बिग ब्रेकिंग-विवादित जिला कृषि अधिकारी को नीतीश सरकार ने दंडित करने के बजाय किया पुरस्कृत,मिल गयी उपनिदेशक में प्रोन्नति,विपक्ष हमलावर

पटना (बन बिहारी)।अपने पद का रौब दिखाकर बिहार पुलिस के होमगार्ड से पास मांगने पर उठक-बैठक कराने वाले विवादित जिला कृषि पदाधिकारी मनोज कुमार को नीतीश सरकार ने दंडित करने के जगह पुरस्कृत कर दिया।कल जारी विभागीय अधिसूचना के अनुसार सरकार ने मनोज कुमार को जिला कृषि पदाधिकारी से तबादला कर पटना में कृषि विभाग का उपनिदेशक बना दिया।इस मामले की जानकारी प्रकाश में आते ही राज्य की राजनीतिक तापमान अचानक बढ़ गई है। मुख्य विपक्षी दलों ने इसे मुद्दा बनाकर सरकार को घेर लिया है।उल्लेखनीय है कि तीन दिन पूर्व बिहार पुलिस के एडीजी ने उक्त कृषि पदाधिकारी पर एफआईआर होने की बात कही थी।एफआईआर होने के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि जल्द ही कृषि पदाधिकारी मनोज कुमार को विभागीय कार्रवाई के तहत निलंबित करने का फरमान सुनाया जाएगा।मगर राज्य सरकार के द्वारा लिया गया तबादला संबंधी अधिसूचना यह साबित करता है कि सरकार फिलहाल अपने चहेते मातहत पर कार्रवाई करने से तो रही।ज्ञातव्य हो कि अररिया में पदस्थापित जिला कृषि पदाधिकारी ने राष्ट्रव्यापी लॉक डाउन के दौरान पास मांगने पर बिहार पुलिस के एक होमगार्ड को उठक बैठक करने पर मजबूर किया था।जबकि कृषि पदाधिकारी को ऐसा करने का कोई भी अधिकार नहीं था।इस मामले पर वहां उपस्थित एक सब इंस्पेक्टर पर गाज गिरी तथा उन्हें सस्पेंड कर दिया गया।मगर कृषि पदाधिकारी पर एफआईआर होने के बाद भी अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई है।पहले विभाग के द्वारा खबर के संज्ञान में आने के उपरांत इन्हें शो कॉज नोटिस जारी किया गया। अलबत्ता अब तो राजधानी में पदस्थापित कर के उपनिदेशक बना दिया गया। इस मामले को लेकर विपक्ष राज्य सरकार पर पूरी तरह से हमलावर है।विदित हो कि बिहार पुलिस के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे ने भी फोन के द्वारा उक्त होमगार्ड से बात की थी तथा उसे आश्वासन दिया था कि उसे पूरी तरह से न्याय मिलेगा।मगर किसी विभाग के द्वारा कल जारी अधिसूचना ने उक्त होमगार्ड के न्याय के आस पर पानी फेर दिया।बहरहाल इस मामले को लेकर अब राजनीति तेज होनी है।विपक्ष अभी से हमलावर है।अब सरकार किस प्रकार इस मामले से नहीं पड़ती है,यह गौरतलब रहेगा।

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