कोरोना वायरस से बिहार के शिक्षकों को कोई खतरा नहीं,शायद ऐसा ही मानती है नीतीश सरकार? भाजपा विधान पार्षद ने जताई नाराजगी
पटना।बिहार की नीतीश सरकार को शायद ऐसा लगता है कि कोरोना जैसे खतरनाक वायरस का शिकार बिहार के शिक्षक या शिक्षकेतर कर्मचारी नहीं हो सकते हैं।सरकार ने आज लिए अपने बड़े फैसलों में प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने का आदेश तो कर दिया।मगर सरकार के लिए फैसले के अनुसार बंद रहने के बावजूद शिक्षक तथा शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को संस्थानों में उपस्थिति देनी होगी।बिहार सरकार ने ऐसा फैसला क्यों लिया है यह तो वही जाने।मगर एक तरफ जहां सरकारी विभागों एवं अन्य सरकारी कार्यालयों में रोटेशन के आधार पर कर्मियों से काम लेने के बाद की जा रही है।वहीं दूसरी तरफ शैक्षणिक संस्थानों के बंद होने के बावजूद शिक्षकों तथा शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की उपस्थिति के बात भी इसी फैसले में कही गई है।इस मामले को लेकर भाजपा के विधान पार्षद प्रो नवल किशोर यादव ने सरकार पर तीखा निशाना साधा है। भाजपा विधान पार्षद नवल किशोर यादव ने कहा कि शायद बिहार सरकार को ऐसा लगता है कि शिक्षक अथवा शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की मौत कोरोना वायरस से नहीं हो सकती है।उन्होंने कहा की स्कूल बंद, कॉलेज बंद, मॉल बंद, सिनेमा हॉल बंद, परीक्षा स्थगित लेकिन कॉलेज और स्कूल के शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी अपने कार्यस्थल पर रहेंगे ?? क्या शिक्षा विभाग और उनके अधिकारियों ने कोरोना वायरस से बात कर लिया है कि वो शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी के शरीर के अंदर प्रवेश नही करेंगे ?? और जब बच्चे स्कूल- कॉलेज आएंगे नहीं तो शिक्षक और शिक्षकेत्तर कर्मचारी वहां जाकर करेंगे क्या ?? यहाँ तक कि बिहार सरकार ने चिड़ियाखाना और म्युज़ियम तक को बंद करने का निर्देश दिया है।हद हो गई शिक्षा विभाग के अधिकारियों के शिक्षकों एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण की।शिक्षा विभाग और उनके अधिकारियों का शिक्षकों से इतनी चिढ़ अच्छी बात नही।


