बिहार के 27 जिलों में बारिश और वज्रपात का अलर्ट, चलेगी तेज हवाएं, अगले दो दिनों तक बदलेगा मौसम
- 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है हवा, जारी किया गया येलो अलर्ट
- गंगा के बढ़ते जलस्तर से बेगूसराय और भागलपुर के कई इलाके प्रभावित, मानसून में अब तक सामान्य से 42 प्रतिशत कम बारिश
पटना। बिहार में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है और राज्य के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। मौसम विज्ञान केंद्र ने गुरुवार को प्रदेश के 27 जिलों में बारिश की संभावना जताते हुए पीला अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। इसके अलावा कुछ स्थानों पर करीब 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल सकती है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों तक बिहार के मौसम में बदलाव बना रह सकता है। राज्य के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है, जबकि कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी हो सकती है। हालांकि, पूरे बिहार में एक साथ तेज बारिश होने का अनुमान नहीं है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में स्थानीय स्तर पर बादल बनने और वातावरण में मौजूद नमी के कारण अलग-अलग जिलों में बारिश की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। पिछले 24 घंटे के दौरान पटना और खगड़िया सहित कुछ इलाकों में बारिश दर्ज की गई है। राजधानी पटना में गुरुवार को भी आसमान में बादल छाए रहने और हल्की बारिश की संभावना है। बारिश होने की स्थिति में तापमान में कुछ कमी आ सकती है, जिससे लोगों को गर्मी और उमस से आंशिक राहत मिलने की उम्मीद है। पटना और इसके आसपास के क्षेत्रों में अगले दो दिनों तक मौसम का उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। बारिश की गतिविधियों के बीच बिहार में नदियों के बढ़ते जलस्तर ने भी चिंता बढ़ा दी है। गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिसका असर नदी किनारे बसे कई इलाकों पर पड़ने लगा है। बेगूसराय जिले के बलिया प्रखंड में भवानंदपुर, परमानंदपुर और भगतपुर समेत कई इलाके बाढ़ से प्रभावित होने लगे हैं। बढ़ते पानी के कारण निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। भागलपुर में भी गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर का असर दिखाई दे रहा है। जिले के दियारा क्षेत्रों में गंगा का पानी प्रवेश कर गया है, जिससे कई जगहों पर बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। नदी किनारे रहने वाले लोगों और किसानों के सामने बढ़ते जलस्तर को लेकर चिंता बनी हुई है। प्रशासन की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है और प्रभावित क्षेत्रों में लोगों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि बिहार में बारिश का क्रम पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अगले एक-दो दिनों में कई जिलों में स्थानीय परिस्थितियों के कारण हल्की बारिश हो सकती है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरे राज्य में लगातार और व्यापक स्तर पर तेज बारिश होगी। अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम की स्थिति भिन्न हो सकती है और कहीं बारिश तो कहीं केवल बादल छाए रहने की स्थिति बन सकती है। मौसम विभाग ने किसानों और आम लोगों को स्थानीय मौसम की जानकारी पर लगातार नजर रखने की सलाह दी है। विशेष रूप से गरज-चमक और आकाशीय बिजली की संभावना के दौरान लोगों को खुले मैदानों में जाने से बचने की जरूरत है। बिजली के खंभों, बड़े पेड़ों और खुले स्थानों के आसपास खड़े होने से भी बचने की सलाह दी गई है। किसानों को खेतों में काम करते समय मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरतने की जरूरत है। रक्षाबंधन के दिन 28 अगस्त को भी बिहार में मौसम पूरी तरह साफ रहने की संभावना कम है। राज्य के कई हिस्सों में बादल छाए रह सकते हैं और कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है। ऐसे में त्योहार के दौरान बाहर निकलने वाले लोगों को मौसम के बदलते रुख को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारी करनी होगी। इस बीच, मानसून के पूरे मौसम में बिहार में अब तक बारिश की स्थिति सामान्य से काफी कमजोर बनी हुई है। आंकड़ों के अनुसार, 26 अगस्त तक राज्य में करीब 741.2 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इसके मुकाबले केवल 428.6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। यह सामान्य से करीब 42 प्रतिशत कम है। बारिश की इस कमी का असर कृषि क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। पर्याप्त वर्षा नहीं होने से किसानों के सामने खेती और सिंचाई से जुड़ी चुनौतियां बढ़ सकती हैं। अब लोगों की नजर आने वाले दिनों के मौसम पर टिकी है कि सक्रिय होती बारिश की गतिविधियां राज्य में मानसून की कमी को कितनी हद तक पूरा कर पाती हैं।


