August 27, 2026

सितंबर में तीन दिनों तक होगी बैंकों की हड़ताल, 8 दिनों तक प्रभावित रहेगा कामकाज

  • 11 सितंबर को अखिल भारतीय हड़ताल, मांगें नहीं मानी गईं तो 28 से 30 सितंबर तक तीन दिवसीय आंदोलन की चेतावनी
  • बिहार की करीब सात हजार बैंक शाखाओं पर पड़ सकता है असर, अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की भी घोषणा

पटना। सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग कार्य लागू करने और सभी संवर्गों में कार्य निष्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन राशि को समान रूप से लागू करने की मांग को लेकर बैंककर्मियों ने बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स ने 11 सितंबर 2026 को देशव्यापी हड़ताल करने की घोषणा की है। इस हड़ताल का असर बिहार की करीब सात हजार बैंक शाखाओं के कामकाज पर पड़ने की संभावना है। बैंक संगठनों का कहना है कि लंबे समय से उनकी विभिन्न मांगों पर सरकार और संबंधित प्रबंधन स्तर पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में यूनियनों ने चरणबद्ध आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय किया है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि यदि 11 सितंबर की हड़ताल के बाद भी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो 28, 29 और 30 सितंबर को लगातार तीन दिनों की हड़ताल की जाएगी। सितंबर महीने में हड़ताल के साथ पहले से निर्धारित बैंक अवकाश भी हैं। 12 सितंबर को दूसरा शनिवार और 13 सितंबर को रविवार का अवकाश रहेगा। इसके अलावा 26 सितंबर को चौथा शनिवार और 27 सितंबर को रविवार होने के कारण बैंक बंद रहेंगे। ऐसे में 11 सितंबर की हड़ताल और महीने के अंतिम सप्ताह में प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल को नियमित अवकाश से जोड़कर देखा जाए तो सितंबर में अलग-अलग चरणों में कुल आठ दिनों तक बैंकिंग सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव डीएन त्रिवेदी के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और ग्रामीण बैंकों के कर्मचारी एवं अधिकारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। बैंक संगठनों की प्रमुख मांगों में सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग कार्य लागू करना शामिल है। उनका तर्क है कि जिस प्रकार भारतीय रिजर्व बैंक और बीमा क्षेत्र में सोमवार से शुक्रवार तक कार्य व्यवस्था लागू है, उसी तरह बैंकों में भी पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू किया जाना चाहिए। वर्तमान व्यवस्था के तहत बैंकों में महीने के दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश रहता है, जबकि पहले और तीसरे शनिवार को बैंक खुले रहते हैं। बैंक कर्मचारी संगठनों की मांग है कि सभी शनिवार को साप्ताहिक अवकाश घोषित करते हुए सोमवार से शुक्रवार तक नियमित बैंकिंग कार्य किया जाए। यूनियनों का मानना है कि इससे कर्मचारियों को बेहतर कार्य-जीवन संतुलन मिलेगा और कार्य व्यवस्था को भी अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा। आंदोलन का दूसरा प्रमुख मुद्दा कार्य निष्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन राशि को लेकर है। बैंक संगठनों की मांग है कि इस व्यवस्था को सभी संवर्गों में समान रूप से लागू किया जाए। उनका कहना है कि कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच प्रोत्साहन राशि की व्यवस्था में समानता होनी चाहिए। यूनियनों ने आगे के आंदोलन की रूपरेखा भी तय कर दी है। संगठन के अनुसार, यदि सितंबर में होने वाले आंदोलन के बाद भी मांगों पर कोई समाधान नहीं निकलता है तो 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जा सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में बैंक यूनियनों और सरकार के बीच होने वाली बातचीत काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस बीच, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के आह्वान पर बैंक अधिकारियों ने कार्यस्थल से जुड़े अधिकारों को लेकर भी पहल शुरू की है। इसके तहत अधिकारी कार्यालय समय समाप्त होने के बाद काम से जुड़े फोन कॉल, इलेक्ट्रॉनिक डाक और संदेशों का जवाब नहीं देने का निर्णय ले रहे हैं। इसे काम से अलग रहने के अधिकार से जोड़कर देखा जा रहा है। संगठन ने अवकाश के दिनों में आयोजित होने वाली बैठकों के बहिष्कार तथा निर्धारित कार्यालय समय से पहले और बाद में काम नहीं करने की भी बात कही है। बैंक अधिकारी संगठनों का कहना है कि कर्मचारियों और अधिकारियों पर बढ़ते कार्य दबाव को देखते हुए कार्य के निर्धारित समय का पालन आवश्यक है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स में सात प्रमुख बैंक कर्मचारी और अधिकारी संगठन शामिल हैं। इनमें ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन, नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉइज, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन, बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया, इंडियन नेशनल बैंक एम्प्लॉइज फेडरेशन और इंडियन नेशनल बैंक ऑफिसर्स कांग्रेस शामिल हैं। फिलहाल सितंबर में प्रस्तावित हड़ताल को लेकर बैंक ग्राहकों की चिंता बढ़ सकती है। नकद निकासी, चेक समाशोधन, शाखा आधारित लेनदेन और अन्य बैंकिंग कार्य प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, हड़ताल से पहले बैंक यूनियनों और सरकार के बीच बातचीत से समाधान निकलता है या आंदोलन तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

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