परिसीमन के बाद ही होगा बिहार पंचायत चुनाव, पंचायती राज मंत्री के बयान से चुनावी तस्वीर हुई स्पष्ट
- अधिसूचना जारी होने के संकेत, परिसीमन पूरा होते ही शुरू होगी चुनावी प्रक्रिया
- पंचायतों के पुनर्गठन से बदलेंगे चुनावी समीकरण, ग्रामीण विकास योजनाओं को भी मिलेगी नई गति
पटना। बिहार में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर लंबे समय से जारी असमंजस अब धीरे-धीरे समाप्त होता दिखाई दे रहा है। पंचायत चुनाव की संभावित तिथियों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने स्पष्ट संकेत दिया है कि राज्य में पंचायत चुनाव का मार्ग परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही प्रशस्त होगा। उन्होंने कहा कि सरकार पंचायत चुनाव की तैयारी पूरी गंभीरता से कर रही है और जैसे ही परिसीमन का कार्य पूरा होगा, चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। मंत्री के इस बयान के बाद राज्यभर में पंचायत चुनाव को लेकर नई राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में लाखों संभावित उम्मीदवार, वर्तमान जनप्रतिनिधि और मतदाता लंबे समय से पंचायत चुनाव की घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में पंचायती राज मंत्री के ताजा बयान को चुनावी प्रक्रिया की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक जानकारों का भी मानना है कि सरकार अब चुनावी प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ रही है और परिसीमन का कार्य पूरा होते ही राज्य निर्वाचन आयोग आगे की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। वर्तमान समय में बिहार के सभी 38 जिलों में पंचायतों के परिसीमन का कार्य तेजी से चल रहा है। इस प्रक्रिया के अंतर्गत पंचायतों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण, वार्डों की संख्या में आवश्यक परिवर्तन तथा आरक्षण व्यवस्था का पुनर्गठन किया जा रहा है। परिसीमन का उद्देश्य जनसंख्या और प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप पंचायतों की संरचना को अधिक संतुलित और प्रभावी बनाना है। इस कारण कई पंचायतों की भौगोलिक सीमाएं बदल सकती हैं, जबकि कुछ पंचायतों में नए गांव जोड़े जाने या कुछ गांवों को अलग किए जाने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है। परिसीमन की प्रक्रिया का सीधा प्रभाव पंचायत चुनाव के राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ने वाला है। जिन क्षेत्रों में वार्डों का पुनर्गठन होगा, वहां उम्मीदवारों को नई रणनीति बनानी पड़ेगी। कई वर्तमान जनप्रतिनिधियों के निर्वाचन क्षेत्र बदल सकते हैं, जबकि नए क्षेत्रों के जुड़ने से चुनावी प्रतिस्पर्धा भी प्रभावित होगी। यही कारण है कि संभावित मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य पद के दावेदार अभी से गांव-गांव जाकर लोगों से संपर्क बढ़ाने में जुट गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि परिसीमन के बाद कई पंचायतों का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा। इससे चुनावी समीकरणों में भी व्यापक परिवर्तन देखने को मिल सकता है। कई पंचायतों में मतदाताओं की संख्या बढ़ेगी, तो कहीं आरक्षण व्यवस्था में बदलाव के कारण नए उम्मीदवारों के लिए अवसर खुलेंगे। ऐसे में आगामी पंचायत चुनाव पहले की तुलना में अधिक रोचक और प्रतिस्पर्धी होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने यह भी कहा कि राज्य सरकार पंचायतों को अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण प्रशासन को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ना और पंचायत स्तर पर नागरिक सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना है। इसी दिशा में पंचायत सरकार भवनों का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई जा सकें। उन्होंने बताया कि लोक सेवा अधिकार प्रणाली तथा आधार संबंधी सेवाओं का विस्तार भी पंचायत स्तर तक किया जा रहा है। इससे ग्रामीण नागरिकों को प्रमाण-पत्र, पहचान संबंधी सेवाओं और अन्य सरकारी सुविधाओं के लिए प्रखंड या जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार का प्रयास है कि अधिकतम सरकारी सेवाएं पंचायत स्तर पर ही उपलब्ध कराई जाएं। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ग्रामीण सौर ऊर्जा आधारित सड़क प्रकाश योजना के माध्यम से गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार भी किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत ग्रामीण सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर सौर ऊर्जा से संचालित प्रकाश व्यवस्था स्थापित की जा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा और आवागमन की सुविधा बेहतर हो सके। मंत्री ने बताया कि राज्य में बड़ी संख्या में पंचायत सरकार भवनों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि अनेक भवनों का निर्माण कार्य अभी प्रगति पर है। ग्रामीण विकास और पंचायतों को सशक्त बनाने की इन योजनाओं के बीच अब पंचायत चुनाव की तैयारियां भी अंतिम चरण में पहुंचती दिखाई दे रही हैं। परिसीमन पूरा होने के बाद चुनाव की अधिसूचना जारी होने की संभावना ने संभावित उम्मीदवारों और मतदाताओं की उत्सुकता बढ़ा दी है। राजनीतिक दल भी गांवों में अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं और संभावित रणनीति तैयार करने में जुट गए हैं। फिलहाल पूरे राज्य की निगाहें परिसीमन प्रक्रिया के पूरा होने पर टिकी हैं। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करेगा और पंचायत चुनाव की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी। माना जा रहा है कि यह चुनाव केवल नए जनप्रतिनिधियों के चयन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परिसीमन के बाद बदले राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों की भी नई तस्वीर सामने लाएगा।


