पीएमसीएच में होगा बड़ा डिजिटल बदलाव, मई से शुरू होगी पेपरलेस व्यवस्था, मरीजों को राहत
- नए भवन में तेज इंटरनेट से सेवाएं होंगी सुलभ, कागजरहित प्रणाली की ओर बढ़ेगा अस्पताल
- मरीजों को त्वरित इलाज और पारदर्शी व्यवस्था का लाभ, पूरे सिस्टम को जोड़ने की तैयारी
पटना। बिहार के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शामिल पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल अब आधुनिक और डिजिटल व्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ रहा है। मरीजों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अस्पताल को उच्च तकनीक से लैस किया जा रहा है। इसी क्रम में मई के दूसरे सप्ताह से अस्पताल के नए भवन परिसर में वाई-फाई सुविधा शुरू की जाएगी, जिससे इंटरनेट से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान होने की उम्मीद है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार इस परियोजना को राज्य सरकार की मंजूरी मिल चुकी है और भारत संचार निगम लिमिटेड द्वारा लीज लाइन बिछाने का कार्य भी शुरू कर दिया गया है। इस पर लगभग 40 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लंबे समय से अस्पताल में इंटरनेट कनेक्टिविटी एक बड़ी समस्या बनी हुई थी, जिससे मरीजों, डॉक्टरों और कर्मचारियों को कार्य करने में कठिनाई होती थी। वाई-फाई सुविधा शुरू होने के बाद अस्पताल के प्रत्येक तल पर तेज गति का इंटरनेट उपलब्ध होगा। नई व्यवस्था लागू होने से अस्पताल की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। मरीजों की जांच रिपोर्ट देखना, उनके स्वास्थ्य संबंधी आंकड़े अद्यतन करना और अन्य डिजिटल सेवाओं का उपयोग अब बिना रुकावट संभव हो सकेगा। इससे न केवल कार्य की गति बढ़ेगी, बल्कि मरीजों को भी समय पर सेवाएं मिल सकेंगी। अस्पताल प्रशासन का लक्ष्य केवल वाई-फाई सुविधा उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम को कागजरहित बनाना है। आने वाले समय में अस्पताल के सभी विभागों को आपस में जोड़ा जाएगा, जिससे मरीजों का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जा सकेगा। मरीजों की फाइलें, जांच रिपोर्ट, दवाओं का विवरण और इलाज से जुड़ी सभी जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध होगी। इस पहल का सबसे अधिक लाभ मरीजों को मिलेगा। वर्तमान में अस्पताल में लंबी कतारें और कागजी प्रक्रिया के कारण समय की बर्बादी होती है। लेकिन कागजरहित प्रणाली लागू होने के बाद पंजीकरण से लेकर इलाज तक की प्रक्रिया तेज और सरल हो जाएगी। मरीजों को बार-बार अलग-अलग काउंटर पर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, क्योंकि उनकी पूरी जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध रहेगी। डॉक्टरों के लिए भी यह व्यवस्था राहत लेकर आएगी। अभी मरीजों की फाइल ढूंढने और पुराने रिकॉर्ड देखने में समय लगता है, लेकिन डिजिटल डेटा उपलब्ध होने से डॉक्टर तुरंत मरीज की पूरी चिकित्सा पृष्ठभूमि देख सकेंगे। इससे सही और त्वरित इलाज संभव होगा। आपातकालीन स्थितियों में भी मरीज का डेटा तुरंत उपलब्ध रहेगा, जिससे जीवन बचाने में मदद मिलेगी। डिजिटल प्रणाली लागू होने से अस्पताल की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। हर प्रक्रिया का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा, जिससे किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना कम हो जाएगी। प्रशासन के लिए भी निगरानी करना आसान हो जाएगा। किस विभाग में कितने मरीज आ रहे हैं और कितनी दवाओं का उपयोग हो रहा है, यह सब आसानी से देखा जा सकेगा। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि यह बदलाव भविष्य की स्वास्थ्य सेवाओं को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। आने वाले समय में मरीजों के लिए ऑनलाइन समय निर्धारण, डिजिटल पर्ची और मोबाइल अनुप्रयोग जैसी सुविधाएं भी शुरू की जा सकती हैं। इसके साथ ही दूरस्थ चिकित्सा सेवाओं को भी बढ़ावा देने की योजना है, जिससे दूर-दराज के मरीज भी विशेषज्ञ चिकित्सकों से सलाह ले सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना सफल होती है तो बिहार के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी इसे लागू किया जा सकता है। इससे राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का यह कदम बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ा परिवर्तन साबित हो सकता है। यदि यह योजना समय पर और प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो यह अस्पताल देश के सबसे आधुनिक सरकारी चिकित्सा संस्थानों में अपनी जगह बना सकता है।


