August 19, 2026

पटना में बनेगा आधुनिक स्ट्रीट फूड हब, बिहार के पारंपरिक व्यंजनों को मिलेगी नई पहचान

  • चंपारण मटन, लिट्टी-चोखा, खाजा और ठेकुआ जैसे व्यंजनों के लिए विकसित होंगे विशेष वेंडिंग जोन
  • प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत चार करोड़ रुपये की लागत से तैयार होगी परियोजना

पटना। बिहार की राजधानी पटना में जल्द ही आधुनिक सुविधाओं से युक्त स्ट्रीट फूड हब विकसित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य बिहार के पारंपरिक व्यंजनों को नई पहचान दिलाने के साथ-साथ शहर की स्ट्रीट फूड संस्कृति को व्यवस्थित और आधुनिक स्वरूप प्रदान करना है। पटना नगर निगम ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर शहरी विकास एवं आवास विभाग को भेज दिया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के अंतर्गत इसका निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। नगर निगम द्वारा तैयार योजना के अनुसार शहर में तीन प्रमुख स्थानों पर स्ट्रीट फूड हब विकसित किए जाएंगे। इनमें जेपी गंगा पथ स्थित दीघा गोलंबर, कोतवाली क्षेत्र की खटाल गली और मीठापुर स्थित निर्माणाधीन साझा सेवा केंद्र परिसर को चयनित किया गया है। इन परियोजनाओं पर लगभग चार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। अधिकारियों का कहना है कि इन फूड हब का निर्माण इंदौर की तर्ज पर किया जाएगा, जहां स्थानीय व्यंजनों को आधुनिक और स्वच्छ वातावरण में लोगों तक पहुंचाया जाता है। इस योजना के तहत सड़क किनारे अनियमित रूप से लगने वाली खाद्य दुकानों को व्यवस्थित कर विशेष ऑफ-स्ट्रीट वेंडिंग जोन में स्थानांतरित किया जाएगा। इससे यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और लोगों को सुरक्षित तथा स्वच्छ वातावरण में भोजन उपलब्ध हो सकेगा। नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार इस परियोजना में किसी प्रकार का स्थायी निर्माण नहीं किया जाएगा। इसके बजाय आधुनिक अस्थायी संरचनाओं के माध्यम से खाद्य विक्रेताओं के लिए सुव्यवस्थित व्यवस्था तैयार की जाएगी। फूड हब में भोजन तैयार करने, बेचने और खाद्य सामग्री के सुरक्षित भंडारण की समुचित व्यवस्था होगी। इसके अलावा आम लोगों के बैठने के लिए आकर्षक और आरामदायक स्थान बनाए जाएंगे। परिसर में स्वच्छ शौचालय, शुद्ध पेयजल, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, हरित सजावट, पार्किंग और नियमित साफ-सफाई जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। नगर निगम का मानना है कि इससे लोगों को एक आधुनिक और पारिवारिक वातावरण मिलेगा, जहां वे बिहार के पारंपरिक स्वाद का आनंद ले सकेंगे। इस योजना की सबसे खास बात बिहार के स्थानीय व्यंजनों को बढ़ावा देना है। आमतौर पर बिहार की पहचान लिट्टी-चोखा, चंपारण मटन, मखाना, खाजा और ठेकुआ जैसे पारंपरिक व्यंजनों से होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने योजना में यह अनिवार्य प्रावधान किया है कि स्ट्रीट फूड हब की कम-से-कम 50 प्रतिशत दुकानों में बिहार के मूल व्यंजन, पारंपरिक मिठाइयां और स्थानीय नाश्ते उपलब्ध कराए जाएंगे। इसका उद्देश्य बिहार की खानपान संस्कृति को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान दिलाना है। योजना के अंतर्गत चयनित खाद्य विक्रेताओं को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के विशेषज्ञों द्वारा विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा, स्वच्छता, गुणवत्ता नियंत्रण, साफ-सुथरे तरीके से भोजन तैयार करने और ग्राहकों को बेहतर सेवा देने जैसे विषयों पर जानकारी दी जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि इससे स्ट्रीट फूड की गुणवत्ता और विश्वसनीयता दोनों में सुधार आएगा तथा लोगों का भरोसा बढ़ेगा। शहरी विकास एवं आवास विभाग ने राज्य के विभिन्न नगर निकायों से इस प्रकार की परियोजनाओं के प्रस्ताव मांगे हैं। विभाग द्वारा चयनित प्रस्तावों को केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद संबंधित नगर निकाय को प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। नगर निगम अधिकारियों के अनुसार यह योजना न केवल शहर की सुंदरता और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाएगी, बल्कि हजारों छोटे खाद्य विक्रेताओं को रोजगार का स्थायी और सुरक्षित अवसर भी प्रदान करेगी। साथ ही बिहार की समृद्ध खानपान परंपरा को संगठित रूप से आगे बढ़ाने में भी यह योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। राजधानी पटना में प्रस्तावित यह स्ट्रीट फूड हब आने वाले समय में स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है। लोगों को उम्मीद है कि इससे बिहार के पारंपरिक व्यंजनों को एक नया मंच मिलेगा और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूती मिलेगी।

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