बांकीपुर उपचुनाव के बाद राजद में आत्ममंथन तेज, भाई वीरेंद्र बोले- हमसे भूल हुई, हमारे वोटर्स ने पीके को दिया वोट

  • तेजस्वी के आसपास की टीम की हो समीक्षा; संगठन और नेतृत्व में बदलाव की उठी मांग, जनता के बीच मजबूत पकड़ वाले नेताओं को आगे लाने पर दिया जोर
  • जनादेश को भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के खिलाफ बताया, नीतीश कुमार पर भी लगाए गंभीर राजनीतिक आरोप

पटना। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के परिणाम आने के बाद राष्ट्रीय जनता दल में आत्ममंथन का दौर तेज हो गया है। चुनावी नतीजों के बाद पार्टी के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र ने संगठन, नेतृत्व और चुनावी रणनीति को लेकर कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। उन्होंने कहा कि उपचुनाव के परिणाम ने पार्टी के सामने गंभीर सवाल खड़े किए हैं और अब समय आ गया है कि संगठनात्मक ढांचे तथा नेतृत्व के आसपास काम कर रही टीम की व्यापक समीक्षा की जाए। उनके अनुसार यदि समय रहते आवश्यक सुधार नहीं किए गए तो भविष्य में पार्टी को और बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।मीडिया से बातचीत के दौरान भाई वीरेंद्र ने कहा कि पार्टी अध्यक्ष तेजस्वी यादव के आसपास मौजूद कुछ लोगों की भूमिका पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि जिन लोगों पर नेतृत्व ने विश्वास किया, उनमें से कुछ उस विश्वास पर खरे नहीं उतर सके। उन्होंने दावा किया कि जनता के बीच ऐसे लोगों को लेकर असंतोष है और कई स्थानों पर उनके खिलाफ नाराजगी भी देखने को मिली। उनका मानना है कि नेतृत्व के आसपास ऐसे लोगों को स्थान मिलना चाहिए, जिनकी जनता के बीच स्वीकार्यता हो और जो संगठन को मजबूत बनाने की क्षमता रखते हों।उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल की सबसे बड़ी ताकत उसका संगठन और कार्यकर्ता होते हैं। यदि संगठन कमजोर होता है या जनता से उसका संवाद कम हो जाता है तो चुनावी परिणाम भी प्रभावित होते हैं। भाई वीरेंद्र के अनुसार राजद को एक बार फिर गांव-गांव और शहर-शहर जाकर जनता से सीधा संवाद स्थापित करना होगा। उन्होंने कहा कि पार्टी को अपनी कमियों को स्वीकार करते हुए उन्हें दूर करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए। केवल चुनावी रणनीति बनाने से सफलता नहीं मिलेगी, बल्कि जनता के बीच लगातार सक्रिय रहना भी आवश्यक है। वरिष्ठ विधायक ने स्वीकार किया कि बांकीपुर उपचुनाव में पार्टी से कुछ महत्वपूर्ण चूक हुई है, जिसका असर परिणाम पर स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि चुनावी हार से सबक लेकर संगठन को नई दिशा देने की जरूरत है। उनके अनुसार पार्टी को उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को आगे लाना चाहिए, जिनकी जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ हो और जो जनता की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझते हों। उन्होंने कहा कि आत्ममंथन केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं होना चाहिए, बल्कि इसके आधार पर संगठनात्मक बदलाव भी किए जाने चाहिए। भाई वीरेंद्र ने बांकीपुर उपचुनाव के जनादेश को भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के विरुद्ध जनभावना का परिणाम बताया। उनका दावा था कि बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं ने भी जनसुराज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर का समर्थन किया, जो सामान्यतः राजद के समर्थक माने जाते हैं। उनके अनुसार इन मतदाताओं का उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी को हराना था और उन्हें लगा कि मुकाबले में सबसे मजबूत चुनौती जनसुराज के उम्मीदवार की ओर से है। इसी कारण मतों का विभाजन हुआ और चुनाव परिणाम प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए पार्टी को चुनावी रणनीति और संगठनात्मक समन्वय दोनों पर समान रूप से ध्यान देना होगा। साथ ही जनता की अपेक्षाओं को समझते हुए संगठन को अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाना होगा। उनका मानना है कि यदि पार्टी समय रहते अपनी कमियों को दूर कर लेती है तो आगामी चुनावों में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है। इस दौरान जनता दल (यूनाइटेड) के नेताओं द्वारा दिए गए उस बयान पर भी भाई वीरेंद्र ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया था कि यदि नीतीश कुमार सक्रिय रहते तो बांकीपुर में भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना नहीं करना पड़ता। इस पर उन्होंने स्पष्ट असहमति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बिहार में भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिक विस्तार में सबसे बड़ी भूमिका स्वयं नीतीश कुमार की रही है। उनका आरोप था कि वर्षों तक दोनों दलों के साथ रहने से भारतीय जनता पार्टी को राज्य में मजबूत आधार मिला। भाई वीरेंद्र ने यह भी आरोप लगाया कि बिहार में भ्रष्टाचार की घटनाओं में वृद्धि नीतीश कुमार के शासनकाल में हुई है। हालांकि इन आरोपों पर संबंधित पक्ष की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर उपचुनाव के बाद राष्ट्रीय जनता दल के भीतर उठ रही आत्ममंथन की मांग आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब यह देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इन सुझावों को किस प्रकार स्वीकार करता है और संगठन को मजबूत बनाने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

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