देशभर में मतदाता सूची पुनरीक्षण का तीसरा चरण शुरू, 36 करोड़ से अधिक मतदाताओं का होगा सत्यापन
- हरियाणा, झारखंड, दिल्ली समेत 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में चलेगा विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान
- घर-घर जाकर मतदाता सूची होगी अद्यतन, मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने पर रहेगा जोर
नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने गुरुवार को विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के तीसरे चरण की घोषणा कर दी। इस चरण के तहत देश के 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 36.73 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा। निर्वाचन आयोग के अनुसार इस चरण के पूरा होने के बाद हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को छोड़कर लगभग पूरे देश में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इन तीनों क्षेत्रों में मौसम और जनगणना के दूसरे चरण को ध्यान में रखते हुए बाद में कार्यक्रम घोषित किया जाएगा। निर्वाचन आयोग ने बताया कि इस व्यापक अभियान के लिए 3.94 लाख बूथ स्तरीय अधिकारियों की तैनाती की जाएगी। इनके साथ राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त 3.42 लाख बूथ स्तरीय अभिकर्ता भी सहयोग करेंगे। आयोग का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर चलाया जा रहा यह अभियान मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी, सटीक और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। तीसरे चरण में जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पुनरीक्षण अभियान चलाया जाएगा, उनमें हरियाणा, झारखंड, उत्तराखंड और दिल्ली सहित कई अन्य राज्य शामिल हैं। दिल्ली में इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद अंतिम मतदाता सूची 7 अक्टूबर को जारी की जाएगी। आयोग ने कहा कि हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बर्फबारी तथा कठिन मौसम परिस्थितियों के कारण वहां कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा। निर्वाचन आयोग ने 24 जून 2025 को पूरे देश में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाने का आदेश जारी किया था। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से राज्यों में मतदाता सूची का सत्यापन किया जा रहा है। पहले चरण में बिहार में यह प्रक्रिया शुरू हुई थी। दूसरे चरण के अंतर्गत 28 अक्टूबर 2025 से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह अभियान चलाया गया। इनमें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, तमिलनाडु, केरल, गोवा, पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप शामिल थे।निर्वाचन आयोग के अनुसार पहले दो चरणों में लगभग 59 करोड़ मतदाताओं को शामिल किया गया था। इस दौरान 6.3 लाख बूथ स्तरीय अधिकारी और 9.2 लाख बूथ स्तरीय अभिकर्ता अभियान में लगे थे। आयोग का कहना है कि यह दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक अभ्यासों में से एक है, जिसमें घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी एकत्र की जाती है और सूची को अद्यतन किया जाता है। विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और अद्यतन बनाना है। इस प्रक्रिया के दौरान 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं। वहीं जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है या जो किसी अन्य स्थान पर स्थायी रूप से चले गए हैं, उनके नाम सूची से हटाए जाते हैं। इसके अलावा मतदाताओं के नाम, पते और अन्य जानकारियों में मौजूद त्रुटियों को भी ठीक किया जाता है।निर्वाचन आयोग का कहना है कि वर्ष 1951 से लेकर 2004 तक कई बार विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाए जा चुके हैं, लेकिन पिछले 21 वर्षों में समाज और जनसंख्या में बड़े बदलाव आए हैं। इस दौरान लोगों का बड़े पैमाने पर पलायन हुआ है, कई लोगों के नाम दो अलग-अलग स्थानों की मतदाता सूचियों में दर्ज हो गए हैं और कई मृत व्यक्तियों के नाम अब भी सूची में बने हुए हैं। इसके अतिरिक्त विदेशी नागरिकों के नाम भी कुछ स्थानों पर मतदाता सूची में शामिल पाए गए हैं, जिन्हें हटाना आवश्यक है। आयोग ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए यह जरूरी है कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो। इसी उद्देश्य से यह व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। निर्वाचन आयोग ने लोगों से अपील की है कि वे इस प्रक्रिया में सहयोग करें और सही जानकारी उपलब्ध कराएं, ताकि देश की चुनावी व्यवस्था और अधिक पारदर्शी तथा विश्वसनीय बन सके।


