बिहार में अगले 2 सालों में पूरा होगा विशेष भूमि सर्वेक्षण का काम, विभाग ने फिर तय की नई समयसीमा

पटना। बिहार में वर्षों से लंबित विशेष भूमि सर्वेक्षण को लेकर एक बार फिर सरकार ने नई समयसीमा तय कर दी है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने साफ किया है कि अगले दो वर्षों के भीतर हर हाल में विशेष भूमि सर्वेक्षण का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। सरकार का दावा है कि इस बार तय लक्ष्य केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जमीन पर ठोस नतीजे दिखेंगे। विभागीय स्तर पर इसकी लगातार समीक्षा की जा रही है और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अब किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
समीक्षा बैठक में उपमुख्यमंत्री का सख्त रुख
उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राज्य में चल रहे विशेष भूमि सर्वेक्षण कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा घोषित बिहार विशेष भूमि सर्वेक्षण को आगामी दो वर्षों में पूरा कराने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर जिले में तय समयसीमा के अनुसार कार्य योजना तैयार कर उसकी विस्तृत रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत की जाए। उपमुख्यमंत्री ने दो टूक कहा कि सर्वे कार्य पूरी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से होना चाहिए, ताकि आम लोगों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि भूमि से जुड़े विवाद और समस्याएं आम नागरिकों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन चुकी हैं और सर्वेक्षण का मकसद इन्हीं समस्याओं का समाधान करना है।
लापरवाही पर कार्रवाई के निर्देश
समीक्षा बैठक में यह भी साफ किया गया कि सर्वे कार्य केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सुधार का आधार बने। मंत्री ने कहा कि कहीं भी गलत रिपोर्टिंग, मनमानी या अनावश्यक देरी पाई गई, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। ऐसे मामलों में कड़ी प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की कि यदि सर्वे कार्य में किसी तरह की गड़बड़ी या गलती दिखे, तो उसकी जानकारी लिखित रूप में विभाग को दें। सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि ऐसी शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
पुराने सर्वे और नए सर्वे का अंतर
समीक्षा बैठक में प्रधान सचिव सी. के. अनिल और सचिव जय सिंह ने वर्षों पहले हुए कैडेस्ट्रल सर्वेक्षण और पुनरीक्षण सर्वेक्षण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुराने सर्वे में तकनीकी संसाधनों की कमी और समय के साथ बदलती परिस्थितियों के कारण कई त्रुटियां रह गई थीं। नए विशेष भूमि सर्वेक्षण से इन खामियों को दूर किया जा रहा है। भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय के निदेशक सुहर्ष भगत ने सर्वे की वर्तमान स्थिति और अब तक हुई देरी के कारणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक चरण में तकनीकी मार्गदर्शिका समय पर तैयार नहीं हो सकी, जिससे कार्य प्रभावित हुआ। यह मार्गदर्शिका मार्च 2019 में अधिसूचित की गई, इसके बाद ही सर्वे को गति मिल सकी।
पहले चरण की प्रगति
प्रथम चरण में राज्य के 20 जिलों के 89 अंचलों में विशेष भूमि सर्वेक्षण का कार्य शुरू किया गया था। दिसंबर 2021 में यह कार्य प्रारंभ तो हुआ, लेकिन सर्वेक्षण कर्मियों की समय पर नियुक्ति नहीं होने से अपेक्षित गति नहीं मिल पाई। इसके बावजूद अब तक 5657 राजस्व ग्रामों में हवाई सर्वेक्षण, ऑर्थोफोटोग्राफ, ग्राम स्तर पर उद्घोषणा और ग्राम सभा का कार्य शत-प्रतिशत पूरा किया जा चुका है। किस्तवार कार्य लगभग पूरा हो चुका है और खानापुरी का काम भी बड़ी सीमा तक पूरा कर लिया गया है। बड़ी संख्या में गांवों में प्रारूप अधिकार अभिलेख प्रकाशित किए जा चुके हैं, जबकि कई गांवों में अंतिम अधिकार अभिलेख भी जारी हो चुके हैं। इनमें से सैकड़ों गांवों के अभिलेख अधिसूचित किए जा चुके हैं।
दूसरे चरण में तेज हुई रफ्तार
द्वितीय चरण में 36 जिलों के 444 अंचलों के 37 हजार से अधिक राजस्व ग्रामों को शामिल किया गया है। इन गांवों में भी हवाई सर्वेक्षण, ऑर्थोफोटोग्राफ, ग्राम स्तरीय उद्घोषणा और ग्राम सभा का कार्य पूरा किया जा चुका है। रैयतों से दो करोड़ सत्तर लाख से अधिक स्वघोषणाएं प्राप्त हुई हैं, जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। लगभग सभी गांवों में आवश्यक प्रपत्रों का कार्य पूरा कर लिया गया है और त्रि-सीमाना निर्धारण तथा ग्राम सीमा सत्यापन का कार्य भी तेजी से चल रहा है। विभाग का कहना है कि अब फील्ड स्तर पर राजस्व संबंधी जटिलताओं के समाधान के लिए दिसंबर 2024 में 16 बिंदुओं पर विभागीय मार्गदर्शन भी जारी किया गया है।
आम जनता को क्या मिलेगा लाभ
सरकार का दावा है कि विशेष भूमि सर्वेक्षण पूरा होने के बाद जमीन से जुड़े विवादों में भारी कमी आएगी। सही और अद्यतन भू-अभिलेख मिलने से किसानों, रैयतों और आम नागरिकों को जमीन की खरीद-बिक्री, उत्तराधिकार और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी।
आगे की राह
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब विशेष भूमि सर्वेक्षण को किसी भी हाल में लंबित नहीं रहने दिया जाएगा। अगले दो वर्षों में इसे पूरा कर बिहार को अद्यतन और पारदर्शी भूमि रिकॉर्ड प्रणाली देने का लक्ष्य रखा गया है। अगर तय समयसीमा में यह कार्य पूरा होता है, तो यह राज्य के प्रशासनिक सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम माना जाएगा।

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