मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत डेढ़ लाख छात्राओं को मिलेगा 50 हजार रुपये का प्रोत्साहन
- स्नातक उत्तीर्ण छात्राओं का विवरण 15 मई तक पोर्टल पर अपलोड करने का निर्देश
- उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालयों को दी चेतावनी, लापरवाही से लाभ वितरण में हो सकती है देरी
पटना। बिहार सरकार ने राज्य की स्नातक उत्तीर्ण छात्राओं के लिए बड़ी राहत और प्रोत्साहन की घोषणा की है। मुख्यमंत्री कन्या उत्थान योजना के तहत राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों से स्नातक परीक्षा पास कर चुकी डेढ़ लाख से अधिक छात्राओं को 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग ने इस योजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया को तेज करते हुए सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश जारी किया है कि पात्र छात्राओं का पूरा विवरण निर्धारित पोर्टल पर समय सीमा के भीतर अपलोड किया जाए, ताकि उन्हें समय पर आर्थिक सहायता मिल सके। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार दिसंबर 2025 तक स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाली छात्राओं का डेटा 15 मई तक पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी विश्वविद्यालय द्वारा डेटा अपलोड करने में लापरवाही बरती जाती है तो छात्राओं को योजना का लाभ मिलने में देरी हो सकती है। इसे देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को विशेष सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने को कहा गया है। इस संबंध में उच्च शिक्षा निदेशक प्रोफेसर एन.के. अग्रवाल ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों और परीक्षा नियंत्रकों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि केवल वर्तमान सत्र की छात्राओं का ही नहीं, बल्कि पूर्व में छूटे हुए परिणामों और सरकार से मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों का विवरण भी पोर्टल पर जोड़ा जाए। इससे वे छात्राएं भी योजना का लाभ प्राप्त कर सकेंगी जो किसी तकनीकी या प्रशासनिक कारण से पहले इस योजना से वंचित रह गई थीं। मुख्यमंत्री बालिका स्नातक प्रोत्साहन योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करना और उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करना है। बिहार सरकार का मानना है कि यदि लड़कियों की शिक्षा को मजबूत किया जाए तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। यही कारण है कि सरकार लगातार छात्राओं के लिए विभिन्न प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है। 50 हजार रुपये की यह सहायता राशि छात्राओं को आगे की पढ़ाई, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में सहयोग देगी। सरकार की इस योजना के दायरे में राज्य के कुल 17 विश्वविद्यालय शामिल हैं। इनमें बीएन मंडल विश्वविद्यालय, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, जयप्रकाश विश्वविद्यालय, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, मुंगेर विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना विश्वविद्यालय, पूर्णिया विश्वविद्यालय, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, मगध विश्वविद्यालय, मौलाना मजहरुल हक अरबी एवं फारसी विश्वविद्यालय, नालंदा खुला विश्वविद्यालय, आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय और चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान शामिल हैं। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस योजना के माध्यम से बड़ी संख्या में छात्राओं को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। खासकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के लिए यह योजना बेहद लाभकारी मानी जा रही है। अक्सर देखा जाता है कि आर्थिक तंगी के कारण कई छात्राएं स्नातक के बाद अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पातीं। ऐसे में यह प्रोत्साहन राशि उन्हें आगे बढ़ने और अपने लक्ष्य हासिल करने में मदद करेगी। शिक्षा विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस तरह की योजनाएं लड़कियों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करती हैं और समाज में लैंगिक समानता को मजबूत करती हैं। बिहार में पिछले कुछ वर्षों के दौरान छात्राओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं, जिनका सकारात्मक असर भी देखने को मिला है। विद्यालय स्तर से लेकर उच्च शिक्षा तक छात्राओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। सरकार की इस पहल को लेकर छात्राओं और अभिभावकों में उत्साह का माहौल है। कई छात्राओं का कहना है कि यह सहायता राशि उनके सपनों को नई दिशा दे सकती है। कोई प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करना चाहती है तो कोई उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहर जाने की योजना बना रही है। ऐसे में यह आर्थिक सहयोग उनके लिए महत्वपूर्ण साबित होगा। उच्च शिक्षा विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों से समय पर प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है ताकि योजना का लाभ बिना किसी देरी के पात्र छात्राओं तक पहुंच सके। सरकार का लक्ष्य है कि शिक्षा के क्षेत्र में बेटियों को मजबूत बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया जाए।


