टेंडर घोटाले में बड़ा खुलासा: आईएएस अधिकारी योगेश और अभिलाषा निलंबित, ठेकेदार की पहुंच पर उठे गंभीर सवाल
- ईडी की जांच में विदेश यात्राओं, महंगे उपहारों और प्रभावशाली संपर्कों का खुलासा
- अवैध संपत्ति, कथित टेंडर प्रबंधन और अधिकारियों की नियुक्तियों में हस्तक्षेप के आरोपों से प्रशासनिक हलकों में हलचल
पटना। बिहार के चर्चित टेंडर घोटाला मामले में राज्य सरकार ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए भारतीय प्रशासनिक सेवा के दो अधिकारियों, योगेश कुमार सागर और अभिलाषा शर्मा को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई प्रवर्तन निदेशालय की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है, जिसमें ठेकेदार रिशु श्री और कई वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कथित आर्थिक और प्रशासनिक संबंधों का उल्लेख किया गया है। मामले के सामने आने के बाद राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। जांच एजेंसियों के अनुसार, रिशु श्री नामक ठेकेदार ने विभिन्न सरकारी विभागों में प्रभाव स्थापित कर न केवल सरकारी निविदाओं को प्रभावित किया, बल्कि अधिकारियों की नियुक्तियों और पदस्थापनाओं में भी कथित भूमिका निभाई। जांच में यह दावा किया गया है कि उसने कई अधिकारियों को महंगे उपहार, पर्यटन यात्राएं और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराकर अपने पक्ष में माहौल तैयार किया। निलंबित अधिकारी योगेश कुमार सागर वर्ष 2017 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं। वर्तमान में वे समाज कल्याण विभाग में कार्यरत थे। उत्तर प्रदेश के बरेली निवासी योगेश कुमार सागर का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। साधारण परिवार से आने वाले योगेश ने कठिन परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त की और बाद में प्रशासनिक सेवा में स्थान हासिल किया। उन्होंने लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय से चिकित्सा विज्ञान की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा उत्तीर्ण कर प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया। जांच एजेंसियों के अनुसार, जून 2024 में योगेश कुमार सागर और उनके परिवार के कई सदस्यों की ऑस्ट्रिया यात्रा का पूरा खर्च रिशु श्री ने वहन किया था। इस यात्रा में विदेशी शहरों के भ्रमण, विमान यात्रा और महंगे होटलों में ठहरने पर लाखों रुपये खर्च किए गए। जांच रिपोर्ट में इसे कथित लाभ के रूप में दर्ज किया गया है। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक और विभागीय प्रक्रिया के बाद ही होगी। दूसरी ओर, वर्ष 2014 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारी अभिलाषा शर्मा भी जांच के घेरे में हैं। वर्तमान में वे ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत जीविका कार्यक्रम की मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी के रूप में कार्यरत थीं। अभिलाषा शर्मा ने अभियांत्रिकी शिक्षा प्राप्त करने के बाद प्रशासनिक सेवा में प्रवेश किया और बिहार में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उन पर आरोप है कि उनके आवास पर विकसित किए गए उद्यान और उनके परिजनों की यात्राओं का खर्च भी कथित रूप से रिशु श्री द्वारा वहन किया गया। जांच एजेंसियों का दावा है कि उन्हें महंगे मोबाइल फोन और अन्य उपहार भी दिए गए थे। मामले का मुख्य आरोपी रिशु श्री उर्फ रिशु रंजन सिन्हा सारण जिले का निवासी बताया जाता है। प्रवर्तन निदेशालय और विशेष निगरानी इकाई की जांच में उस पर बड़े पैमाने पर अवैध संपत्ति अर्जित करने, मनी लॉन्ड्रिंग और सरकारी निविदाओं में अनियमितता फैलाने के आरोप लगाए गए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार उसने विभिन्न विभागों में अधिकारियों से सांठगांठ कर निविदा प्रक्रिया को प्रभावित किया और मनचाहे ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया। इसके बदले कथित रूप से भारी कमीशन लिया जाता था। जांच एजेंसियों का दावा है कि रिशु श्री ने वर्षों के दौरान लगभग 265 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित की। रिपोर्ट के अनुसार उसकी आय का बड़ा हिस्सा सरकारी परियोजनाओं और निविदाओं से जुड़ा हुआ था। जांच में यह भी कहा गया है कि कई वित्तीय लेन-देन हवाला माध्यमों से किए गए। हालांकि इन सभी आरोपों की पुष्टि न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और आगे की जांच के बाद ही होगी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कुछ अधिकारियों की नियुक्तियों और पदस्थापनाओं में भी कथित रूप से रिशु श्री की भूमिका थी। जांच एजेंसियों के अनुसार उसने अपने अनुकूल अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त कराने का प्रयास किया ताकि सरकारी परियोजनाओं और निविदाओं पर प्रभाव बनाए रखा जा सके। यही कारण है कि इस मामले को केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में हस्तक्षेप के रूप में भी देखा जा रहा है। प्रवर्तन निदेशालय की जांच में कई डिजिटल साक्ष्य, संदेश और दस्तावेज सामने आए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस कथित नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे और इससे सरकारी व्यवस्था को कितना नुकसान पहुंचा। राज्य सरकार द्वारा दो वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित किए जाने के बाद यह मामला और अधिक गंभीर हो गया है। प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में लगाए गए आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह राज्य की निविदा प्रणाली और प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। वहीं सरकार का कहना है कि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। फिलहाल मामले की जांच जारी है और सभी पक्षों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर इस बहुचर्चित मामले में कई और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना है।


