20 साल बाद राबड़ी आवास खाली करने का नोटिस, सियासत में छिड़ी नई बहस

  • भवन निर्माण विभाग ने 10 सर्कुलर रोड आवास तत्काल खाली करने का दिया निर्देश, मंत्री नंदकिशोर राम को किया गया आवंटन
  • राजद ने बताया राजनीतिक प्रतिशोध, सरकार ने कहा— नियमानुसार हुआ आवास आवंटन

पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर सरकारी आवास को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड का सरकारी आवास खाली करने का नोटिस जारी किया गया है। भवन निर्माण विभाग की ओर से जारी इस नोटिस के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। जहां सरकार इसे प्रशासनिक और नियमसम्मत कार्रवाई बता रही है, वहीं राष्ट्रीय जनता दल इसे राजनीतिक दुर्भावना और विपक्ष को अपमानित करने की कोशिश करार दे रहा है।  जानकारी के अनुसार, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बाद नेता प्रतिपक्ष के रूप में राबड़ी देवी को पटना के 39 हार्डिंग रोड स्थित सरकारी आवास आवंटित किया गया था। भवन निर्माण विभाग के आदेश के अनुसार यह आवास 25 नवंबर 2025 को ही उनके नाम आवंटित कर दिया गया था। इसके बावजूद राबड़ी देवी और उनका परिवार अब तक 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास में रह रहा है। विभाग का कहना है कि पिछले छह महीनों के दौरान कई बार आग्रह किए जाने के बावजूद आवास खाली नहीं किया गया, जिसके बाद औपचारिक नोटिस जारी करना पड़ा। भवन निर्माण विभाग के संयुक्त सचिव सह भू-संपदा पदाधिकारी द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास अब बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित किया जा चुका है। ऐसे में राबड़ी देवी को नए आवंटित आवास में स्थानांतरित होकर पुराना आवास तत्काल खाली करना चाहिए। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह निर्णय सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति के बाद लिया गया है।  गौरतलब है कि लालू प्रसाद यादव और उनका परिवार वर्ष 2005 से इस सरकारी आवास में रह रहा है। यह आवास लंबे समय तक राष्ट्रीय जनता दल की राजनीतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र भी रहा है। यहीं से पार्टी की कई महत्वपूर्ण रणनीतियां बनाई गईं और अनेक राजनीतिक फैसले लिए गए। इस कारण यह आवास केवल एक सरकारी भवन नहीं, बल्कि राजद कार्यकर्ताओं के लिए भावनात्मक महत्व भी रखता है। इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए भवन निर्माण मंत्री लेसी सिंह ने कहा कि आवास का आवंटन पूरी तरह नियमों के तहत किया गया है। चूंकि यह भवन अब मंत्री नंदकिशोर राम को आवंटित हो चुका है, इसलिए पूर्व आवंटी को इसे खाली करना होगा। उन्होंने कहा कि इसमें किसी प्रकार की राजनीतिक भावना नहीं है और विभाग केवल अपने दायित्वों का निर्वहन कर रहा है। वहीं राजद ने इस कार्रवाई का कड़ा विरोध किया है। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि राबड़ी देवी वर्तमान में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष हैं और दो-दो पूर्व मुख्यमंत्री इस आवास में रह चुके हैं। ऐसे में अचानक किसी अन्य व्यक्ति के नाम आवंटन कर नोटिस जारी करना राजनीतिक प्रतिशोध की भावना को दर्शाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष को अपमानित करने की कोशिश कर रही है। दरअसल, यह पहला अवसर नहीं है जब राबड़ी देवी को आवास खाली करने का नोटिस मिला है। लगभग एक माह पूर्व भी भवन निर्माण विभाग ने इसी संबंध में नोटिस जारी किया था। सूत्रों के अनुसार, परिवार द्वारा धीरे-धीरे सामान अन्य आवासों में स्थानांतरित किया जा रहा है और आवास खाली करने की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से चल रही है। इस विवाद ने एक बार फिर बिहार की राजनीति में सरकारी आवासों के उपयोग और राजनीतिक परंपराओं पर बहस छेड़ दी है। एक ओर सरकार इसे नियम आधारित प्रशासनिक प्रक्रिया बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे राजनीतिक संदेश के रूप में देख रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक राजनीतिक रंग ले सकता है, क्योंकि राबड़ी आवास केवल एक सरकारी भवन नहीं बल्कि बिहार की राजनीति के एक महत्वपूर्ण दौर का प्रतीक भी माना जाता है।

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