बिहार के 11 जिलों में 28 सितम्बर से डीईसी और अल्बेन्डाजोल दवा के साथ चलेगा फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम

पटना (संतोष कुमार)। फाइलेरिया रोग के उन्मूलन हेतु बिहार में कोविड-19 के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखते हुए फाइलेरिया या हाथीपांव रोग से बचाने के लिए बिहार में 28 सितम्बर से शुरू किये जा रहे फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के संबंध में मीडिया की सक्रिय एवं महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा करने हेतु राज्य स्वास्थ्य समिति एवं ग्लोबल हेल्थ स्ट्रेटजीज द्वारा अन्य सहयोगी संस्थाओं यथा विश्व स्वास्थ्य संगठन, केयर, प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल और सीफार के साथ समन्वय स्थापित करते हुए मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आंचलिक कार्यालय के क्षेत्रीय निदेशक ने भी भाग लिया।
मीडिया कार्यशाला के आयोजन के अवसर पर अपर निदेशक सह राज्य कार्यक्रम अधिकारी फाइलेरिया, बिहार डॉ. बिपिन सिन्हा ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार सरकार ने राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य के 11 जिलों में 28 सितम्बर से कोविड-19 के मानकों को ध्यान में रखते हुए एमडीए अभियान प्रारंभ करने का निर्णय लिया है, जो 14 दिनों तक चलेगी। इन 11 जिलों (भोजपुर, दरभंगा, किशनगंज, मधुबनी, नालंदा, नवादा, पूर्णिया, लखीसराय, रोहतास, समस्तीपुर एवं वैशाली) में दो फाइलेरिया रोधी दवाओं, डीईसी और अल्बेन्डाजोल के साथ एमडीए अभियान चलाया जायेगा। डॉ. सिन्हा ने बताया कि इस अभियान में फाइलेरिया से मुक्ति के लिए 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और अति गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर सभी लोगों को उम्र के अनुसार डाइथेलकाबार्मोजाइन साइट्रेट (डीईसी) और अलबेंडाजोल की निर्धारित खुराक प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा घर-घर जाकर, अपने सामने मुफ़्त दवा खिलाई जाएगी।
वहीं विश्व स्वास्थ्य संगठन के राज्य एनटीडी समन्वयक डॉ. राजेश पांडेय ने बताया कि फाइलेरिया या हाथीपांव रोग देश के 16 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी समस्या है। यह रोग मच्छर के काटने से फैलता है। हालांकि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा दी गयी दवाएं खाने से इस रोग से आसानी से बचा जा सकता है। डॉ. पांडेय ने बताया कि राज्य में फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम में एल्बेंडाजोल भी खिलाई जाती है जो बच्चों में होने वाली कृमि रोग का उपचार करता है जो सीधे तौर पर बच्चों के शारीरिक और बौद्धिक विकास में सहायक होता है।
केयर इंडिया के विकास सिन्हा ने बताया कि अगर जागरुकता का स्तर इस तरह बढ़ जाये कि लाभार्थी स्वयं फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की निगरानी करना शुरू कर दें तो फाइलेरिया के संपूर्ण उन्मूलन में सफलता मिलेगी। वहीं प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल के ध्रुव सिंह ने बताया कि एमडीए अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए ग्राम स्तर पर ग्राम प्रधानों के सहयोग से सोशल मोबिलाइजेशन से संबंधित गतिविधियां अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसके लिए पंचायत स्तर की कार्यप्रणाली को और अधिक मजबूत होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की तिथि के बारे में समुदाय में जागरूकता फैलाने के लिए आशा और आंगनवाडी के माध्यम से घर-घर जाकर, साथ ही स्थानीय स्कूलों के बच्चों के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जा सकता है। सीफार के रंजीत ने कहा कि इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए मीडिया की भूमिका बहुत सशक्त है क्योंकि समुदाय में प्रचार-प्रसार के माध्यम से जागरूकता अत्यंत शीघ्रता से फैलती है। उन्होंने कहा कि उपरोक्त 11 जिलों में 26 सितम्बर से जिला स्तरीय मीडिया बैठकों का आयोजन किया जायेगा।

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