पटना में गहराया रसोई गैस संकट, उपभोक्ताओं को सिलिंडर के लिए करना पड़ रहा लंबा इंतजार
- मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ी खाई, लगभग दो लाख सिलिंडरों का लंबित भार बना बड़ी चुनौती
- कालाबाज़ारी और अवैध रिफिलिंग पर प्रशासन की नजर, कई एजेंसियों को संवेदनशील घोषित किया गया
पटना। बिहार की राजधानी पटना एक बार फिर रसोई गैस संकट से जूझ रही है। हालात ऐसे बन गए हैं कि उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है और लोगों को लंबे इंतजार का सामना करना पड़ रहा है। शहर में रसोई गैस की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि आपूर्ति व्यवस्था उस गति से काम नहीं कर पा रही है। इसके कारण हजारों परिवारों के सामने घरेलू रसोई संचालन की समस्या खड़ी हो गई है। जानकारी के अनुसार कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि गैस सिलिंडर की बुकिंग कराने के बाद भी उन्हें निर्धारित समय पर आपूर्ति नहीं मिल रही है। पहले जहां गैस कंपनियां सात दिनों के भीतर सिलिंडर उपलब्ध कराने का दावा करती थीं, वहीं अब उपभोक्ताओं को दस से चौदह दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। कई मामलों में लोगों ने बताया कि बुकिंग के 25 दिन बाद भी सिलिंडर नहीं पहुंचा है। इससे आम लोगों में नाराजगी और चिंता दोनों बढ़ रही है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार राजधानी में रसोई गैस की आपूर्ति और मांग के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है। लंबित मांग का आंकड़ा बढ़कर लगभग एक लाख अट्ठानवे हजार से अधिक सिलिंडरों तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यही अंतर वर्तमान संकट की सबसे बड़ी वजह है। प्रतिदिन लगभग 30 हजार 359 सिलिंडरों की आवश्यकता है, जबकि औसतन केवल 28 हजार 221 सिलिंडरों की ही आपूर्ति हो पा रही है। इस अंतर के कारण प्रतिदिन लंबित मांग बढ़ती जा रही है। हाल ही में आयोजित एक समीक्षा बैठक में जिला प्रशासन ने गैस एजेंसियों से स्थिति पर चर्चा की। बैठक में एजेंसियों की ओर से कहा गया कि समस्या कुछ विशेष एजेंसियों तक सीमित है, लेकिन उपभोक्ताओं का अनुभव इससे अलग तस्वीर प्रस्तुत करता है। अधिकांश क्षेत्रों में लोगों को देरी से सिलिंडर मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। संकट की एक बड़ी वजह रविवार को गैस वितरण बंद रहना भी बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार अवकाश वाले दिन बड़ी संख्या में उपभोक्ता गैस बुकिंग कराते हैं। एक दिन में बीस हजार से अधिक बुकिंग जमा हो जाती हैं, जिससे अगले दिनों में वितरण व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। प्रशासन ने एजेंसियों को निर्देश दिया है कि अन्य दिनों में वितरण बढ़ाकर इस लंबित भार को कम किया जाए, लेकिन अब तक इसका व्यापक असर दिखाई नहीं दिया है। इधर गैस संकट के बीच कालाबाज़ारी और अवैध कारोबार की शिकायतें भी बढ़ी हैं। बताया जा रहा है कि कई होटल और भोजनालय महंगे व्यावसायिक सिलिंडरों के बजाय घरेलू रसोई गैस सिलिंडरों का उपयोग कर रहे हैं। इसके अलावा शहर के कुछ इलाकों में छोटे सिलिंडरों में अवैध रूप से गैस भरने का कारोबार भी चल रहा है। प्रशासन के अनुसार यह न केवल गैरकानूनी है, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी बेहद खतरनाक है। अधिकारियों का कहना है कि अवैध गैस कारोबार पर कार्रवाई के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। पिछले तीन महीनों में 28 विशेष जांच दलों ने छापेमारी कर 29 प्राथमिकी दर्ज की हैं और 201 गैस सिलिंडर जब्त किए गए हैं। इसके बावजूद समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी है। राजधानी की 136 गैस एजेंसियों में से 12 को संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है, जहां विशेष निगरानी और पुलिस की तैनाती की गई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि समय पर गैस उपलब्ध नहीं होने से घरेलू बजट और दैनिक जीवन दोनों प्रभावित हो रहे हैं। कई परिवारों को वैकल्पिक ईंधन का सहारा लेना पड़ रहा है। खासकर महिलाओं और बुजुर्गों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या के समाधान के लिए आपूर्ति क्षमता बढ़ाने, वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने और कालाबाज़ारी पर सख्ती से रोक लगाने की आवश्यकता है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि स्थिति को सामान्य बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि फिलहाल राजधानी के हजारों उपभोक्ता समय पर गैस सिलिंडर मिलने का इंतजार कर रहे हैं और संकट से जल्द राहत की उम्मीद लगाए हुए हैं।


