उन्नाव में भीषण सड़क हादसा, डबल डेकर बस पलटी; दरोगा और कैदी समेत 6 यात्रियों की मौत
- लखनऊ-आगरा द्रुतगामी मार्ग पर तड़के हुआ हादसा, चालक को झपकी आने से बस अनियंत्रित होने की आशंका
- तीन पुलिसकर्मियों समेत 21 घायल, कई यात्री खिड़कियों से नीचे गिरे; मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जताया शोक
पटना। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में मंगलवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसे में बिहार पुलिस के एक दरोगा और एक कैदी समेत छह लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन पुलिसकर्मियों सहित 21 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा लखनऊ-आगरा द्रुतगामी मार्ग पर उस समय हुआ जब दिल्ली से बिहार जा रही एक दो मंजिला वातानुकूलित बस अनियंत्रित होकर पलट गई। हादसे के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और कई यात्री बस की खिड़कियों से बाहर जा गिरे। मृतकों में बिहार के सीवान पुलिस लाइन में तैनात दरोगा रामचंद्र राम और गुरुग्राम निवासी कैदी छत्तरपाल सिंह तोमर की पहचान हो चुकी है, जबकि चार अन्य मृतकों की पहचान समाचार लिखे जाने तक नहीं हो पाई थी। पुलिस के अनुसार बस में लगभग 30 यात्री सवार थे और उनमें अधिकतर लोग बिहार के विभिन्न जिलों के रहने वाले थे। जानकारी के मुताबिक सीवान पुलिस की एक टीम 24 मई को एक कैदी को हरियाणा के गुरुग्राम न्यायालय में पेशी के लिए लेकर गई थी। पेशी पूरी होने के बाद पुलिसकर्मी और कैदी बिहार लौट रहे थे। इसी दौरान उन्नाव जिले के औरास थाना क्षेत्र में लखनऊ-आगरा द्रुतगामी मार्ग के किलोमीटर संख्या 262 के पास यह बड़ा हादसा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बस काफी तेज रफ्तार में चल रही थी। अचानक चालक ने वाहन से नियंत्रण खो दिया और बस डिवाइडर से टकराकर पलट गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस सड़क किनारे लगी रेलिंग पर लटक गई। कई यात्री खिड़कियों से बाहर निकलकर नीचे ढलान वाली जगह पर जा गिरे। हादसे के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और चारों तरफ मदद के लिए चीख-पुकार सुनाई देने लगी। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया। ग्रामीणों और राहगीरों ने बस के भीतर फंसे लोगों को बाहर निकालने में मदद की। सूचना मिलते ही पुलिस, उत्तर प्रदेश द्रुतगामी औद्योगिक विकास प्राधिकरण की टीम और कई एंबुलेंस मौके पर पहुंच गईं। घायलों को तत्काल नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। अस्पताल में घायलों की हालत देखकर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कई यात्री गंभीर रूप से घायल थे और दर्द से कराह रहे थे। चिकित्सकों ने जांच के बाद छह लोगों को मृत घोषित कर दिया। प्राथमिक उपचार के बाद करीब 20 घायलों को बेहतर इलाज के लिए लखनऊ स्थित ट्रॉमा सेंटर भेजा गया, जबकि कुछ घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक महिला यात्री को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। पुलिस की प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण चालक को झपकी आना बताया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि चालक लंबे समय से लगातार वाहन चला रहा था, जिसके कारण उसे नींद आ गई और बस अनियंत्रित हो गई। हालांकि पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और तकनीकी पहलुओं की भी जांच की जाएगी। हादसे के बाद बस में यात्रियों का सामान सड़क पर बिखरा पड़ा था। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त बस को द्रुतगामी मार्ग से हटवाया ताकि यातायात सामान्य हो सके। कुछ समय तक मार्ग पर वाहनों की लंबी कतार लगी रही। इस दर्दनाक घटना पर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताते हुए घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को घायलों के समुचित इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। पुलिस के अनुसार बस में सवार अधिकांश यात्री बस्ती, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर और बिहार के विभिन्न जिलों के रहने वाले थे। कई लोग रोजगार और निजी कार्यों के सिलसिले में दिल्ली गए थे और वापस अपने घर लौट रहे थे। हादसे के बाद परिजनों को सूचना दी गई, जिसके बाद कई परिवार अस्पतालों की ओर रवाना हो गए। स्थानीय प्रशासन ने मृतकों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं घायलों के इलाज पर लगातार नजर रखी जा रही है। हादसे के बाद एक बार फिर लंबी दूरी की बस सेवाओं में चालक की थकान और सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार यात्रा करने वाले चालकों की नियमित स्वास्थ्य जांच और पर्याप्त विश्राम की व्यवस्था जरूरी है ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं को रोका जा सके।


