August 27, 2026

पटना में स्वाइन फ्लू के दो मरीज मिले, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट; अस्पतालों को संदिग्ध मामलों पर नजर रखने के निर्देश

  • अगमकुआं और कंकड़बाग के दो लोगों में संक्रमण की पुष्टि, दोनों की हालत खतरे से बाहर बताई गई
  • एक सप्ताह में 25 से अधिक संदिग्ध नमूनों की हुई जांच, निगरानी, समय पर जांच और उपचार व्यवस्था पर विभाग का जोर

पटना। देश के विभिन्न हिस्सों में मौसमी इन्फ्लुएंजा के मामलों में बढ़ोतरी के बीच बिहार में भी स्वास्थ्य विभाग ने सतर्कता बढ़ा दी है। राजधानी पटना में इन्फ्लुएंजा एच1एन1 संक्रमण के दो मामलों की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पतालों को एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं। दोनों संक्रमित मरीज पटना के अगमकुआं और कंकड़बाग इलाके के रहने वाले बताए जा रहे हैं। राहत की बात यह है कि चिकित्सकों के अनुसार दोनों मरीजों की हालत फिलहाल खतरे से बाहर है और उनका इलाज जारी है। दोनों मरीजों के नमूनों की जांच पटना सिटी स्थित राजेंद्र मेमोरियल अनुसंधान संस्थान में की गई, जहां संक्रमण की पुष्टि हुई। संस्थान के अनुसार, पिछले एक सप्ताह के दौरान पटना के अलग-अलग अस्पतालों से 25 से अधिक संदिग्ध मरीजों के नमूने जांच के लिए भेजे गए थे। जांच के बाद इनमें से दो नमूनों में एच1एन1 संक्रमण की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार संक्रमित मरीजों की उम्र 47 और 52 वर्ष है। इनमें से एक मरीज का नमूना कंकड़बाग स्थित एक निजी अस्पताल से जांच के लिए भेजा गया था, जबकि दूसरे मरीज का संबंध राजेंद्र मेमोरियल अनुसंधान संस्थान के बाह्य रोगी विभाग से बताया गया है। दोनों मरीजों की निगरानी की जा रही है और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उनका उपचार चल रहा है। दो मामलों की पुष्टि के बाद स्वास्थ्य विभाग ने राज्य के अस्पतालों को अधिक सतर्क रहने को कहा है। विशेष रूप से ऐसे मरीजों की समय पर पहचान पर जोर दिया गया है, जिनमें तेज बुखार, खांसी, गले में परेशानी या सांस लेने से संबंधित लक्षण दिखाई देते हैं। जरूरत पड़ने पर संदिग्ध मरीजों के नमूनों की जांच कराई जाएगी और गंभीर स्थिति वाले मरीजों को तत्काल आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। पटना के सिविल सर्जन डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। अस्पतालों को सतर्क रखा गया है ताकि संदिग्ध मामलों की पहचान में देरी न हो। उन्होंने कहा कि फिलहाल लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी और समय पर चिकित्सकीय परामर्श जरूरी है। देश के अन्य हिस्सों में मौसमी इन्फ्लुएंजा के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए अस्पतालों की तैयारियों और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, देश में मौसमी इन्फ्लुएंजा के मामलों में वृद्धि जरूर देखी जा रही है, लेकिन अभी तक किसी नए या असामान्य विषाणु प्रकार की पुष्टि नहीं हुई है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के अनुसार, एच1एन1 विषाणु में होने वाले आनुवंशिक बदलाव मौसमी फ्लू में दिखाई देने वाले सामान्य बदलावों के अनुरूप हैं। इसलिए मौजूदा स्थिति को किसी नए और अधिक खतरनाक विषाणु प्रकार के रूप में नहीं देखा जा रहा है बिहार में एच1एन1 संक्रमण पहले भी स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बन चुका है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2015 में राज्य में संक्रमण के 352 मामले सामने आए थे और छह लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद वर्ष 2017 में 26 मामले, 2018 में एक, 2019 में 52 और 2020 में 17 मामले दर्ज किए गए थे। हाल के वर्षों में मामलों की संख्या में कमी देखी गई, लेकिन अन्य राज्यों में संक्रमण बढ़ने की खबरों के बीच बिहार में फिर से सतर्कता बढ़ाई गई है। मानसून के दौरान बारिश और वातावरण में बढ़ी नमी के कारण सांस से संबंधित बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। चिकित्सकों के अनुसार, इस मौसम में सांस लेने में परेशानी, फेफड़ों के संक्रमण और निमोनिया से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ सकती है। अधिकांश मरीज उचित इलाज के बाद स्वस्थ हो जाते हैं, लेकिन बुजुर्गों और पहले से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों में संक्रमण अधिक गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे मरीजों को विशेष सावधानी की जरूरत होती है और गंभीर स्थिति में उन्हें गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती करने की आवश्यकता पड़ सकती है। स्वास्थ्य विभाग का जोर फिलहाल संदिग्ध मामलों की पहचान, समय पर जांच और गंभीर मरीजों के लिए पर्याप्त उपचार व्यवस्था सुनिश्चित करने पर है। पटना में एच1एन1 संक्रमण के दो मामलों की पुष्टि के बाद बिहार में स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी का पहरा कड़ा कर दिया है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन मौसम में बदलाव और देश के अन्य हिस्सों में बढ़ते मामलों को देखते हुए अस्पतालों और स्वास्थ्य अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

You may have missed