विधान परिषद चुनाव में एक्टिव हुए नीतीश कुमार, संजय झा के आवास पहुंचे, नेताओं के साथ की बैठक
- सीट बंटवारे पर चर्चा, उम्मीदवारों का चयन नीतीश करेंगे, संभावित प्रत्याशियों पर मंथन
- सामाजिक संतुलन और संगठनात्मक प्रतिनिधित्व पर फोकस, विधान परिषद की रिक्त सीटों के लिए रणनीति बनाने में जुटी पार्टी
पटना। बिहार विधान परिषद चुनाव की आहट के साथ ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजधानी पटना में राजनीतिक गतिविधियां अचानक बढ़ गई हैं और सत्ता के गलियारों में संभावित उम्मीदवारों, सीट बंटवारे तथा राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। इस बीच जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की लगातार हो रही राजनीतिक बैठकों ने राजनीतिक अटकलों को और अधिक बल दे दिया है। जानकारी के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हाल के दिनों में कई महत्वपूर्ण नेताओं से मुलाकात की है। सबसे पहले वे राज्यसभा सांसद संजय झा के आवास पहुंचे, जहां संगठनात्मक और राजनीतिक विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। इसके बाद उन्होंने बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के आवास पर भी बैठक की। इन मुलाकातों को सामान्य राजनीतिक शिष्टाचार से कहीं अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है और राजनीतिक विश्लेषक इन्हें आगामी विधान परिषद चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देख रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधान परिषद की रिक्त सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर जनता दल यूनाइटेड पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर लगभग सहमति बन चुकी है। सूत्रों के अनुसार, विधान परिषद की कुल 10 रिक्त सीटों में से लगभग चार सीटें जनता दल यूनाइटेड के हिस्से में आ सकती हैं। यही कारण है कि पार्टी के भीतर टिकट पाने की होड़ तेज हो गई है और कई वरिष्ठ नेता तथा संगठन से जुड़े चेहरे अपनी दावेदारी मजबूत करने में लगे हुए हैं। पार्टी सूत्रों की मानें तो उम्मीदवारों के चयन को लेकर गहन मंथन चल रहा है। इस प्रक्रिया में केवल राजनीतिक अनुभव ही नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व और संगठन के प्रति योगदान को भी महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। जनता दल यूनाइटेड की रणनीति है कि उम्मीदवारों का चयन इस प्रकार किया जाए जिससे विभिन्न सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व मिले और पार्टी का जनाधार और मजबूत हो। राजनीतिक गलियारों में सबसे अधिक चर्चा स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के नाम को लेकर हो रही है। बताया जा रहा है कि उन्हें विधान परिषद भेजने की तैयारी की जा रही है। हालांकि पार्टी नेतृत्व की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन अंदरूनी चर्चाओं में उनका नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। यदि ऐसा होता है तो यह जदयू की राजनीतिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाएगा। इसके अतिरिक्त पार्टी अन्य सीटों के लिए भी संतुलित सामाजिक समीकरण बनाने में जुटी है। पिछड़ा वर्ग, अतिपिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक समुदाय तथा लंबे समय से संगठन के लिए कार्य कर रहे समर्पित नेताओं को प्रतिनिधित्व देने पर गंभीर विचार किया जा रहा है। जदयू नेतृत्व का मानना है कि सामाजिक संतुलन बनाए रखना बिहार की राजनीति में सफलता का एक महत्वपूर्ण आधार है। इसी वजह से उम्मीदवारों के चयन में सभी वर्गों को ध्यान में रखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आगामी विधानसभा चुनावों और भविष्य की राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए यह चुनाव केवल विधान परिषद की सीटों तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से राजनीतिक दल अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और विभिन्न सामाजिक समूहों को साधने का प्रयास कर रहे हैं। जदयू भी इसी रणनीति के तहत अपने उम्मीदवारों के चयन में विशेष सावधानी बरत रही है। पटना में लगातार हो रही बैठकों ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि पार्टी नेतृत्व चुनाव को लेकर किसी भी प्रकार की चूक नहीं चाहता। उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम निर्णय लेने से पहले सभी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। संगठन के वरिष्ठ नेताओं के साथ लगातार संवाद और रणनीतिक बैठकों का उद्देश्य भी यही है कि पार्टी के भीतर संतुलन बना रहे और चुनाव में अधिकतम राजनीतिक लाभ हासिल किया जा सके। फिलहाल बिहार की राजनीति में विधान परिषद चुनाव चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। सभी की निगाहें जनता दल यूनाइटेड और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के अंतिम फैसलों पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की घोषणा के साथ राजनीतिक तस्वीर और अधिक स्पष्ट होगी। तब यह भी सामने आ जाएगा कि पार्टी किन चेहरों पर भरोसा जताती है और किन नेताओं की राजनीतिक यात्रा को नया विस्तार मिलने वाला है। विधान परिषद चुनाव से पहले जारी यह राजनीतिक गतिविधियां राज्य की राजनीति को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती हैं।


