पटना समेत सात टाउनशिप क्षेत्रों में जमीन खरीद-बिक्री पर रोक, बिहार में 11 नए आधुनिक शहर बसाने की तैयारी

  • मास्टर प्लान 2031 के तहत बड़ा फैसला, 30 मार्च 2027 तक रजिस्ट्री और निर्माण पर प्रतिबंध
  • पुनपुन में ‘पाटलिपुत्र’ सहित कई योजनाबद्ध शहर विकसित होंगे, रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा

पटना। बिहार में शहरी विकास को नई दिशा देने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। राजधानी पटना समेत सात प्रस्तावित टाउनशिप क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री और निर्माण कार्यों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। यह निर्णय राज्य में 11 नए आधुनिक सेटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना के तहत लिया गया है। यह फैसला 22 अप्रैल को हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया, जिसमें राज्य के शहरी ढांचे को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक योजना पर मुहर लगाई गई। नगर विकास विभाग को इन टाउनशिप क्षेत्रों के लिए विस्तृत मास्टर प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस योजना के तहत कोर एरिया, विशेष क्षेत्र और भूमि उपयोग को वैज्ञानिक तरीके से निर्धारित किया जाएगा। सरकार के अनुसार, यह प्रतिबंध 30 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगा। इसका उद्देश्य अनियोजित निर्माण को रोकना और योजनाबद्ध तरीके से शहरों का विकास सुनिश्चित करना है। पटना के अलावा सोनपुर, गया, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया और मुंगेर में प्रस्तावित टाउनशिप क्षेत्रों में यह रोक लागू की गई है। पटना जिले के पुनपुन क्षेत्र में ‘पाटलिपुत्र’ नाम से एक विशाल टाउनशिप विकसित की जाएगी। यह टाउनशिप लगभग 81 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैली होगी और करीब 275 राजस्व गांवों को कवर करेगी। इसका कोर एरिया लगभग 1010 एकड़ निर्धारित किया गया है, जबकि विशेष क्षेत्र 81,730 एकड़ होगा। यह क्षेत्र पटना जंक्शन से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा, जिससे इसकी कनेक्टिविटी भी बेहतर रहेगी। इसी तरह सारण जिले के सोनपुर में बनने वाली टाउनशिप सोनपुर, दरियापुर, परसा और दिघवारा प्रखंडों में फैलेगी। इसका कोर एरिया लगभग 2000 एकड़ और विशेष क्षेत्र करीब 33 हजार एकड़ होगा। वहीं गया में ‘मगध टाउनशिप’ का विकास बोधगया, गया नगर और परैया प्रखंडों में किया जाएगा, जिसका कोर एरिया 1629 एकड़ और विशेष क्षेत्र 22,200 एकड़ निर्धारित किया गया है। सरकार का लक्ष्य इन टाउनशिप को देश के बड़े शहरों की तर्ज पर विकसित करना है। यहां सुनियोजित कॉलोनियां, चौड़ी सड़कें, निर्धारित बाजार क्षेत्र, हरित पार्क और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इन शहरों में आवासीय, व्यावसायिक और हरित क्षेत्रों का स्पष्ट विभाजन किया जाएगा, जिससे संतुलित और व्यवस्थित विकास सुनिश्चित हो सके। यह योजना मास्टर प्लान 2031 के अंतर्गत लागू की जा रही है, जिसके तहत जोनल प्लान तैयार कर विभिन्न क्षेत्रों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा। इससे भविष्य में अनियोजित विस्तार और अव्यवस्थित निर्माण को रोका जा सकेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की सेटेलाइट टाउनशिप बड़े शहरों के आसपास विकसित किए जाने वाले योजनाबद्ध शहर होते हैं, जैसे नवी मुंबई। इन शहरों में बेहतर कनेक्टिविटी, सुव्यवस्थित सेक्टर, हरित क्षेत्र और आधुनिक बुनियादी ढांचा होता है। बिहार में प्रस्तावित टाउनशिप भी इसी मॉडल पर विकसित की जाएंगी। सरकार का मानना है कि इन योजनाबद्ध शहरों के निर्माण से राज्य में नए आर्थिक केंद्र विकसित होंगे, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही बड़े शहरों पर बढ़ते जनसंख्या दबाव को कम करने में भी मदद मिलेगी। बिहार सरकार की यह पहल राज्य के शहरी विकास को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। यदि यह योजना सफलतापूर्वक लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में बिहार के शहरी स्वरूप में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है और नागरिकों को बेहतर जीवन सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

You may have missed