पटना में आवारा कुत्तों पर नियंत्रण के लिए नगर निगम का व्यापक अभियान, नागरिक सुरक्षा पर फोकस

  • छह माह में 7,333 कुत्तों की नसबंदी और रेबीज टीकाकरण, वैज्ञानिक पद्धति से हो रहा प्रबंधन
  • डॉग फीडिंग जोन और शेल्टर योजना से स्वच्छता व व्यवस्था सुधारने की पहल

पटना। शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या और रेबीज संक्रमण के खतरे को देखते हुए पटना नगर निगम ने अपने अभियान को और व्यापक रूप देते हुए इसे सार्वजनिक उपयोग आधारित मॉडल के रूप में विकसित करना शुरू कर दिया है। यह पहल केवल पशु नियंत्रण तक सीमित नहीं है, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा, स्वच्छता और शहरी व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नगर निगम द्वारा पिछले छह महीनों में 7,333 आवारा कुत्तों की नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण किया गया है। यह अभियान राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के मानकों के अनुरूप संचालित किया जा रहा है, जिसके तहत कम से कम 70 प्रतिशत कुत्तों का टीकाकरण आवश्यक होता है। इस प्रक्रिया से शहर में रेबीज संक्रमण के खतरे को कम करने के साथ-साथ कुत्ता काटने की घटनाओं पर भी नियंत्रण पाने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस अभियान को प्राथमिकता दी जा रही है। इस अभियान को नागरिकों के लिए अधिक उपयोगी और सुलभ बनाने के उद्देश्य से नगर निगम ने इसे एक सेवा के रूप में विकसित किया है। इसके तहत नियंत्रण कक्ष, निःशुल्क दूरभाष सहायता सेवा और संदेश अनुप्रयोग जैसे माध्यमों के जरिए नागरिक अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। अब तक कुल 366 शिकायतों का समाधान किया जा चुका है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि लोग इस व्यवस्था का लाभ उठा रहे हैं। शहर में अनियंत्रित रूप से कुत्तों को भोजन कराने और इसके कारण फैलने वाली गंदगी को देखते हुए नगर निगम ने प्रत्येक वार्ड में निर्धारित डॉग फीडिंग जोन बनाने की योजना भी तैयार की है। इन निर्धारित स्थानों के बनने से सड़कों और गलियों में गंदगी कम होगी और कुत्तों का जमावड़ा नियंत्रित रहेगा। इससे आम नागरिकों को आवागमन में होने वाली परेशानियों से राहत मिलने की संभावना है। साथ ही पशु प्रेमियों को भी एक सुरक्षित और व्यवस्थित स्थान उपलब्ध होगा, जहां वे बिना किसी अव्यवस्था के कुत्तों को भोजन दे सकेंगे। इस योजना के तहत रामचक बैरिया क्षेत्र में एक बड़े डॉग शेल्टर के निर्माण का प्रस्ताव भी रखा गया है। लगभग 1.29 एकड़ क्षेत्र में बनने वाले इस शेल्टर में करीब 2,000 कुत्तों को रखने की क्षमता होगी। यह शेल्टर शहर में आवारा कुत्तों के प्रबंधन को स्थायी आधार प्रदान करेगा और विभिन्न सार्वजनिक स्थानों जैसे सरकारी अस्पताल, पुलिस थाना, न्यायालय परिसर और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों से कुत्तों की समस्या को नियंत्रित करने में सहायक होगा। इस शेल्टर में बीमार और आक्रामक कुत्तों के उपचार की भी व्यवस्था होगी, जिससे शहर में सुरक्षा स्तर को और बेहतर बनाया जा सकेगा। नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि यह पहल केवल कुत्तों को हटाने का प्रयास नहीं है, बल्कि उनके वैज्ञानिक प्रबंधन की दिशा में एक संगठित कदम है। कुत्तों को पकड़ने के बाद उनकी नसबंदी, रेबीज टीकाकरण, कृमिनाशक उपचार और स्वास्थ्य जांच की जाती है। उपचार पूर्ण होने के बाद उन्हें उनके मूल स्थान पर ही छोड़ दिया जाता है। यह प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है, जिससे कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करने के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन भी बनाए रखा जाता है। नगर निगम ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस अभियान का उद्देश्य शहर में मानवीय और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समस्या का समाधान करना है। इससे न केवल नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि शहर की स्वच्छता और सुव्यवस्थित जीवनशैली को भी बढ़ावा मिलेगा। पटना नगर निगम का यह अभियान शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो आने वाले समय में शहरवासियों को सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण मिल सकेगा।