सम्राट सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में देरी, मई के पहले सप्ताह तक इंतजार संभव
- पुराने फार्मूले पर बनेगी नई कैबिनेट, भाजपा बड़ी भूमिका में, सहयोगी दलों को भी मिलेगा प्रतिनिधित्व
- फिलहाल मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री संभाल रहे जिम्मेदारी, विभागों का बंटवारा जारी
पटना। बिहार में नई सरकार के गठन और मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण के बाद अब सबकी नजरें मंत्रिमंडल विस्तार पर टिकी हैं। हालांकि, सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली नई सरकार में मंत्रिमंडल विस्तार में अभी कुछ समय लग सकता है। माना जा रहा है कि संभावित मंत्रियों को मई के पहले सप्ताह तक इंतजार करना पड़ सकता है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार में हो रही देरी के पीछे कई कारण हैं, जिनमें आगामी पश्चिम बंगाल चुनाव भी शामिल है। माना जा रहा है कि इन चुनावों के बाद ही बिहार में नई सरकार को पूर्ण स्वरूप दिया जाएगा। तब तक मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री ही शासन की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे। नई सरकार में मंत्रियों के चयन का फार्मूला पहले जैसा ही रहने की संभावना है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सभी सहयोगी दलों की भूमिका लगभग पूर्ववत बनी रहेगी। हालांकि, इस बार एक बड़ा बदलाव यह होगा कि भारतीय जनता पार्टी सरकार में बड़े भाई की भूमिका में होगी। वहीं, जनता दल (यूनाइटेड) छोटे सहयोगी दल की भूमिका में रहेगा, लेकिन नेतृत्व और मार्गदर्शन की भूमिका नीतीश कुमार के पास बनी रहने की संभावना जताई जा रही है। सहयोगी दलों में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), राष्ट्रीय लोक मोर्चा और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) को भी प्रतिनिधित्व मिलने की उम्मीद है। इन दलों की हिस्सेदारी का फार्मूला भी पहले जैसा ही रहने की संभावना है। मंत्रिमंडल में नए चेहरों की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा और जदयू दोनों ही अपने पुराने और अनुभवी नेताओं पर भरोसा जता सकती हैं। हालांकि कुछ सीमित बदलाव संभव हैं, जिसमें कुछ नए चेहरों को अवसर मिल सकता है। इस बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रशासनिक कार्यों को सुचारू बनाए रखने के लिए विभागों का अस्थायी बंटवारा कर दिया है। मुख्यमंत्री ने अपने पास 29 विभागों की जिम्मेदारी रखी है, जो उनके व्यापक नियंत्रण को दर्शाता है। वहीं उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी को 10 विभागों का प्रभार दिया गया है, जबकि दूसरे उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव को आठ विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग द्वारा इस संबंध में अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। ध्यान देने वाली बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास रहे अधिकांश विभाग अब सम्राट चौधरी के पास आ गए हैं। इसके अलावा, गृह विभाग भी मुख्यमंत्री के पास ही रखा गया है, जो पहले उपमुख्यमंत्री के रूप में उनके पास था। इससे स्पष्ट होता है कि नई सरकार में मुख्यमंत्री की भूमिका काफी प्रभावशाली रहने वाली है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मंत्रिमंडल विस्तार के बाद ही सरकार पूरी तरह सक्रिय रूप में काम करना शुरू करेगी। फिलहाल सीमित मंत्रिमंडल के साथ प्रशासनिक कामकाज चलाया जा रहा है, लेकिन जल्द ही पूर्ण मंत्रिमंडल के गठन के बाद सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं की स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। बिहार में नई सरकार के गठन के बाद अब अगला बड़ा कदम मंत्रिमंडल विस्तार है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं। मई के पहले सप्ताह में इस प्रक्रिया के पूरा होने की संभावना है, जिसके बाद राज्य की राजनीति में नई दिशा और गति देखने को मिल सकती है।


