गुजरात और झारखंड में बीजेपी ने नियुक्त किए नए प्रदेश अध्यक्ष, जगदीश विश्वकर्मा और आदित्य साहू को मिली जिम्मेदारी
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने संगठनात्मक स्तर पर एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए गुजरात और झारखंड में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति की है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. पी. नड्डा ने गुजरात में जगदीश ईश्वर विश्वकर्मा और झारखंड में आदित्य साहू को प्रदेश इकाई की कमान सौंपी है। दोनों नेताओं की नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी अपनी रणनीति और संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में जुटी है।
गुजरात की कमान जगदीश विश्वकर्मा के हाथों में
गुजरात में भाजपा की कमान अब राज्य सरकार में राज्यमंत्री और निकोल विधानसभा से लगातार तीन बार के विधायक जगदीश ईश्वर विश्वकर्मा को दी गई है। उन्होंने 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की है और वे राज्य में भाजपा के कद्दावर नेताओं में गिने जाते हैं। विश्वकर्मा गुजरात के सबसे संपन्न विधायकों में शामिल हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल किए गए हलफनामे में उन्होंने 29 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति घोषित की थी। पेशेवर रूप से वह कपड़ा मशीनरी निर्माण, रियल एस्टेट डेवलपमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर मार्केटिंग से जुड़े रहे हैं। शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो उन्होंने मार्केटिंग में स्नातक (बीए) और प्रबंधन (एमबीए) की पढ़ाई की है। राजनीति के साथ ही उनका झुकाव पढ़ने, तैराकी, बैडमिंटन और समाज सेवा की ओर भी है। भाजपा ने गुजरात में लगातार चुनावी सफलता पाई है, ऐसे में जगदीश विश्वकर्मा की नियुक्ति को संगठनात्मक दृष्टि से अहम माना जा रहा है। उन्हें न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं को संगठित करने की जिम्मेदारी होगी, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की पकड़ और मजबूत करने की चुनौती भी होगी।
झारखंड में आदित्य साहू को मिली कमान
वहीं झारखंड में भाजपा ने राज्यसभा सांसद आदित्य साहू को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। वे राज्य भाजपा में महासचिव के रूप में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। साहू वैश्य समुदाय से आते हैं, जिसका झारखंड की राजनीति में बड़ा प्रभाव है। राज्य की 81 विधानसभा सीटों में से लगभग आधी सीटों पर वैश्य समुदाय का वोट हार-जीत का निर्धारण करता है। साहू, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और सांसद रविंद्र कुमार राय की जगह लेंगे। राय को पिछले वर्ष अक्टूबर में झारखंड विधानसभा चुनाव से पहले यह जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन भाजपा चुनावों में सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) गठबंधन से पराजित रही थी। अब साहू की नियुक्ति को भाजपा द्वारा संगठन में नई ऊर्जा भरने और 2029 के विधानसभा चुनाव के लिए मजबूत तैयारी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। राज्यसभा सदस्य होने के नाते साहू का दिल्ली की राजनीति में भी सीधा संपर्क है, जो झारखंड भाजपा को केंद्र से बेहतर तालमेल बनाने में मदद करेगा। भाजपा को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में संगठन का ढांचा मजबूत होगा और वैश्य समाज समेत अन्य वर्गों में पार्टी का आधार और पुख्ता होगा।
संगठनात्मक पुनर्गठन की रणनीति
भाजपा की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह नियुक्तियां पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से की गई हैं। गुजरात और झारखंड दोनों राज्यों में पार्टी इकाइयों की भूमिका आने वाले चुनावों में अहम रहेगी। गुजरात में भाजपा पहले से ही मजबूत स्थिति में है, जबकि झारखंड में उसे सत्ता हासिल करने के लिए संगठनात्मक स्तर पर बड़ा काम करना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा इन नियुक्तियों के माध्यम से एक ओर जहां सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर युवा और ऊर्जावान नेतृत्व के जरिए संगठन में नई ताकत भरना चाहती है। गुजरात में विश्वकर्मा समुदाय का प्रतिनिधित्व और झारखंड में वैश्य समाज की भागीदारी भाजपा के वोट बैंक को और मजबूत कर सकती है। गुजरात और झारखंड में नए प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति भाजपा के लिए केवल एक औपचारिक संगठनात्मक बदलाव नहीं है, बल्कि यह रणनीतिक दृष्टिकोण से उठाया गया कदम है। आने वाले वर्षों में इन दोनों राज्यों की राजनीतिक दिशा काफी हद तक जगदीश विश्वकर्मा और आदित्य साहू के नेतृत्व पर निर्भर करेगी। भाजपा ने अपने अनुभवी और प्रभावशाली नेताओं पर भरोसा जताते हुए यह संदेश दिया है कि वह आने वाले चुनावों में किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरतना चाहती।


