गया में करैत सांप के डसने से दो चचेरे भाइयों की मौत, झाड़-फूंक में देरी बनी जानलेवा
- फूस के घर में जमीन पर सो रहे थे दोनों मासूम, विषैले सांप के दंश से मचा कोहराम
- समय पर चिकित्सा नहीं मिलने से गई दोनों बच्चों की जान, ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत
गया। बिहार के गया जिले के अतरी प्रखंड स्थित मिसिर बिगहा गांव में रविवार को हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। फूस के घर में जमीन पर चटाई बिछाकर सो रहे दो चचेरे भाइयों की विषैले करैत सांप के डसने से मौत हो गई। दोनों मासूमों की मौत से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। घटना के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि ग्रामीणों में भी दहशत का माहौल बना हुआ है। यह घटना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में समय पर चिकित्सकीय उपचार और जागरूकता की आवश्यकता को उजागर करती है। जानकारी के अनुसार मृतकों की पहचान कृष्ण मांझी के नौ वर्षीय पुत्र लिटिल कुमार और चौथी मांझी के 11 वर्षीय पुत्र बुद्धू कुमार के रूप में हुई है। दोनों बच्चे रविवार की अहले सुबह अपने फूस के घर में जमीन पर चटाई बिछाकर सो रहे थे। इसी दौरान लगभग पांच फुट लंबा विषैला करैत सांप घर के भीतर घुस आया और सोते समय दोनों बच्चों को डस लिया। रात के अंधेरे में किसी को घटना की भनक तक नहीं लगी। सुबह जब बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी, तब परिजनों को सांप के काटने की जानकारी हुई। परिजनों ने बताया कि सांप के दंश के बाद बच्चों की स्थिति लगातार बिगड़ रही थी, लेकिन उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय पहले झाड़-फूंक का सहारा लिया गया। स्थानीय स्तर पर पारंपरिक तरीके से उपचार कराने में काफी समय बीत गया। जब बच्चों की हालत अत्यधिक गंभीर हो गई, तब उन्हें आनन-फानन में मगध चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल ले जाया गया। हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी। बताया गया कि नौ वर्षीय लिटिल कुमार ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में दम तोड़ दिया, जबकि 11 वर्षीय बुद्धू कुमार की अस्पताल में उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। चिकित्सकों के अनुसार समय पर विषरोधी औषधि और उचित चिकित्सा मिल जाती तो दोनों बच्चों की जान बचाई जा सकती थी। इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि सांप के काटने की स्थिति में झाड़-फूंक जैसे उपायों के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचना ही सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है। इस घटना का सबसे मार्मिक पहलू यह भी है कि लिटिल कुमार पहले से ही पारिवारिक विपरीत परिस्थितियों का सामना कर रहा था। उसकी मां दूसरी शादी कर दूसरे स्थान पर चली गई थी, जबकि उसके पिता काफी समय से लापता बताए जाते हैं। ऐसे में उसकी चाची मारो देवी ही उसे अपने बेटे की तरह पाल-पोस रही थीं। उन्होंने बताया कि दोनों बच्चे रोज की तरह घर में सो रहे थे। अचानक विषैला सांप घर में घुस आया और दोनों को डस लिया। उन्हें यह उम्मीद भी नहीं थी कि कुछ ही घंटों में दोनों मासूम हमेशा के लिए इस दुनिया से चले जाएंगे। घटना के बाद पूरे परिवार में मातम पसरा हुआ है। परिजनों की चीख-पुकार से गांव का माहौल गमगीन हो गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण पीड़ित परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। घटना के बाद ग्रामीणों ने उस करैत सांप को खोजकर मार दिया। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका सावधानी, सुरक्षित आवास और समय पर चिकित्सकीय उपचार है। ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी बड़ी संख्या में लोग फूस के घरों में रहते हैं और जमीन पर सोने की परंपरा प्रचलित है। बरसात के मौसम में सांप अक्सर सुरक्षित और सूखे स्थानों की तलाश में घरों के भीतर प्रवेश कर जाते हैं। ऐसे में फूस के मकानों और खुले स्थानों पर रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। रात में सोने से पहले बिस्तर और आसपास की जगह की अच्छी तरह जांच करना, घर के आसपास झाड़ियां साफ रखना तथा दरवाजों और दीवारों की दरारों को बंद करना जैसे उपाय जोखिम को काफी हद तक कम कर सकते हैं।स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सांप के काटने पर किसी भी प्रकार की झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय न गंवाकर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल पहुंचना चाहिए, जहां विषरोधी औषधि उपलब्ध हो। समय पर उपचार मिलने से अधिकांश मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है।गया की यह दुखद घटना केवल एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज के लिए गंभीर चेतावनी भी है। बरसात के मौसम में सांपों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को वैज्ञानिक उपचार और बचाव के उपायों के प्रति जागरूक करना होगा, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।


