राजस्व विभाग की बड़ी सख्ती, खराब प्रदर्शन पर अधिकारियों को मंत्री की चेतावनी

  • कटिहार, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज के राजस्व कार्यों की समीक्षा में फूटा मंत्री का गुस्सा, 15 दिन में सुधार का अल्टीमेटम
  • भ्रष्टाचार रोकने और लंबित मामलों के निष्पादन पर जोर, ऑनलाइन जमीन मापी व्यवस्था लागू करने के निर्देश

पटना। बिहार सरकार ने राजस्व और भूमि सुधार विभाग में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध कार्य संस्कृति लागू करने के लिए सख्त रुख अपना लिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने लगातार दूसरे दिन विभागीय कक्ष से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कटिहार, पूर्वी चंपारण और गोपालगंज जिले के राजस्व कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। समीक्षा बैठक के दौरान खराब रैंकिंग और लंबित मामलों को लेकर मंत्री ने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट चेतावनी दी कि अगले 15 दिनों के भीतर कार्यशैली में सुधार नहीं हुआ तो कठोर कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा। बैठक में विभाग के सचिव जय सिंह ने भी संबंधित जिलों के अधिकारियों को समय सीमा के भीतर सभी लंबित मामलों के निष्पादन का निर्देश दिया। इस समीक्षा बैठक में संबंधित जिलों के जिलाधिकारी, अपर समाहर्ता, भूमि सुधार उप समाहर्ता और अंचलाधिकारी शामिल हुए। बैठक की शुरुआत कटिहार जिले की समीक्षा से हुई, जहां मंत्री ने अप्रैल माह की रैंकिंग और कई अधिकारियों के खराब प्रदर्शन पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि जनता से जुड़े कार्यों में देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी और सभी मामलों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करना होगा। डॉ. जायसवाल ने दो टूक शब्दों में कहा कि काम में देरी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है और भ्रष्टाचार पर रोक लगाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जब विभागीय मुख्यालय पूरी ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ व्यवस्था सुधारने में जुटा है तो फील्ड स्तर पर तैनात अधिकारियों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे उसी प्रतिबद्धता के साथ काम करें। मंत्री ने यह भी कहा कि आम लोगों का भरोसा दोबारा कायम करना विभाग की सबसे बड़ी चुनौती है और यह केवल पारदर्शी एवं समय पर कार्य निष्पादन से ही संभव है। समीक्षा बैठक के दौरान ऑनलाइन दाखिल-खारिज, परिमार्जन प्लस, ई-मापी, अभियान बसेरा, सरकारी भूमि सत्यापन, राजस्व महाअभियान, जन शिकायत, सहयोग शिविर, किसान पंजीकरण और विभिन्न न्यायालयों में लंबित मामलों की क्रमवार समीक्षा की गई। मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि लंबे समय से लंबित मामलों का तुरंत निष्पादन किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अब भी किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ई-मापी व्यवस्था को लेकर मंत्री ने विशेष सख्ती दिखाई। उन्होंने कहा कि जमीन की मापी से संबंधित हर कार्य अब केवल ऑनलाइन माध्यम से ही किया जाएगा। यदि कोई अधिकारी ऑफलाइन तरीके से काम करते पाया गया तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। इसके साथ ही जिलाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया कि सभी अधिकारी मुख्यालय में उपस्थित रहें और स्थानीय स्तर पर अंचलाधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। बैठक में तीनों जिलों की रैंकिंग पर भी चिंता व्यक्त की गई। मंत्री ने कहा कि कटिहार की रैंकिंग 23वें, पूर्वी चंपारण की 25वें और गोपालगंज की 16वें स्थान पर है, जबकि लक्ष्य सभी जिलों को शीर्ष दस में पहुंचाना है। गोपालगंज जिले के थावे अंचल की पहली रैंक और बिजयीपुर अंचल की 485वीं रैंक के बीच भारी अंतर पर भी मंत्री ने सवाल उठाए। उन्होंने जिलाधिकारी से पूछा कि जब एक अंचल बेहतर कार्य कर सकता है तो दूसरा क्यों नहीं। पूर्वी चंपारण जैसे बड़े जिले में किसान पंजीकरण बढ़ाने के लिए परिमार्जन से जुड़े आवेदनों के समयबद्ध निष्पादन का निर्देश दिया गया। मंत्री ने कहा कि राजस्व विभाग की पूरी व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी और जनता के प्रति जवाबदेह बनाना सरकार का उद्देश्य है। उन्होंने बताया कि भ्रष्टाचार पर निगरानी के लिए आर्थिक अपराध इकाई का विशेष प्रकोष्ठ गठित किया गया है और विभाग के करीब पौने दो सौ अधिकारी उसकी निगरानी में हैं। समीक्षा बैठक में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी भागीदारी रही। कटिहार की समीक्षा में विधायक दुलाल चंद गोस्वामी, संगीता देवी और निशा सिंह मौजूद रहीं। पूर्वी चंपारण की बैठक में विधायक सचिन्द्र प्रसाद सिंह, बबलू गुप्ता, राणा रणधीर और श्याम बाबू यादव शामिल हुए, जबकि गोपालगंज की समीक्षा में विधायक मंजीत कुमार सिंह उपस्थित रहे। राजस्व मुख्यालय में आयोजित इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों का मानना है कि सरकार की यह सख्ती आने वाले समय में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव ला सकती है। वहीं आम लोगों को उम्मीद है कि इससे जमीन और राजस्व से जुड़े मामलों के निष्पादन में तेजी आएगी तथा भ्रष्टाचार और देरी जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।

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