महिला सुरक्षा को लेकर बिहार सरकार का बड़ा कदम, ‘पुलिस दीदी’ अभियान होगा हाईटेक

  • 4700 स्कूटी और मोटरसाइकिल की खरीद को मंजूरी, स्कूल-कॉलेज के पास बढ़ेगी निगरानी
  • उत्तर प्रदेश मॉडल से प्रेरित योजना, छेड़खानी और उत्पीड़न पर लगाम लगाने की तैयारी

पटना। बिहार में महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। राज्य में ‘पुलिस दीदी’ यानी अभया ब्रिगेड को अधिक सक्रिय और आधुनिक बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। इस योजना के तहत पुलिस बल को तेज और प्रभावी बनाने के लिए बड़े पैमाने पर वाहन उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार ने इस पहल के तहत कुल 4700 स्कूटी और मोटरसाइकिल खरीदने को मंजूरी दी है। इनमें से 1500 स्कूटी विशेष रूप से महिला पुलिसकर्मियों के लिए होंगी, जबकि 3200 मोटरसाइकिल अन्य पुलिस बल के उपयोग के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी। इन वाहनों को राज्य के विभिन्न जिलों में तैनात किया जाएगा, ताकि पुलिस की पहुंच तेजी से बढ़ सके और संवेदनशील क्षेत्रों में तुरंत कार्रवाई की जा सके। इस योजना पर राज्य सरकार लगभग 66.75 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य महिला पुलिसकर्मियों की गतिशीलता बढ़ाना है, ताकि वे संकरी गलियों, भीड़भाड़ वाले इलाकों और उन स्थानों पर आसानी से पहुंच सकें, जहां अक्सर छेड़खानी या उत्पीड़न की घटनाएं सामने आती हैं। यह व्यवस्था खासकर छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। नई व्यवस्था के तहत ‘पुलिस दीदी’ नियमित रूप से गश्त करेंगी। उनकी तैनाती विशेष रूप से उन स्थानों पर की जाएगी, जहां छात्राओं की आवाजाही अधिक रहती है, जैसे कि गर्ल्स स्कूल, कॉलेज और कोचिंग संस्थान। यहां महिला पुलिसकर्मी वर्दी और सादे कपड़ों दोनों में मौजूद रहेंगी, ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत नजर रखी जा सके। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि छुट्टी के समय छात्राओं की सुरक्षा को लेकर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा में कहा कि कई बार स्कूल और कॉलेज से निकलने के समय छात्राओं को असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए ‘पिंक स्कूटी’ के साथ पुलिस दीदी की तैनाती सुनिश्चित की जा रही है, ताकि मौके पर ही सुरक्षा और सहायता उपलब्ध कराई जा सके। इस योजना के तहत ‘गुलाबी गश्त’ की व्यवस्था भी लागू की जाएगी, जिसमें महिला पुलिसकर्मी नियमित रूप से निगरानी करेंगी। इसका उद्देश्य सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के प्रति होने वाले अपराधों को रोकना और अपराधियों में भय पैदा करना है। साथ ही, जरूरत पड़ने पर छात्राओं को तुरंत सहायता उपलब्ध कराना भी इस पहल का हिस्सा है। सरकार की यह पहल उत्तर प्रदेश में लागू मॉडल से प्रेरित बताई जा रही है। वहां योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 2017 में ‘एंटी रोमियो स्क्वाड’ की शुरुआत की गई थी, जिसका उद्देश्य महिलाओं के साथ होने वाली छेड़खानी की घटनाओं पर नियंत्रण करना था। बिहार सरकार ने उसी तर्ज पर अपने राज्य में ‘पुलिस दीदी’ अभियान को मजबूत करने का निर्णय लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम महिला सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, खासकर शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, जहां छात्राओं की संख्या अधिक है और सुरक्षा को लेकर चिंताएं बनी रहती हैं। हालांकि, योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे जमीन पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है। बिहार सरकार की यह पहल महिला सुरक्षा को लेकर एक सकारात्मक प्रयास के रूप में देखी जा रही है। यदि इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो यह न केवल अपराधों पर नियंत्रण करने में मददगार साबित होगी, बल्कि महिलाओं और छात्राओं में सुरक्षा का विश्वास भी बढ़ाएगी। आने वाले समय में इस योजना के प्रभाव और परिणामों पर सभी की नजर बनी रहेगी।