कहानी मोस्ट डेंजरस डॉन बिंदु सिंह की..कभी फौज में सिपाही रहे..तो कभी बिहार केसरी रहे..तो कभी प्रदेश के सबसे बड़े एवं खतरनाक अंडरवर्ल्ड डॉन..
पटना।कभी फौज में सिपाही रहे..तो कभी बिहार केसरी रहे..तो कभी प्रदेश के सबसे बड़े एवं खतरनाक अंडरवर्ल्ड डॉन रहे बिंदु सिंह की आज के ही दिन 3 सितंबर 2022 को बीमारी के वजह से पीएमसीएच में इलाज के दौरान मौत हो गई थी. बिंदु सिंह ने अपने जीवन के 25 वर्षों से अधिक की अवधि जेल में बिताया.जेल में रहते हुए ही बिंदु सिंह पर बिहार तथा झारखंड में 100 से अधिक मुकदमे दर्ज हुए. जेल से लगातार अपने गिरोह तथा नेटवर्क का संचालन करते रहने वाले बिंदु सिंह की आतंक की कथा बेहद लंबी है.लेकिन बिंदु सिंह को चाहने वाले तथा उनके परिजन-शुभचिंतकों के नजर में बिंदु सिंह सदैव बिहार केसरी ही रहे.

कुख्यात अपराधी और सरगना बिंदु सिंह बिहार और झारखंड के अपराध जगत में एक समय आतंक का पर्याय था। वह मूल रूप से जहानाबाद जिले का रहने वाला था।
मुख्य विवरणआपराधिक इतिहास: बिंदु सिंह पर हत्या, अपहरण, रंगदारी और गोलीबारी के 100 से अधिक संगीन मामले दर्ज थे। उसका आतंक करीब दो दशकों से अधिक समय तक बिहार और झारखंड में फैला रहा।
जेेल से संचालन: वह पिछले करीब 18 वर्षों से अधिक समय से पटना की बेउर जेल में बंद था, लेकिन जेल के अंदर से ही अपने गुर्गों के माध्यम से रंगदारी वसूलने और वारदातों को अंजाम देने का सिंडिकेट चलाता था।
गिरफ्तारी: उसे आखिरी बार वर्ष 2004 में पटना के कदमकुआं इलाके में एक डॉक्टर की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद से वह लगातार सलाखों के पीछे था।
निधन: कैंसर और हृदय संबंधी कई गंभीर बीमारियों से जूझने के कारण सितंबर 2022 में पटना के पीएमसीएच (PMCH) में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।करीब 20 से ज्यादा वर्षों तक बिंदु सिंह का तांडव बिहार से लेकर झारखंड तक देखने को मिला। बाद में पुलिस ने कुख्यात अपराधी को पकड़ने में कामयाबी हासिल की। बिंदु सिंह बीते 18 साल से पटना के बेऊर जेल में बंद था। आरोप है कि जेल में रहते हुए भी वो गुर्गों के जरिए वारदातों को अंजाम दिलाता था।कुख्यात अपराधी रहे बिंदु सिंह पर हत्या, अपहरण, रंगदारी, गोलीबारी के करीब 100 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। जेल में रहते हुए भी उस पर कई वारदातों में शामिल होने के आरोप लगे हैं।बिंदु सिंह की आपराधिक घटनाओं के चलते एक समय वो बिहार-झारखंड में आतंक का पर्याय बन गया था। अपहरण, रंगदारी के साथ-साथ हत्या, गोलीबारी के उस पर कई मामले दर्ज थे। बिंदु सिंह कितना खतरनाक था इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रंगदारी की डिमांड पूरी नहीं करने वाले लोगों को उसके गुर्गे दिनदहाड़े मार देते थे।करीब 20 से ज्यादा वर्षों तक बिंदु सिंह का तांडव बिहार से लेकर झारखंड तक देखने को मिला।

