बिहार की डायल-112 सेवा होगी और अत्याधुनिक, हर गतिविधि पर रहेगी मुख्यालय की सीधी नजर
- वाहनों में लगाए जाएंगे डैश कैमरे और पुलिसकर्मियों की वर्दी पर शरीर पर धारण किए जाने वाले कैमरे, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की तैयारी
- एआई से होगा शिकायतों का विश्लेषण, अपराध प्रभावित क्षेत्रों की पहचान कर बनाई जाएगी अग्रिम पुलिसिंग की रणनीति
पटना। बिहार में आपातकालीन पुलिस सेवा डायल-112 को पहले से अधिक आधुनिक, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में पुलिस मुख्यालय ने व्यापक योजना तैयार की है। सेवा से जुड़ी लगातार मिल रही शिकायतों के बाद अब अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली की निगरानी की जाएगी। प्रस्ताव के अनुसार डायल-112 के सभी वाहनों में डैश कैमरे लगाए जाएंगे, जबकि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की वर्दी पर शरीर पर धारण किए जाने वाले कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों की सहायता से पुलिस मुख्यालय से ही वाहनों की गतिविधियों, पुलिसकर्मियों की कार्यशैली और घटनास्थल पर की गई कार्रवाई की सीधी निगरानी की जा सकेगी। इससे सेवा की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ने की उम्मीद है।पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव पुलिस महानिदेशक विनय कुमार को भेजा है। प्रस्ताव में कहा गया है कि डायल-112 की गाड़ियों में तैनात कुछ पुलिसकर्मियों के ड्यूटी के दौरान मोबाइल फोन में व्यस्त रहने तथा शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने की शिकायतें लगातार प्राप्त हो रही थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था लागू करने की योजना बनाई गई है, ताकि प्रत्येक कार्रवाई का अभिलेख सुरक्षित रहे और किसी भी शिकायत की निष्पक्ष जांच की जा सके। प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद प्रत्येक वाहन की वास्तविक समय की स्थिति, घटनास्थल तक पहुंचने में लगा समय और वहां की गई कार्रवाई का पूरा विवरण मुख्यालय में उपलब्ध रहेगा। यदि किसी घटना में पुलिस के पहुंचने में विलंब होता है या ड्यूटी के दौरान किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है, तो उसका स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध होगा। इससे अधिकारियों को त्वरित समीक्षा करने और आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई करने में भी सुविधा मिलेगी।पुलिस विभाग अपराध नियंत्रण के लिए भी आधुनिक तकनीक का व्यापक उपयोग करने जा रहा है। डायल-112 पर प्राप्त होने वाली शिकायतों का विश्लेषण अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से किया जाएगा। इस प्रणाली के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि राज्य के किस थाना क्षेत्र में किस प्रकार के अपराध सबसे अधिक हो रहे हैं। अपराध के स्वरूप और उसकी आवृत्ति के आधार पर संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की जाएगी। इसके बाद उन इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती, नियमित गश्त और अग्रिम पुलिसिंग की रणनीति तैयार की जाएगी, जिससे अपराध होने से पहले ही प्रभावी रोकथाम की जा सके। नई योजना के तहत डायल-112 सेवा का दायरा भी पहले की तुलना में काफी व्यापक बनाया जाएगा। इसे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, रेलवे, परिवहन विभाग, निजी एंबुलेंस सेवाओं, आघात चिकित्सा केंद्रों तथा स्मार्ट सिटी के एकीकृत नियंत्रण एवं कमान केंद्र से जोड़ा जाएगा। इसके अतिरिक्त स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत लगाए गए आपातकालीन सहायता कॉल बॉक्स भी इसी नेटवर्क से संबद्ध किए जाएंगे। इससे सड़क दुर्घटना, आगजनी, अपराध या अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और राहत एवं बचाव कार्य पहले की अपेक्षा अधिक तेजी से संचालित किए जा सकेंगे। पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में डायल-112 सेवा के माध्यम से प्रतिदिन औसतन लगभग 7,500 नागरिकों को आपातकालीन सहायता प्रदान की जा रही है। सेवा का औसत प्रतिक्रिया समय लगभग 10 मिनट है, जो आपातकालीन सहायता प्रणाली की प्रभावशीलता को दर्शाता है। पिछले चार वर्षों के दौरान इस सेवा के माध्यम से 60 लाख से अधिक लोगों को पुलिस सहायता, अग्निशमन सेवा, एंबुलेंस सुविधा, राजमार्ग गश्ती सेवा तथा महिला एवं बाल सहायता जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं।आंकड़ों से यह भी स्पष्ट हुआ है कि डायल-112 पर सबसे अधिक शिकायतें स्थानीय विवाद और मारपीट की घटनाओं से संबंधित प्राप्त हुई हैं। इसके अलावा घरेलू हिंसा, सड़क दुर्घटनाएं, आग लगने की घटनाएं तथा अन्य आपातकालीन मामलों में भी इस सेवा ने त्वरित सहायता पहुंचाकर लोगों का विश्वास अर्जित किया है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक तकनीक के समावेश से इस सेवा की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता में और अधिक वृद्धि होगी।नई व्यवस्था लागू होने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पहले से अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनने की संभावना है। प्रत्येक कार्रवाई का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से शिकायतों का निष्पक्ष निस्तारण संभव होगा तथा पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी भी बढ़ेगी। वहीं कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित विश्लेषण से अपराध नियंत्रण की रणनीति अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बन सकेगी। पुलिस मुख्यालय का मानना है कि यह पहल बिहार में आपातकालीन पुलिस सेवा को नई तकनीकी क्षमता प्रदान करेगी और नागरिकों को पहले से अधिक तेज, सुरक्षित तथा भरोसेमंद सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।


