September 19, 2026

सड़क हादसों में जीवन बचाने को बिहार सरकार का बड़ा कदम, गोल्डन आवर में मिलेगा मुफ्त इलाज

  • आपातकालीन ट्रॉमा सेंटरों में 1.5 लाख रुपये तक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा लागू
  • यातायात प्रबंधन सुधारने के लिए अत्याधुनिक प्रणाली और चालक प्रशिक्षण पर जोर

पटना। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित परिवहन विभाग की समीक्षा बैठक में बिहार सरकार ने सड़क सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। इन फैसलों का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में जान-माल के नुकसान को कम करना और राज्य की यातायात व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित बनाना है। सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को आम लोगों की सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक प्रयास माना जा रहा है। बैठक में सबसे अहम निर्णय यह लिया गया कि सड़क दुर्घटना के बाद “गोल्डन आवर” यानी दुर्घटना के बाद के शुरुआती एक घंटे के भीतर सभी घायलों को आपातकालीन ट्रॉमा सेंटरों में 1.5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी घायल व्यक्ति का इलाज केवल पैसे की कमी के कारण बाधित न हो। यह सुविधा राज्य के सभी प्रमुख और चिन्हित अस्पतालों में लागू की जाएगी। सरकार ने यह स्वीकार किया है कि सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु का एक बड़ा कारण समय पर उपचार का अभाव होता है। ऐसे में इस नकदरहित चिकित्सा सुविधा के माध्यम से घायलों को तुरंत उपचार मिल सकेगा, जिससे गंभीर मामलों में जीवन बचाने की संभावना बढ़ेगी। यह पहल विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी होगी, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और तत्काल इलाज का खर्च वहन करने में असमर्थ होते हैं। इसके साथ ही, राज्य में बढ़ते यातायात दबाव और सड़क दुर्घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए भी व्यापक योजना बनाई गई है। राजधानी पटना सहित राज्य के प्रमुख शहरों में समेकित यातायात प्रबंधन प्रणाली को सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत लागू किया जाएगा। इस प्रणाली के अंतर्गत अत्याधुनिक कैमरों और तकनीकी साधनों की मदद से यातायात की निगरानी की जाएगी तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त नजर रखी जाएगी। इससे यातायात अनुशासन में सुधार और दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि सड़क दुर्घटनाओं को दो श्रेणियों, सामान्य और गंभीर, में बांटकर उनके कारणों का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि दुर्घटनाएं किन कारणों से बार-बार हो रही हैं और उन्हें रोकने के लिए कौन से उपाय प्रभावी हो सकते हैं। इस प्रक्रिया से भविष्य में बेहतर नीतियां बनाने में सहायता मिलेगी। इसके अलावा, चालकों के प्रशिक्षण को भी प्राथमिकता दी गई है। एक मई से चालक प्रशिक्षण से संबंधित नई व्यवस्था लागू की जाएगी। प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले चालकों को 200 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, ताकि अधिक से अधिक लोग इस प्रक्रिया में शामिल हों। वहीं भारी मोटर वाहन चालकों के लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं कि यदि वे तीन बार बुलाए जाने के बावजूद प्रशिक्षण में भाग नहीं लेते हैं, तो उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। राज्य सरकार एक जिला-वार चालक ट्रैकिंग प्रणाली भी विकसित कर रही है, जिसके तहत प्रशिक्षित चालकों का पूरा विवरण एक केंद्रीकृत डाटाबेस में रखा जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सड़कों पर प्रशिक्षित और जिम्मेदार चालक ही वाहन चला रहे हैं। बिहार सरकार द्वारा उठाए गए ये कदम सड़क सुरक्षा और यातायात व्यवस्था में सुधार के लिए एक समग्र रणनीति का हिस्सा हैं। यदि इन योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो राज्य में सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आने और लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है।

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