तेजप्रताप यादव के आवास से नकदी और कीमती सामान चोरी का आरोप, निजी सहायक के खिलाफ दर्ज हुई प्राथमिकी
- 20 लाख रुपये की पार्टी निधि, आभूषण और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण गायब होने का दावा
- धमकी, आरोप-प्रत्यारोप और न्यायालयी कार्रवाई के बीच राजनीतिक मामला बना चर्चा का विषय
पटना। बिहार की राजनीति में उस समय नया विवाद खड़ा हो गया जब पूर्व मंत्री और जन जन दल (जेजेडी) के अध्यक्ष तेजप्रताप यादव ने अपने निजी सहायक मोतीलाल राय पर चोरी का गंभीर आरोप लगाते हुए सचिवालय थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई। शिकायत में दावा किया गया है कि उनके सरकारी आवास से लाखों रुपये की नकदी, सोने के आभूषण तथा कई महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण चोरी हो गए हैं। इस घटना के बाद राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर हलचल तेज हो गई है। तेजप्रताप यादव द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, 22 जून को उनके आवास स्थित अलमारी से लगभग 20 लाख रुपये नकद गायब पाए गए। शिकायत में कहा गया है कि यह राशि पार्टी निधि से संबंधित थी। इसके अलावा दो तोला सोने की चेन, एक सोने की अंगूठी, चार ड्रोन, दो हार्ड डिस्क, एक आईपैड, एक मैकबुक लैपटॉप, एक लेनोवो लैपटॉप तथा चार महंगे मोबाइल फोन भी चोरी हो गए।
निजी सहायक पर सीधा आरोप
प्राथमिकी में तेजप्रताप यादव ने अपने निजी सहायक मोतीलाल राय को चोरी की घटना के लिए जिम्मेदार बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना वाली रात उनके चालक अनिल यादव और सहयोगी विशाल ने मोतीलाल राय को एक बैग के साथ आवास की चहारदीवारी फांदकर निकलते हुए देखा था। शिकायत में दोनों व्यक्तियों को प्रत्यक्षदर्शी गवाह बताया गया है। तेजप्रताप यादव का कहना है कि उपलब्ध परिस्थितियां और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान स्पष्ट रूप से इस बात की ओर संकेत करते हैं कि चोरी की घटना में मोतीलाल राय की भूमिका हो सकती है।
पुलिस ने शुरू की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए सचिवालय थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की सत्यता की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच एजेंसियां कथित रूप से गायब सामान, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
आकाश यादव के आरोपों से जुड़ा नया विवाद
इसी बीच यह मामला एक अन्य विवाद से भी जुड़ गया है। छात्र नेता और अनुष्का यादव के भाई आकाश यादव ने तेजप्रताप यादव, उनके सहयोगी मोतीलाल यादव तथा कुछ अन्य लोगों पर गंभीर आरोप लगा हैं। आकाश यादव का दावा है कि जून महीने में उनके पटना स्थित आवास पर जबरन प्रवेश करने और धमकी देने का प्रयास किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में उन्हें फोन पर भी धमकी दी गई और प्रभावशाली राजनीतिक पहचान का हवाला देकर दबाव बनाने की कोशिश की गई।
न्यायालय में पहुंचा मामला
आकाश यादव ने बताया कि उन्होंने पहले पुलिस को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं होने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद मामले में न्यायालयी प्रक्रिया शुरू हुई आकाश यादव ने दावा किया है कि उनके पास फोन पर मिली कथित धमकियों की रिकॉर्डिंग मौजूद है, जिसे उन्होंने साक्ष्य के रूप में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया है। अब इस मामले में आगे की कार्रवाई न्यायालय और जांच एजेंसियों की प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
तेजप्रताप ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर तेजप्रताप यादव ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर राजनीतिक और व्यक्तिगत कारणों से उनके खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। तेजप्रताप यादव का कहना है कि वे कानूनी प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगे और सत्य सामने आने का इंतजार करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं और उनका उद्देश्य केवल उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी चर्चा
घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। एक ओर जहां चोरी और आर्थिक अनियमितता के आरोपों की जांच की जा रही है, वहीं दूसरी ओर धमकी और दबाव बनाने से जुड़े आरोपों ने भी मामले को संवेदनशील बना दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मामला केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं। विभिन्न पक्षों द्वारा लगाए जा रहे आरोप और प्रत्यारोप आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकते हैं।
जांच के निष्कर्ष का इंतजार
फिलहाल पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियां दोनों मामलों में उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों की जांच कर रही हैं। चोरी, धमकी और कथित दबाव बनाने से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। राजनीतिक और सामाजिक हलकों की निगाहें अब जांच एजेंसियों और न्यायालय की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। उम्मीद की जा रही है कि निष्पक्ष जांच के बाद पूरे घटनाक्रम की वास्तविकता सामने आएगी और संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।


