गिरिराज सिंह का तेजस्वी पर पलटवार, कहा- लाल की पाठशाला अगर ठीक होती तो, आज बीजेपी में नहीं होते सम्राट

  • फ्लोर टेस्ट के दौरान मुख्यमंत्री का तेजस्वी यादव पर तीखा हमला, सत्ता को बताया जनादेश का परिणाम
  • गिरिराज सिंह का पलटवार, लालू यादव की राजनीति पर उठाए सवाल, एनडीए सरकार की उपलब्धियां गिनाईं

पटना। बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। हाल ही में विधानसभा में हुए शक्ति परीक्षण के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। इस दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला तेज हो गया। वहीं केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी इस विवाद में कूदते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। विधानसभा में शक्ति परीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता किसी की बपौती नहीं होती, बल्कि यह जनता के जनादेश से तय होती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कोई भी नेता किसी की राजनीतिक पाठशाला से नहीं आता, बल्कि अपनी मेहनत और संघर्ष के दम पर आगे बढ़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनके साथ पहले अन्याय नहीं हुआ होता, तो शायद वे आज इस पद तक नहीं पहुंचते। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी स्वीकार किया कि नीतीश कुमार की इच्छा थी कि वे बिहार के मुख्यमंत्री बनें। उन्होंने इसे अपने लिए सम्मान की बात बताते हुए कहा कि पिछले दो दशकों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार ने राज्य में विकास और सुशासन की दिशा में कई महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। उन्होंने किसानों, महिलाओं और आम लोगों के हित में किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। इस बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी तेजस्वी यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सम्राट चौधरी भारतीय जनता पार्टी के नेता हैं और यदि विपक्ष की राजनीति इतनी मजबूत होती, तो उन्हें वहां से अलग होने की जरूरत ही नहीं पड़ती। गिरिराज सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि जब किसी राजनीतिक दल में परिवारवाद हावी हो जाता है, तो अन्य नेताओं के लिए वहां स्थान कम हो जाता है, जिससे वे अलग रास्ता चुनते हैं। गिरिराज सिंह ने लालू प्रसाद यादव पर भी अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि यदि उनकी राजनीतिक प्रणाली बेहतर होती, तो अन्य नेताओं को वहां से जाने की जरूरत नहीं पड़ती। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार आधारित राजनीति लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है और इससे संगठन की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयानबाजी केवल व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे आगामी राजनीतिक रणनीतियां भी छिपी हैं। बिहार की राजनीति में इन दिनों सत्ता और विपक्ष के बीच लगातार टकराव की स्थिति बनी हुई है, जिसमें दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं। विधानसभा में हुई इस बहस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में बिहार की राजनीति और अधिक गर्माने वाली है। एक ओर सत्तारूढ़ गठबंधन अपनी उपलब्धियों को जनता के सामने रखने की कोशिश कर रहा है, वहीं विपक्ष सरकार की नीतियों और निर्णयों पर सवाल उठाकर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटा हुआ है। इस पूरे घटनाक्रम के बीच यह भी साफ है कि राज्य की राजनीति में व्यक्तित्व आधारित टकराव और वैचारिक मतभेद दोनों ही समान रूप से प्रभावी हो रहे हैं। सत्ता पक्ष जहां विकास और सुशासन को अपना मुख्य एजेंडा बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे चुनौती देने के लिए लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए है। विधानसभा में हुई यह तीखी बहस बिहार की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों का आईना है, जहां हर बयान और प्रतिक्रिया के पीछे व्यापक राजनीतिक संदेश छिपा हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सियासी तकरार किस दिशा में आगे बढ़ती है और इसका असर राज्य की राजनीति पर किस रूप में पड़ता है।

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