हमीरपुर में निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरा, छह मजदूरों की मौत; आंधी-तूफान के बीच मची अफरा-तफरी
- बेतवा नदी पर बन रहे 90 करोड़ रुपये के पुल पर देर रात हुआ हादसा, सात घंटे से अधिक चला राहत और बचाव अभियान
- सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण कार्यों पर उठे सवाल, मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों के लिए सहायता राशि की घोषणा की
हमीरपुर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में देर रात एक दर्दनाक हादसे ने छह मजदूरों की जान ले ली। बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल का एक बड़ा स्लैब अचानक गिर जाने से उसके नीचे मौजूद मजदूर मलबे में दब गए। हादसा रात लगभग दो बजे ललपुरा क्षेत्र में हुआ, जहां मोराकांड और कुरारा गांव के बीच दो लेन वाले पुल का निर्माण कार्य चल रहा था। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत एवं बचाव दलों को तत्काल मौके पर भेजा गया। जानकारी के अनुसार, हादसे के समय क्षेत्र में तेज आंधी और बारिश हो रही थी। मौसम विभाग के मुताबिक रात में 70 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चली थीं। इसी दौरान निर्माणाधीन पुल के स्लैब का सहारा देने वाली संरचना प्रभावित हो गई और भारी स्लैब नीचे आ गिरा। उस समय कुछ मजदूर पुल के नीचे विश्राम कर रहे थे, जबकि कुछ अन्य मजदूर ऊपर निर्माण कार्य में लगे हुए थे। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की टीमें मौके पर पहुंचीं। रात ढाई बजे से शुरू हुआ राहत और बचाव अभियान लगातार साढ़े सात घंटे तक चला। मलबे में फंसे तीन मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि छह मजदूरों की मौत हो गई। मृतकों में चार मजदूर बांदा जिले और दो हमीरपुर जिले के निवासी बताए गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुल निर्माण का कार्य दो पालियों में चल रहा था। पहली पाली के कुछ मजदूर पुल के नीचे आराम कर रहे थे, जबकि दूसरी पाली के मजदूर ऊपर कार्यरत थे। अचानक तेज आंधी शुरू हुई तो कई मजदूर सुरक्षा के लिए पुल के ढांचे के आसपास रुक गए। इसी दौरान स्लैब का हिस्सा भरभराकर नीचे गिर पड़ा और नीचे मौजूद मजदूर उसकी चपेट में आ गए। राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। लोहे के भारी पिलरों और कंक्रीट के मलबे के बीच फंसे मजदूरों को निकालने के लिए विशेष उपकरणों का उपयोग किया गया। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर मलबा हटाने का कार्य जारी रखा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई अन्य व्यक्ति उसमें फंसा न रह गया हो। हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मृतक राजेश पाल की बेटियां जब घटनास्थल पर पहुंचीं और उन्होंने अपने पिता का शव देखा तो माहौल बेहद भावुक हो गया। परिजनों ने प्रशासन से न्याय और उचित मुआवजे की मांग की है। उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम द्वारा इस पुल का निर्माण कराया जा रहा है। लगभग 90 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह पुल 700 मीटर लंबा है। इसका निर्माण कार्य मार्च 2024 में शुरू हुआ था और इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। अधिकारियों के अनुसार पुल का तकनीकी परीक्षण भी समय-समय पर कराया जा रहा था। राज्य सेतु निगम के प्रबंध निदेशक धर्मवीर सिंह ने बताया कि पुल अभी निर्माणाधीन अवस्था में था और पिलरों पर सीमेंट के स्लैब लगाए जा रहे थे। तेज आंधी और तूफान के कारण स्लैब को सहारा देने वाली व्यवस्था प्रभावित हुई, जिससे स्लैब नीचे गिर गया। उन्होंने कहा कि घटना की विस्तृत जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। हमीरपुर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष कुलदीप निषाद ने इस हादसे को गंभीर लापरवाही का परिणाम बताया है। उनका कहना है कि मौसम विभाग और जिला प्रशासन ने पहले ही आंधी और तूफान को लेकर चेतावनी जारी कर दी थी। इसके बावजूद रात में मजदूरों से काम कराया जाना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने ठेकेदार और संबंधित एजेंसियों की भूमिका की जांच की मांग की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने तथा घायलों को पचास-पचास हजार रुपये की सहायता राशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अधिकारियों को राहत कार्यों में तेजी लाने और जांच रिपोर्ट जल्द प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया है। इस दुर्घटना ने एक बार फिर बड़े निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह हादसा केवल प्राकृतिक कारणों से हुआ या इसके पीछे निर्माण संबंधी लापरवाही भी जिम्मेदार थी।


