पुणे में क्लोरीन गैस रिसाव से हड़कंप, 24 लोग बीमार
- पानी शुद्धिकरण संयंत्र के बंद गोदाम से गैस लीक, देर रात मची अफरा-तफरी
- दमकल विभाग ने समय रहते स्थिति संभाली, सभी प्रभावित खतरे से बाहर
पुणे। महाराष्ट्र के पुणे शहर के कोंढवा इलाके में देर रात क्लोरीन गैस के रिसाव से हड़कंप मच गया। इस घटना में आसपास रहने वाले लोगों समेत कुल 24 लोग बीमार पड़ गए, जिनमें दो दमकल कर्मी भी शामिल हैं। सभी प्रभावितों को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। अधिकारियों के अनुसार सभी लोग फिलहाल खतरे से बाहर हैं। जानकारी के अनुसार यह घटना गंगाधाम क्षेत्र में ऐमाता मंदिर के पास स्थित एक बंद पड़े पानी शुद्धिकरण संयंत्र के गोदाम में हुई। बताया जा रहा है कि गोदाम में रखे क्लोरीन गैस के एक खाली टैंक से रात करीब एक बजे गैस का रिसाव शुरू हुआ। धीरे-धीरे गैस आसपास के क्षेत्र में फैलने लगी, जिससे स्थानीय लोगों को सांस लेने में कठिनाई होने लगी। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची। मुख्य दमकल अधिकारी देवेंद्र पोटफोडे के नेतृत्व में पांच अधिकारी और लगभग 30 दमकलकर्मी तत्काल राहत और बचाव कार्य में जुट गए। किसी भी संभावित बड़ी दुर्घटना को टालने के लिए विभाग ने चार दमकल वाहन तैनात किए, जिनमें श्वसन उपकरण से लैस विशेष वाहन भी शामिल था। दमकल अधिकारियों के अनुसार, गैस के प्रभाव से प्रभावित लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उन्हें चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराई गई। कई लोगों ने सांस लेने में दिक्कत और घबराहट की शिकायत की, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। राहत कार्य के दौरान दमकल कर्मियों ने विशेष सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करते हुए लीक हो रहे टैंक को नियंत्रित किया और रिसाव को रोकने में सफलता पाई। इस दौरान दो दमकल कर्मी भी गैस के प्रभाव में आकर बीमार हो गए, जिन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। अधिकारियों ने बताया कि सभी प्रभावित लोगों को ससून सामान्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी निगरानी की जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार सभी की हालत स्थिर है और किसी की स्थिति गंभीर नहीं है। स्थानीय लोगों ने बताया कि रात के समय अचानक तेज गंध महसूस हुई और कई लोगों को सांस लेने में परेशानी होने लगी। इससे इलाके में दहशत फैल गई और लोग घरों से बाहर निकल आए। कुछ लोगों ने तुरंत प्रशासन को सूचना दी, जिसके बाद राहत टीम मौके पर पहुंची। विशेषज्ञों का कहना है कि क्लोरीन गैस अत्यधिक तीव्र और खतरनाक होती है, जो श्वसन तंत्र पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी होती है, ताकि नुकसान को कम किया जा सके। इस घटना में समय रहते दमकल विभाग की सक्रियता के कारण बड़ा हादसा टल गया। प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि बंद पड़े संयंत्र में गैस टैंक किस स्थिति में रखा गया था और सुरक्षा मानकों का पालन क्यों नहीं किया गया। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह घटना औद्योगिक और रासायनिक पदार्थों के सुरक्षित भंडारण की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे संवेदनशील पदार्थों को सुरक्षित तरीके से रखना और नियमित जांच करना आवश्यक है, ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। पुणे के कोंढवा इलाके में हुई इस गैस रिसाव की घटना ने लोगों को भयभीत जरूर किया, लेकिन समय पर की गई कार्रवाई से एक बड़ी दुर्घटना टल गई। अब सभी की नजर प्रशासन की जांच रिपोर्ट पर है, जिससे इस घटना के कारणों का पता चल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।


