बिहार में डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे अभ्यर्थी, पटना में किया विरोध प्रदर्शन

पटना। बिहार में सरकारी नौकरियों में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने की मांग एक बार फिर से तेज हो गई है। गुरुवार को राजधानी पटना की सड़कों पर बड़ी संख्या में छात्र और युवा एकत्रित हुए और राज्य सरकार से डोमिसाइल नीति जल्द लागू करने की मांग की। इस प्रदर्शन का नेतृत्व छात्र नेता दिलीप कुमार ने किया। शांतिपूर्ण तरीके से हुए इस विरोध प्रदर्शन में युवाओं ने अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।
क्या है डोमिसाइल नीति और क्यों है इसकी मांग
डोमिसाइल नीति का सीधा संबंध स्थानीय निवास से होता है। इसके तहत किसी राज्य के स्थायी निवासियों को शासकीय नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में प्राथमिकता दी जाती है। देश के कई राज्यों जैसे झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, और तमिलनाडु में यह नीति पहले से लागू है। इससे वहां के स्थानीय युवाओं को अपने ही राज्य में सरकारी नौकरी पाने का अधिक अवसर मिल जाता है। बिहार के छात्र और युवा भी लंबे समय से इसी तरह की व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब दूसरे राज्यों में वहां के युवाओं को प्राथमिकता मिलती है, तो बिहार के युवाओं को भी यह अधिकार मिलना चाहिए। डोमिसाइल नीति लागू होने से ना केवल बेरोजगारी कम होगी बल्कि पलायन की समस्या पर भी अंकुश लगेगा।
प्रदर्शन में छात्रों की प्रमुख बातें
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि बिहार में सरकारी नौकरियों की प्रक्रिया में बाहरी अभ्यर्थी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं, जिससे स्थानीय उम्मीदवारों के लिए अवसर सीमित हो जाते हैं। अगर डोमिसाइल नीति लागू होती है तो इससे राज्य के युवाओं को शिक्षा और रोजगार में वाजिब हक मिलेगा। प्रदर्शनकारियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि बिहार जैसे पिछड़े राज्य में जहां पहले से ही रोजगार के अवसर सीमित हैं, वहां बाहरी उम्मीदवारों की हिस्सेदारी स्थानीय युवाओं के भविष्य को संकट में डाल रही है। युवाओं का कहना है कि बिहार सरकार को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
सरकार को चेतावनी, आंदोलन को राज्यव्यापी बनाने की तैयारी
छात्र नेता दिलीप कुमार ने गुरुवार को सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यह आंदोलन अभी शांतिपूर्ण है, लेकिन अगर सरकार ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो यह विरोध पूरे राज्य में फैलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए यह केवल एक नीति की मांग नहीं है, बल्कि यह उनके रोजगार और अस्तित्व से जुड़ा सवाल है। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य राज्यों की तर्ज पर बिहार सरकार को भी अपने युवाओं के भविष्य की चिंता करनी चाहिए और उन्हें रोजगार का स्थायी समाधान देना चाहिए। अगर सरकार समय पर इस पर निर्णय नहीं लेती है तो अगला चरण और अधिक व्यापक होगा।
बेरोजगारी और पलायन पर चिंता
बिहार में लगातार बढ़ती बेरोजगारी और युवाओं के बड़े पैमाने पर दूसरे राज्यों में पलायन की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। इस संदर्भ में डोमिसाइल नीति को एक समाधान के रूप में देखा जा रहा है। यदि राज्य सरकार स्थानीय युवाओं को सरकारी नौकरी में प्राथमिकता देती है तो इससे न केवल बेरोजगारी दर में कमी आएगी, बल्कि युवाओं का राज्य के प्रति विश्वास भी बढ़ेगा। पटना में हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर यह मुद्दा सरकार के सामने मजबूती से रख दिया है। अब देखना यह है कि सरकार युवाओं की इस मांग पर क्या रुख अपनाती है। फिलहाल छात्र संगठनों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जब तक डोमिसाइल नीति लागू नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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