बिहार का पहला ओडीएफ घोषित जिला, जहां आज भी हजारों गरीबों के घर में शौचालय नहीं
सीतामढ़ी (एहसान दानिश)। पूरे बिहार में सबसे पहले ओडीएफ घोषित होने वाला सीतामढ़ी जिला की सच्ची तस्वीर यहां के नौकरशाह की हकीकत बयां करने के लिये काफी है। दो साल पहले सीतामढ़ी में तूफानी अंदाज में शौचालय बनाने का काम शुरू हुआ था। तत्कालीन डीएम ने कड़ी मेहनत करके घर-घर शौचालय बनवाने का दावा किया। भारत सरकार ने सीतामढ़ी को ओडीएफ भी घोषित किया लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही हकीकत बयां कर रही है। जिला में आज भी हजारों गरीब ऐसे हैं जिनके घरों में शौचालय बना ही नहीं, बना भी तो कागज पर। वहीं हजारों गरीब ऐसे भी हैं जिन्होंने कर्ज लेकर अपना शौचालय तो बनवा लिया लेकिन नौकरशाह की गलत नीतियों की वजह से उन्हें 12000 रुपया, जो सरकार के द्वारा मिलना था, वह मयस्सर नहीं हो पाया। नतीजा यह है कि उनके ऊपर साहूकारों का डंडा चल रहा है।
यह तस्वीर रुन्नी सैदपुर प्रखंड की है, जहां तकरीबन 30,000 गरीबों को शौचालय की राशि नहीं मिल पाई है। स्थानीय जिला परिषद सदस्य इन्द्राणी राय एवं उनके प्रतिनिधि लालबाबू राय रुन्नी सैदपुर प्रखंड के बीडीओ, सीतामढ़ी के डीडीसी के साथ-साथ डीएम का दरवाजा भी खटखटा चुके हैं लेकिन इन हजारों गरीबों को शौचालय की राशि दिला पाने में अब तक असमर्थ साबित हुए हैं। अब उन्होंने कोर्ट जाने का मन बना लिया है।


