कोरोना काल में बंद पैसेंजर ट्रेनों को फिर शुरू करने की तैयारी, यात्रियों को जल्द मिल सकती है राहत

  • मोतिहारी, बेतिया और नरकटियागंज रूट पर यात्रियों की बढ़ी परेशानी, रात में ट्रेन नहीं होने से स्टेशन पर काटनी पड़ रही रात
  • मजदूरों और दैनिक यात्रियों के लिए अहम थीं फास्ट पैसेंजर ट्रेनें, रेलवे पर बढ़ा दोबारा परिचालन शुरू करने का दबाव

पटना। कोरोना महामारी के दौरान बंद की गई पैसेंजर ट्रेनों को एक बार फिर से शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है। लंबे समय से इन ट्रेनों के बंद रहने के कारण यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर उत्तर बिहार के मोतिहारी, बेतिया, नरकटियागंज और गोरखपुर रूट पर यात्रा करने वाले लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। रेलवे सूत्रों के अनुसार यात्रियों की लगातार बढ़ती मांग और भीड़ को देखते हुए अब इन ट्रेनों को दोबारा शुरू करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। कोरोना काल में कई पैसेंजर ट्रेनों का परिचालन बंद कर दिया गया था। उस समय संक्रमण को रोकने और भीड़ कम करने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया था। हालांकि महामारी खत्म होने के बाद भी कई ट्रेनें अब तक पटरी पर नहीं लौट सकी हैं। इसका सबसे अधिक असर उन यात्रियों पर पड़ा है जो रोजाना नौकरी, व्यापार या मजदूरी के सिलसिले में यात्रा करते हैं। मुजफ्फरपुर से हावड़ा जाने वाली तेज पैसेंजर ट्रेन पहले सुबह सात बजे चलती थी। यह ट्रेन मजदूरों और छोटे व्यापारियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती थी। बड़ी संख्या में लोग इसी ट्रेन से पश्चिम बंगाल के हावड़ा और आसपास के क्षेत्रों में काम के लिए जाते थे। कोरोना काल में यह ट्रेन बंद कर दी गई और उसके बाद से दोबारा शुरू नहीं हो सकी। इस ट्रेन के बंद होने से अब मिथिला एक्सप्रेस पर यात्रियों का दबाव काफी बढ़ गया है। स्थिति यह है कि सामान्य श्रेणी के डिब्बों में अत्यधिक भीड़ रहती है। यात्रियों को सीट तो दूर, खड़े होकर भी यात्रा करना मुश्किल हो जाता है। रोजाना बड़ी संख्या में मजदूर और आम यात्री भारी परेशानी के बीच सफर करने को मजबूर हैं। इसी तरह मुजफ्फरपुर से गोरखपुर तक चलने वाली तेज पैसेंजर ट्रेन भी कोरोना काल में बंद कर दी गई थी। यह ट्रेन व्यापारी वर्ग और दैनिक यात्रियों के लिए जीवनरेखा मानी जाती थी। दिल्ली, मुंबई और सूरत जैसे शहरों से लौटने वाले यात्री रात में मुजफ्फरपुर पहुंचने के बाद इसी ट्रेन से मोतिहारी, बेतिया और नरकटियागंज की ओर आगे बढ़ते थे। ट्रेन बंद होने के बाद अब यात्रियों को पूरी रात मुजफ्फरपुर जंक्शन पर इंतजार करना पड़ता है। उन्हें सुबह साढ़े सात बजे चलने वाली मुजफ्फरपुर-नरकटियागंज पैसेंजर ट्रेन का इंतजार करना पड़ता है। इससे महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई बार स्टेशन पर रात गुजारना यात्रियों के लिए असुरक्षित और थकाऊ साबित होता है। रात साढ़े दस बजे चलने वाली नरकटियागंज पैसेंजर ट्रेन भी कोरोना काल में बंद कर दी गई थी। इस ट्रेन के बंद होने से देर रात आने वाले यात्रियों की परेशानियां और बढ़ गई हैं। अब कई लोगों को मजबूरी में सड़क मार्ग का सहारा लेना पड़ रहा है। बसों में अधिक किराया और लंबी दूरी की यात्रा यात्रियों के लिए अतिरिक्त बोझ बन गई है। रेलवे सूत्रों के अनुसार गोरखपुर मंडल की ओर से गोरखपुर से नरकटियागंज के बीच चार जोड़ी पैसेंजर ट्रेनें चलाई जा रही हैं। हालांकि इनकी कनेक्टिविटी मुजफ्फरपुर तक नहीं होने के कारण मोतिहारी और बेतिया के यात्रियों को पर्याप्त सुविधा नहीं मिल पा रही है। यात्रियों का कहना है कि अगर पहले की तरह सीधी ट्रेन सेवा बहाल कर दी जाए तो उन्हें काफी राहत मिल सकती है। व्यापारी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं ने भी रेलवे से बंद ट्रेनों को जल्द शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि इन ट्रेनों के बंद रहने से छोटे व्यापारियों और मजदूर वर्ग पर सबसे अधिक असर पड़ा है। रोजाना यात्रा करने वाले लोगों का समय और पैसा दोनों अधिक खर्च हो रहा है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यात्रियों की मांग और वर्तमान यात्री भार का आकलन किया जा रहा है। जिन रूटों पर यात्रियों की संख्या अधिक है, वहां ट्रेनों को दोबारा शुरू करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार परिचालन से जुड़ी तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद निर्णय लिया जाएगा। उत्तर बिहार के यात्रियों को अब उम्मीद है कि जल्द ही बंद पड़ी पैसेंजर ट्रेनें फिर से पटरी पर लौटेंगी। यदि ऐसा होता है तो लाखों यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी और लंबे समय से चली आ रही यात्रा संबंधी परेशानियां काफी हद तक कम हो सकेंगी।