February 17, 2026

वेबिनार : भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए साइंटिफिक टेंपरामेंट को बढ़ावा देने की आवश्यकता

आईआईएसएफ: विज्ञान एवं आत्मनिर्भर भारत विषय पर वेबिनार का आयोजन
भारत की 52 फीसदी आबादी 25 साल से कम उम्र की, इसे सही दिशा में आगे बढ़ाने की आवश्यकता


पटना। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के पटना स्थित प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (पीआईबी) तथा रीजनल आउटरीच ब्यूरो (आरओबी) के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को आईआईएसएफ: विज्ञान एवं आत्मनिर्भर भारत विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार की अध्यक्षता करते हुए पीआईबी एवं आरओबी पटना के अपर महानिदेशक एसके मालवीय ने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए साइंटिफिक टेंपरामेंट को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि देश की रूढ़िवादिता एवं अंधविश्वास इस दिशा में एक अवरोध है। उन्होंने कहा कि विज्ञान के सहयोग से देश को आत्मनिर्भर बनाने की परिकल्पना को मूर्त रूप देने के उद्देश्य से ही प्रधानमंत्री ने वर्ष 2015 से भारतीय अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (आईआईएसएफ) की शुरूआत की है।
अंतत: टूल्स ही आत्मनिर्भरता की ओर ले जाता
वहीं पीआईबी के निदेशक दिनेश कुमार ने कहा कि साइंस हमें टेक्नॉलॉजी की ओर ले जाता है और टेक्नोलॉजी टूल्स की ओर और अंतत: टूल्स ही हमें आत्मनिर्भरता की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि आज हम विदेशी तकनीक के टूल यूजर बनते जा रहे हैं। हमारे रग-रग में विज्ञान का प्रवेश हो चुका है। उन्होंने कहा कि आज प्रौद्योगिकी विशिष्टिकरण के दौर में आत्मनिर्भरता एक द्वंद्व का सामना कर रही है।
भारत को आत्मनिर्भर बनाना एक बहुत बड़ा कार्य
वेबिनार में अतिथि वक्ता के रूप में शामिल बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार घोष ने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाना एक बहुत बड़ा कार्य है और इस कार्य में थोड़ा वक्त लग सकता है। हालांकि उन्होंने कहा कि भारत में संभावनाएं असीम हैं। भारत की 52 फीसदी आबादी 25 साल से कम उम्र की है। यह देश के लिए एक संपत्ति के रूप में है। हमें इसे सही दिशा में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समय के साथ जिस तरह देश अनाज उत्पादन के मामले में हरित क्रांति की वजह से आयातक देश से निर्यातक निर्यातक देश में तब्दील हो गया है, उसी प्रकार कई क्षेत्रों में हम लोग आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर हैं। उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि देश के आईआईटी जैसे उच्च संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं एवं अच्छे वैज्ञानिक विदेश चले जाते हैं। वे वहां विज्ञान की नई-नई तकनीकों का विकास एवं सॉफ्टवेयर विकसित करने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बहुत सारे रिसर्च समाज तक नहीं पहुंच पाते हैं। वह केवल रिसर्च दस्तावेज के रूप में ही सिमट कर रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि एक नेशनल पोर्टल बनाए जाने की आवश्यकता है, जिस पर देश के कोने-कोने से रिसर्चर अपने फाइंडिंग्स को प्रस्तुत करें। उन्होंने कहा कि हमारे देश में जरूरी क्षमता, संस्थान, मानव शक्ति तथा वैज्ञानिक अभिरुचि मौजूद है। हमें सिर्फ सही पर्यावरण बनाने की जरूरत है।

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