पश्चिम बंगाल में मंत्रिमंडल विस्तार, 35 नए मंत्रियों को मिली जिम्मेदारी
- मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सरकार गठन के एक माह बाद किया मंत्रिमंडल का विस्तार, पूर्व क्रिकेटर अशोक डिंडा भी बने मंत्री
- कैबिनेट में कुल मंत्रियों की संख्या बढ़कर 41 हुई, विभागों के बंटवारे का इंतजार
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के लगभग एक महीने बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपने मंत्रिमंडल का पहला बड़ा विस्तार किया। सोमवार को लोक भवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में 35 नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। इस विस्तार के साथ राज्य मंत्रिमंडल में मंत्रियों की कुल संख्या बढ़कर 41 हो गई है। हालांकि, नव नियुक्त मंत्रियों को कौन-कौन से विभाग सौंपे जाएंगे, इसकी घोषणा अभी नहीं की गई है। राज्य में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने उल्लेखनीय सफलता हासिल करते हुए तृणमूल कांग्रेस के लगभग 15 वर्षों के शासन का अंत किया था। इसके बाद 9 मई को शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की थी। उनके साथ कुछ वरिष्ठ नेताओं को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। अब सरकार ने व्यापक स्तर पर मंत्रिमंडल विस्तार कर प्रशासनिक और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की है। नए मंत्रिमंडल में विभिन्न क्षेत्रों, सामाजिक वर्गों और राजनीतिक अनुभव वाले नेताओं को स्थान दिया गया है। सबसे अधिक चर्चा पूर्व भारतीय क्रिकेटर और मोयना विधानसभा क्षेत्र से विधायक अशोक डिंडा को मंत्री बनाए जाने को लेकर हो रही है। खेल जगत से राजनीति में आए अशोक डिंडा को मंत्री पद मिलने को सरकार की एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पहल माना जा रहा है। शपथ ग्रहण समारोह में कुल 35 नेताओं ने मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ ली। इनमें 13 नेताओं को मंत्रिमंडल स्तर का मंत्री बनाया गया है। वहीं तीन नेताओं को स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्य मंत्री का दायित्व सौंपा गया है। इसके अलावा 19 नेताओं को राज्य मंत्री के रूप में मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। मंत्रिमंडल स्तर के मंत्रियों में दीपक बर्मन, तापस रॉय, डॉ. शंकर घोष, मनोज कुमार उरांव, अर्जुन सिंह, गौरी शंकर घोष, स्वपन दासगुप्ता, जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, कल्याण चक्रवर्ती, अजय पोद्दार, सारदवत मुखर्जी, दूध कुमार मंडल और अनुप कुमार दास प्रमुख नाम हैं। इन नेताओं को संगठन और प्रशासन दोनों स्तरों पर अनुभव रखने वाला माना जाता है। स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्रियों में डॉ. इंद्रनील खान, मालती राव रॉय और राजेश महतो को शामिल किया गया है। इन नेताओं को अपेक्षाकृत स्वतंत्र प्रशासनिक जिम्मेदारियां मिलने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार ने क्षेत्रीय और सामाजिक प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए इन नियुक्तियों का निर्णय लिया है। राज्य मंत्रियों की सूची में जोएल मुर्मू, हरे कृष्ण बेरा, आनंदमय बर्मन, अशोक डिंडा, नदियार चंद बाउरी, विशाल लामा, शांतनु प्रमाणिक, मौमिता विश्वास मिश्रा, उमेश रे, पूर्णिमा चक्रवर्ती, कौशिक चौधरी, भास्कर भट्टाचार्य, दिबाकर घरामी, अमिया किस्कू, कलिता माझी, गार्गी दास घोष, बिराज विश्वास, दीपंकर जना और सुमना सरकार शामिल हैं। इन नेताओं को सरकार के विभिन्न विभागों में जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। राजनीतिक जानकारों के अनुसार मंत्रिमंडल विस्तार के माध्यम से मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने का प्रयास किया है। चुनाव के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नेताओं को सरकार में स्थान देकर पार्टी नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की है। साथ ही विभिन्न क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों को शामिल कर क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब सबसे अधिक चर्चा विभागों के बंटवारे को लेकर हो रही है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री जल्द ही मंत्रियों के विभागों की घोषणा करेंगे। इसके बाद नई सरकार की प्रशासनिक प्राथमिकताएं और कार्ययोजना अधिक स्पष्ट रूप से सामने आएंगी। राज्य की जनता भी नई सरकार से विकास, रोजगार, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण से जुड़े मुद्दों पर ठोस पहल की उम्मीद कर रही है। ऐसे में मंत्रिमंडल का यह विस्तार सरकार के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नए मंत्रियों को उनकी क्षमता और अनुभव के अनुरूप विभाग दिए जाते हैं, तो सरकार अपने चुनावी वादों को तेजी से लागू करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है। फिलहाल पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस मंत्रिमंडल विस्तार को नई सरकार के दूसरे चरण की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।


