बिहार में जल्द शुरू होगी फिजिकल और म्यूजिक टीचरों की बहाली, शिक्षा मंत्री ने सदन में की घोषणा
पटना। बिहार विधानसभा में मंगलवार को हंगामे और नारेबाजी के बीच एक अहम मुद्दे पर चर्चा हुई। सदन में शारीरिक शिक्षा और संगीत शिक्षकों की कमी का सवाल उठा, जिस पर शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट संकेत दिया कि राज्य में जल्द ही फिजिकल और म्यूजिक टीचरों की बहाली की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। शिक्षा मंत्री की इस घोषणा से उन हजारों स्कूलों और अभ्यर्थियों में उम्मीद जगी है, जहां वर्षों से इन विषयों के शिक्षक नहीं हैं।
विधानसभा में उठा शारीरिक शिक्षकों का मुद्दा
बजट सत्र के दौरान रामगढ़ से बसपा विधायक सतीश कुमार सिंह यादव ने सदन में शारीरिक शिक्षकों की बहाली का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से पहले जो जवाब मिला था, उससे वे संतुष्ट नहीं हैं। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष की अनुमति से उन्होंने पूरक प्रश्न किया और आंकड़ों के साथ सरकार को घेरने की कोशिश की। विधायक ने बताया कि प्रावधानों के अनुसार राज्य के सभी स्कूलों में शारीरिक शिक्षक की नियुक्ति होनी चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। बिहार में 38 हजार से अधिक सरकारी स्कूल हैं, जबकि अब तक केवल करीब 2350 शारीरिक शिक्षकों की ही बहाली हो सकी है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सरकार द्वारा जारी ताजा विज्ञापन में महज 239 नए शारीरिक शिक्षकों की बहाली का प्रावधान है, जो स्कूलों की संख्या के हिसाब से बेहद कम है।
सरकार से पूछा गया सीधा सवाल
विधायक सतीश कुमार सिंह यादव ने सदन में यह जानना चाहा कि जब स्कूलों की संख्या इतनी अधिक है, तो आखिर कब तक सभी स्कूलों में शारीरिक शिक्षकों की बहाली पूरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि खेल और शारीरिक शिक्षा बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए जरूरी है, लेकिन शिक्षक नहीं होने से यह विषय सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गया है।
शिक्षा मंत्री का जवाब
सरकार की ओर से शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सदन में स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि बिहार लोक सेवा आयोग के तहत शिक्षक भर्ती परीक्षा यानी टीआरई तीन में विषयवार ढाई लाख से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा टीआरई चार की प्रक्रिया भी जल्द पूरी होने जा रही है, जिसमें 30 हजार से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं की विषयवार नियुक्ति की जाएगी। शिक्षा मंत्री ने स्वीकार किया कि यह बात सही है कि राज्य में खेल और संगीत जैसे विषयों के शिक्षकों की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि टीआरई चार के बाद सरकार पूरे परिदृश्य का आकलन करेगी और यह देखा जाएगा कि किन विषयों में सबसे ज्यादा कमी है।
फिजिकल और म्यूजिक टीचरों पर गंभीरता
मंत्री ने सदन में यह भी कहा कि फिलहाल कुछ ऐसे विषय हैं, जिनमें शिक्षकों की तत्काल आवश्यकता है। इसी कारण प्राथमिकता के आधार पर विषयवार बहाली की जा रही है। हालांकि उन्होंने यह भरोसा भी दिलाया कि फिजिकल और म्यूजिक जैसे विषयों को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और इन पर भी गंभीरता से विचार किया जाएगा। उनका कहना था कि खेल और संगीत सिर्फ अतिरिक्त गतिविधियां नहीं हैं, बल्कि बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास का अहम हिस्सा हैं। सरकार इस बात से पूरी तरह वाकिफ है कि इन विषयों के बिना स्कूलों में शिक्षा अधूरी रह जाती है।
सदन में हंगामे के बीच चर्चा
यह चर्चा उस वक्त हुई जब विधानसभा में अन्य मुद्दों को लेकर विपक्ष का हंगामा भी जारी था। इसके बावजूद शारीरिक और संगीत शिक्षकों की बहाली का मुद्दा सदन में प्रमुखता से रखा गया। शिक्षा मंत्री के जवाब के बाद कुछ देर के लिए सदन का माहौल अपेक्षाकृत शांत हुआ।
अभ्यर्थियों में जगी उम्मीद
शिक्षा मंत्री की घोषणा के बाद उन अभ्यर्थियों में नई उम्मीद जगी है, जो वर्षों से फिजिकल और म्यूजिक टीचर की बहाली का इंतजार कर रहे हैं। कई अभ्यर्थियों का कहना है कि बार-बार शिक्षक भर्तियों की प्रक्रिया होती है, लेकिन इन विषयों को अक्सर पीछे छोड़ दिया जाता है। अब सरकार के इस आश्वासन से उन्हें लग रहा है कि आने वाले समय में उनके लिए भी अवसर बन सकता है।
स्कूलों की स्थिति पर सवाल
राज्य के कई सरकारी स्कूलों में आज भी खेल और संगीत की पढ़ाई औपचारिकता बनकर रह गई है। कहीं पीटी पीरियड में अन्य विषय पढ़ा दिए जाते हैं, तो कहीं संगीत की कक्षा ही नहीं लगती। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार वास्तव में शारीरिक और सांस्कृतिक शिक्षा को मजबूत करना चाहती है, तो इन विषयों के शिक्षकों की नियमित और पर्याप्त बहाली जरूरी है।
आगे की राह
फिलहाल सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि टीआरई चार के बाद फिजिकल और म्यूजिक टीचरों की आवश्यकता का आकलन किया जाएगा। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यह आकलन कितनी जल्दी होता है और इसके बाद बहाली की प्रक्रिया कब शुरू होती है। विधानसभा में हुई इस चर्चा ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शिक्षा सिर्फ किताबी ज्ञान तक सीमित रहेगी या फिर खेल और कला को भी उतनी ही अहमियत मिलेगी।


