में व्यापार संतुलन भारत के खिलाफ है, जिसे सुधारने के लिए रूस भारत से कृषि उत्पादों, मशीनरी और उच्च तकनीकी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना चाहता है। हाल ही में रूसी उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के भारत दौरे के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ इस विषय पर विस्तृत चर्चा हुई। महत्वपूर्ण बात यह है कि दोनों देशों के बीच लगभग 95 प्रतिशत व्यापार अब राष्ट्रीय मुद्राओं में किया जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के प्रभाव को कम किया जा सके। इसके लिए वित्तीय तंत्र भी विकसित किए गए हैं और उन्हें और अधिक सरल बनाने की दिशा में काम जारी है। भारत और रूस के बीच सहयोग रक्षा, ऊर्जा और व्यापार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लगातार विस्तार पा रहा है। यह साझेदारी न केवल दोनों देशों के लिए लाभकारी है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी शक्ति संतुलन को प्रभावित करने की क्षमता रखती है।